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माओवादी धार की पार्टियाँ मना रही है आज ३०वाँ ’जनयुद्ध दिवस’

 

काठमांडू, फागुन १ – तत्कालीन १० वर्षीय सशस्त्र संघर्ष से जुड़े माओवादी धार की पार्टियाँ आज ३०वाँ ’जनयुद्ध दिवस’ मना रही है । २०५२ फागुन १ गते (१३ फरवरी १९९६) को माओवादियों ने देशभर विद्रोह शुरू किया था, जिसकी याद में माओवादी धार ’जनयुद्ध दिवस’ मनाता आ रहा है ।
जनयुद्ध दिवस के अवसर पर नेकपा माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने कहा कि वे इसे नेपाली जनता के ऐतिहासिक संघर्ष के दिन के रुप में स्मरण करते है । उन्होंने कहा कि ‘अभी की पीढ़ी के मन में यह प्रश्न उठ सकता है कि जनयुद्ध क्यों आवश्यक था और इससे क्या उपलब्धि हासिल हुई ? लेकिन इसके साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि यदि जनयुद्ध नहीं हुआ होता तो हम कहाँ होते ? ये बातें उन्हें जानना जरुरी है ।
उन्होंने दाबा करते हुए यह भी कहा कि दमन विरुद्ध का प्रतिरोध ही जनयुद्ध के रूप में प्रकट हुआ । ‘यदि जनता ने उस स्तर का प्रतिरोध नहीं किया होता तो हम अभी भी सामन्ती शोषण में ही होते । राजनीतिक अधिकार से लेकर समाज में इस स्तर की चेतना का विकास नहीं हो सकता था । इसलिए जनयुद्ध आधुनिक नेपाली राजनीति का एक महान् परिघटना थी, हम इसपर गर्व करते हैं ।
दिवस मनाने के लिए माओवादी द्वारा जीते गए देश के विभिन्न पालिकाओं में आज सार्वजनिक छुट्टी दी गई है । सर्वोच्च अदालत के फैसला विपरीत छुट्टी देने के कारन अन्य दल इसका विरोध कर रहे हैं ।
०७९ माघ २९ गते को तत्कालीन पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ नेतृत्व के मन्त्रिपरिषद ने हरेक वर्ष के फागुन १ गते ‘जनयुद्ध दिवस’ मनाने के लिए सार्वजनिक छुट्टी देने का निर्णय किया था । लेकिन मन्त्रिपरिषद् के उक्त निर्णय को सर्वोच्च अदालत से रोक लगाया गया था । ०८० पुष १३ गते जारी हुए आदेश ने जनयुद्ध दिवस के अवसर में देशभर सार्वजनिक छुट्टी देने के सरकार के निर्णय को खारिज कर दिया था ।

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