Mon. Jan 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

छठ पर्व की अद्भुत महिमा : आचार्य राधाकान्त शास्त्री


आचार्य राधाकान्त शास्त्री  । छठ पर्व विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता का दिवस है। इस दिन स्त्रियां अपने सम्पूर्ण वैभव के साथ सज-धज कर अपने आँचल में फल ले कर निकलती हैं तो लगता है जैसे संस्कृति स्वयं समय को चुनौती देती हुई कह रही हो, “देखो! तुम्हारे असँख्य झंझावातों को सहन करने के बाद भी हमारा वैभव कम नहीं हुआ है, हम सनातन हैं, हम भारत हैं। हम तबसे हैं जबसे तुम हो, और जब तक तुम रहोगे तब तक हम भी रहेंगे।”

जब घुटने भर जल में खड़ी व्रती की सिपुलि में बालक सूर्य की किरणें उतरती हैं तो लगता है जैसे स्वयं सूर्य बालक बन कर उसकी गोद में खेलने उतरे हैं। स्त्री का सबसे भव्य, सबसे वैभवशाली स्वरूप वही है। इस धरा को “भारत माता” कहने वाले बुजुर्ग के मन में स्त्री का यही स्वरूप रहा होगा। कभी ध्यान से देखिएगा छठ के दिन जल में खड़े हो कर सूर्य को अर्घ दे रही किसी स्त्री को, आपके मन में मोह नहीं श्रद्धा उपजेगी।

छठ वह प्राचीन पर्व है जिसमें राजा और रंक एक घाट पर माथा टेकते हैं, एक देवता को अर्घ देते हैं, और एक बराबर आशीर्वाद पाते हैं। धन और पद का लोभ मनुष्य को मनुष्य से दूर करता है, पर धर्म उन्हें साथ लाता है।

अपने धर्म के साथ होने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि आप अपने समस्त पुरुखों के आशीर्वाद की छाया में होते हैं। छठ के दिन नाक से माथे तक सिंदूर लगा कर घाट पर बैठी स्त्री अपनी हजारों पीढ़ी की, सास ,अजिया सास ननिया सास की छाया में होती है, बल्कि वह उन्ही का स्वरूप होती है। उसके दउरे में केवल फल नहीं होते, समूची प्रकृति होती है। वह एक सामान्य स्त्री सी नहीं, अन्नपूर्णा सी दिखाई देती है। ध्यान से देखिये! आपको उनमें कौशल्या दिखेंगी, उनमें मैत्रेयी दिखेगी, उनमें सीता दिखेगी, उनमें अनुसुइया दिखेगी, सावित्री दिखेगी… उनमें पद्मावती दिखेगी, उनमें लक्ष्मीबाई दिखेगी, उनमें भारत माता दिखेगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि उनके आँचल में बंध कर ही यह सभ्यता अगले हजारों वर्षों का सफर तय कर लेगी।

छठ डूबते सूर्य की आराधना का पर्व है। डूबता सूर्य इतिहास होता है, और कोई भी सभ्यता तभी दीर्घजीवी होती है जब वह अपने इतिहास को पूजे। अपने इतिहास के समस्त योद्धाओं को पूजे और इतिहास में अपने विरुद्ध हुए सारे आक्रमणों और षड्यंत्रों को याद रखे।

यह भी पढें   गगन थापा  निर्विरोध सभापति,थापा ने लिया शपथ ग्रहण, अन्य का शपथ ग्रहण आज

छठ उगते सूर्य की आराधना का पर्व है। उगता सूर्य भविष्य होता है, और किसी भी सभ्यता के यशश्वी होने के लिए आवश्यक है कि वह अपने भविष्य को पूजा जैसी श्रद्धा और निष्ठा से सँवारे… हमारी आज की पीढ़ी यही करने में चूक रही है, पर उसे यह करना ही होगा… यही छठ व्रत का मूल भाव है।

मैं खुश होता हूँ घाट जाती स्त्रियों को देख कर, मैं खुश होता हूँ उनके लिए राह बुहारते पुरुषों को देख कर, मैं खुश होता हूँ उत्साह से लबरेज बच्चों को देख कर… सच पूछिए तो यह मेरी खुशी नहीं, मेरी मिट्टी, मेरे देश, मेरी सभ्यता की खुशी है।

यह भी पढें   सरकार की विफलता और अंतरिम सरकार का इतिहास : श्वेता दीप्ति

मेरे देश की माताओं!
भगवान आदित्य आपकी सिपुलि में उतरते हैं। तो सबने उनसे कहा कि इस देश, इस संस्कृति पर अपनी कृपा बनाये रखें, ताकि हजारों वर्ष बाद भी हमारी पुत्रवधुएँ यूँ ही सज-धज कर गंगा के जल में खड़ी हों और कहें-
“उगs हो सुरुज देव, भइले अरघ के बेर…”

भगवान भास्कर और छठी मैया आजीवन मेरे सभी अपनों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
छठ पूजा की बहुत बहुत शुभकामनाएँ।
*भगवान भास्कर और माता षष्ठी देवी के साथ श्री हरि विष्णु, श्री गणेश, पार्वती एवं महादेव आप सब मेरे विशेष प्रार्थना से मेरे सभी अपनों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखना।” आज के व्रत पूजन से मेरे सभी अपनों को उत्तम आयु आरोग्यता, सुख सौभाग्य, संतति संतान, नौकरी आजीविका, पद प्रतिष्ठा, ऋण रोग शोक से मुक्ति और सर्व मनोकामना पूर्णता प्रदान करें। माता षष्ठी देवी हम सबके सपरिवार में अटूट प्रेम पवित्र समर्पण, अनुपम साफल्यता बनाए रखें। सबके ऊपर श्री हरि विष्णु के साथ माता महालक्ष्मी के निरंतर शुभद आशीष के लिये मेरी विनम्र प्रार्थना….*
????????????????????
????????????????????
*हरि ॐ गुरुदेव..!*
*✒✍???? ✒✍????*
*ज्योतिषाचार्य*
*आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*????शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम????*
*राजिस्टार कालोनी, पश्चिम करगहिया रोड, वार्ड:- 2, नजदीक कालीबाग OP थाना, बेतिया पश्चिम चम्पारण, बिहार, 845449,*
????????????????????
*पदेन:-*
*संस्कृत शिक्षक:- राजकीयकृत युगल प्रसाद +2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भैसही, चनपटिया,बेतिया बिहार*
*व्हाट्सअप एवं संपर्क:-*
*9934428775*
*9431093636*
*????व्हाट्सएप से हर समय सेवा में, (अहर्निशं सेवा महे)????*
*आवश्यक वार्तालाप का समय:- प्रातः 6:30 से 8:30 तक एवं सायं 4 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक।*
*!!भवेत् तावत् शुभ मंगलम्!!*

यह भी पढें   घासीराम सरजू देवी तापडिया सेवा ट्रस्ट के द्वारा जरूरतमंदों को सामग्री वितरण 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *