जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी बनी, नागरिक जनमत पार्टी
जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, कार्यदल बनाकर अपनी एकता पर काम कर रही हैं, पार्टी ने एकीकृत पार्टी के नेतृत्व संरचना और चुनाव चिन्ह जैसे मुद्दों को अंतिम रूप दे दिया है। यह विश्लेषण किया गया है कि मधेशी और थारू समुदाय पर केन्द्रित राजनीति करने वाली इन दोनों पार्टियों के बीच एकता से एक ऐसी पार्टी बनेगी जिसका प्रभाव पूर्व से पश्चिम तक मधेश के सम्पूर्ण भूगोल पर होगा।
जनमत और नागरिकक उन्मुक्ति पार्टी के विलय के बाद पार्टी का नाम नागरिक जनमत और चुनाव चिन्ह ढकिया रखने पर सहमति बनी है। रविवार को अमरपुर, मधुवन नगर पालिका, बर्दिया में एकता कार्यदल की बैठक में नाम और चुनाव चिन्ह पर सहमति बन गई। एकीकरण प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कुछ दिनों में कार्यसमिति की बैठक होगी।
कार्यदल में शामिल जनमत के उपाध्यक्ष अब्दुल खान ने बताया कि रेशम लाल चौधरी पार्टी के संरक्षक होंगे और सीके राउत कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। इस बात पर सहमति बनी है कि नौपा अध्यक्ष रंजीता श्रेष्ठ तीसरे स्थान पर रहेंगी। क्षेत्र के लिहाज से राउत को चितवन से झापा तक की जिम्मेदारी दी गई है। प्रारूप समिति ने चौधरी को चितवन से पश्चिम तक की जिम्मेदारी दी है। जनमत के उपाध्यक्ष खान ने कहा कि पार्टी एकीकरण का मुद्दा अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय हो जाएगा और 15 गते बैसाख को इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
मधुबन के अमरपुर में एकता के लिए पहली कार्यकारिणी की बैठक से पहले जनमत अध्यक्ष राउत और नौपा संरक्षक चौधरी ने गुलरिया में विचार-विमर्श किया। चौधरी ने बताया कि पार्टी एकीकरण के लिए पांच व छह अप्रैल को टीकापुर में नौपा की बैठक होगी।
जनमत के अध्यक्ष राउत ने बताया कि राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते उनकी पार्टी एकीकरण में अग्रणी भूमिका निभाएगी। अध्यक्ष राउत ने कहा कि दोनों दलों के बीच एकीकरण की कोई मांग नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बनती है तो दोनों दल अपना रुख छोड़ देंगे।” हम एकीकरण का मुद्दा जल्द ही सुलझा लेंगे। पहचान का मुद्दा दोनों पक्षों का मामला है। मसौदा समिति की बैठक में दोनों दलों के उच्चस्तरीय नेता भाग ले रहे हैं।
दूसरी ओर,लोसपा, जसपा नेपाल, राष्ट्रिय मुक्ति मोर्चा, जनमत, जनता प्रगतिशील, नागरिक उन्मुक्ति एवं तमलोपा ने चैत्र 21 को ‘संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा’ की घोषणा की थी। यह माेर्चा मधेसी, थारू और मूलनिवासी लोगों के एजेंडे को और भी जोरदार तरीके से उठाएगा। वर्तमान में एक ही भूगोल पर केन्द्रित तथा एक ही एजेंडे की वकालत करने वाली पार्टियों के बीच निकटता सकारात्मक है। इससे उनके एजेंडे को अधिक सार्थक और शक्तिशाली बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान एकता प्रयासों और अग्रिम पंक्ति की कार्रवाई में उनका निरंतर विश्वास अपेक्षित है।

