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मोहम्मद यूनुस ने ली बांग्लादेश के पीएम की शपथ 

 

काठमांडू, सावन २५ –बांग्लादेश में इस समय हालात काबू में नहीं है, देश में अब अंतरिम सरकार बनाई गई है जिसकी जिम्मेदारी मोहम्मद यूनुस ने संभाली है। हालांकि, उनके प्रधानमंत्री बनने के फौरन बाद उन्हें पश्चिम बंगाल से ५० से ज्यादा पत्र मिले हैं, जिनमें उन से सुरक्षा को लेकर अपील की गई है।
बांग्लादेश में छिड़े संग्राम के बाद देश में हर तरफ उथल   पुथल मची हुई थी, जिसके बाद अब देश में अंतरिम सरकार बनाई गई है, जिसकी कमान नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद युनुस ने संभाली, उन्होंने गुरुवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी ढाका में राष्ट्रपति के सरकारी आवास में शपथ ग्रहण समारोह हुआ। पीएम युनुस के साथ  साथ १६  और सहयोगियों ने भी शपथ ली है जिसमें २ महिलाओं और २ हिंदुओं को भी शामिल किया गया है।

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जैसे ही मोहम्मद युनुस ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, वैसे ही कुछ ऐसा हुआ जो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा, इधर वो प्रधानमंत्री की गद्दी पर काबिज हुए, उधर पश्चिम बंगाल से उन्हें ५०  से ज्यादा पत्र आ गए।

पत्र में  कहा गया कि पिछले दिनों देश में आंदोलन के चलते हालात काफी बिगड़ गए थे, जिस दौरान हिन्दू लोगों के घर भी तोड़े गए, लूटपाट की गई और आग तक लगा दी गई। देश में कई पुलिस थानों में आग लगाई गई और व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई थी, जिसके चलते ही पत्र में कहा गया, वैसे तो बांग्लादेश के लोग तय करेंगे कि देश में किस तरह का राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व आएगा, लेकिन हम प्रशासन और बांग्लादेश के आम लोगों, खासकर छात्र, जो आरक्षण विरोधी और भेदभाव विरोधी आंदोलन के जरिए यह बदलाव लेकर आये हैं, उन से अपील करते हैं कि वे हर बांग्लादेशी नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करें, चाहे उसका धर्म, राजनीतिक संबंध और पेशा कुछ भी हो।

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इस पत्र में आगे कहा गया, बांग्लादेश में जिस तरह के हालात है और जो कुछ हुआ हम उससे काफी चिंतित है। बांग्लादेश पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए सिर्फ जगह के हिसाब से एक पड़ोसी देश नहीं है, बल्कि दिल से भी पड़ोसी है, क्योंकि हमारी भाषा, संस्कृति और इतिहास एक है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में फिल्म निर्माता अपर्णा सेन, पवित्रा सरकार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक गांगुली भी शामिल हैं। पत्र में उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई है साथ ही एक समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के पूजा स्थलों की रक्षा करने की घटनाओं की सराहना भी की है।

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