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‘नागार्जुन और युद्ध प्रसाद मिश्र के रचना कर्म’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

 

कल्याणी : 19 मार्च, 2025

हिंदी विभाग, कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रेमचंद सभागार में ‘नागार्जुन और युद्ध प्रसाद मिश्र के रचना कर्म’ विषय पर एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में उपस्थित विश्वविद्यालय के कला एवं वाणिज्य संकाय की डीन प्रो. सावित्री नंदा चक्रबर्ती, विशिष्ट अतिथि नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के सदस्य सचिव डॉ. धन प्रसाद सुवेदी जी, मुख्य अतिथि के रूप में कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व प्रो. डॉ. चन्द्रकला पाण्डेय जी ने दीप-प्रज्वलित कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया और कार्यक्रम के आरंभ में विभाग के विद्यार्थी आकाश चौधरी ने नागार्जुन की कविता ‘शासन की बन्दुक’ और शोध छात्रा दीपाली ओरावं ने युद्ध प्रसाद मिश्र की नेपाली कविता का पाठ किया। स्वागत भाषण विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. विभा कुमारी ने किया।

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उद्घाटन सत्र में प्रो. डॉ. सावित्री नंदा चक्रबर्ती जी ने नेपाली और हिन्दी भाषा के सम्मिलन को बेहद महत्वपूर्ण बताया। डॉ. धन प्रसाद सुवेदी जी ने भारत और नेपाल के सांस्कृतिक महत्त्व को रेखांकित किया। प्रो. चन्द्रकला पाण्डेय जी ने नागार्जुन और युद्ध प्रसाद मिश्र की कविताओं के तुलनात्मक सन्दर्भों को उद्घाटित किया।

तकनीकी सत्र के अध्यक्ष पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण होता ने नागार्जुन और युद्ध प्रसाद मिश्र की कविताओं में व्यक्त मुक्ति की चेतना को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘सत्ता हर काल में दमनकारी होती है।’ दोनों रचनाकारों के परिवर्तनकारी कामनाएँ एक तरफ आम आदमी की दयनीय दशा और दूसरी तरफ सत्ता के दमन चक्र से लड़ाई करती हैं। इनकी कविताओं में प्रतिरोध का स्वर और उम्मीद की किरण दोनों ही लक्षित होते हैं जिनमें जनतांत्रिक मूल्यों का सर्वाधिक स्थान है। वक्ता के रूप में उपस्थित नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. देवी नेपाल जी ने दोनों कवियों की कविताओं में वैचारिक समानता, मानवीय चेतना और जागरण का संवाहक बताया है। एस.डी.आई. कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी ने कहा कि नेपाली समाज की संरचना को समझने के लिए युद्ध प्रसाद मिश्र को पढ़ना जरूरी है। डॉ. नवराज लम्साल ने दोनों कवियों को सत्ता का प्रतिरोधी बताया है।

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इस संगोष्ठी में देश भर के विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों से आए शिक्षकों और शोधार्थियों ने शोध-पत्र वाचन किया। इनमें डॉ. शारदा बैनर्जी, डॉ. कलावती कुमारी, डॉ. अनीता ठाकुर, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. रीता चौधरी, वंदना गुप्ता, पंकज कुमार शाह आदि शामिल रहे। इसकी अध्यक्षता विभाग की प्रोफेसर डॉ. विभा कुमारी ने की ।

संगोष्ठी का संचालन विभाग के शोधार्थी अनूप कुमार गुप्ता और अध्यापक डॉ. इबरार खान ने किया। विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु कुमार के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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