Tue. Apr 21st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

संविधान संशोधन ‘पेंडोरा बॉक्स’ नहीं, उचित समय पर होगा: प्रधानमंत्री ओली

 

प्रधानमंत्री की व्यंग्यात्मक टिप्पणी: मुझे श्राप देने की बजाय ‘डायन’ ही बना दीजिए

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मधेस क्षेत्र में जारी अंधविश्वास की घटनाओं पर गहरी चिंता और दुःख व्यक्त किया है। मंगलवार को मधेस प्रदेश सभा को विशेष संबोधन करते हुए उन्होंने ‘डायन’ के नाम पर हो रहे अन्यायों की आलोचना की।

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा,
“अगर सच में डायन होती है, तो मुझे दुनिया भर से श्राप देने की जगह डायन ही बना दीजिए, लगा दीजिए मुझे!”

प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि डायन के नाम पर हो रहा भेदभाव और अत्याचार सरकार को बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने सवाल किया,
“ना पढ़ा, ना लिखा और कह दिया कि उसने जादू किया, डायन बना दिया – क्या यह अंधविश्वास की हद नहीं है? इसे त्यागना होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि अंधविश्वास समाज को संगठित नहीं कर सकता।
दहेज से जुड़े घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा,
“दहेज ना मिलने पर मंडप छोड़कर दूल्हा भाग जाता है, या मोटरसाइकिल ना मिली तो दुल्हन को छोड़ दिया जाता है – यह समाज को जोड़ने वाले काम नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“दहेज समाज की बीमारी है, इसे अपनाना नहीं, छोड़ना चाहिए।”

यह भी पढें   सरकार के लिए हर्क साम्पाङ का ३३ सुत्रीय सुझाव

भ्रष्टाचार मत कीजिए, दुनिया में कुछ भी गोपनीय नहीं रहता: प्रधानमंत्री ओली

प्रधानमंत्री ओली ने सांसदों को विकास कार्यों में भ्रष्टाचार से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा,
“यदि हम विकास के नाम पर लाभ कमाना चाहेंगे, तो जनता में व्यवस्था के प्रति घृणा उत्पन्न होगी।”

उन्होंने जोर देकर कहा,
“एक भ्रम पालना नहीं चाहिए कि दुनिया में कुछ भी गोपनीय रह सकता है। आप जितना भी छुपाएं, लोग जान ही जाते हैं।”

प्रधानमंत्री ने चेताया कि भ्रष्टाचार चाहे जितना छिपाया जाए, बाहर आ ही जाता है, इसलिए जनप्रतिनिधियों को सचेत रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सेवाएं सरल और सुलभ तरीके से दी जाएं, तो लोकतंत्र मजबूत होता है।

संविधान संशोधन ‘पेंडोरा बॉक्स’ नहीं, उचित समय पर होगा: प्रधानमंत्री

यह भी पढें   नेपाल-भारत सीमा पर बढ़ी नाराज़गी, सरकार मौन, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने भी उठाए सवाल

प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि संविधान संशोधन एक नियमित प्रक्रिया है और इसे ‘पेंडोरा बॉक्स’ की तरह प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया,
“हम समिति बनाकर तय करेंगे कि संविधान में कहां-कहां और क्या-क्या संशोधन होना है।”

उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो अन्य पक्षों से भी बातचीत की जाएगी।
उन्होंने कहा,
“संविधान संशोधन के नाम पर किसी को खेलने का मौका नहीं दिया जाएगा। पहले भी दो बार संशोधन हो चुका है, आगे भी होगा।”

सरकार के गिरने की अफवाहों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा,
“यह सरकार एक विशेष उद्देश्य के तहत बनी है। न सिर्फ गिरेगी नहीं, हिलने वाली भी नहीं है।”

उन्होंने दो पड़ोसी देशों से मजबूत संबंध की बात दोहराते हुए कहा कि
“हम इन संबंधों को और भी गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

ऋण से डरकर विकास नहीं रुकता’: प्रधानमंत्री ओली

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन का फैसला – विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों से हटेंगे दलीय विद्यार्थी व कर्मचारी संगठन

प्रधानमंत्री ओली ने स्पष्ट कहा कि ऋण लेने से डरकर देश का विकास नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने कहा,
“अगर केवल हमारी आमदनी से विकास करना हो, तो वह संभव नहीं है। इसलिए हमें साधारण खर्च कम करके मितव्ययिता अपनानी होगी।”

उन्होंने प्रशासनिक खर्च के बढ़ते बोझ पर चिंता जताते हुए कहा,
“एक सौ रुपए का विकास कार्य करने में दो सौ रुपए का प्रशासनिक खर्च हो रहा है – यह सही स्थिति नहीं है। इसे सुधारना होगा।”

प्रधानमंत्री ने ऋण को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाओं को खारिज करते हुए कहा,
“जापान जैसा विकसित देश भी राष्ट्रीय आय से ज्यादा ऋण लेकर विकास करता है। जब विकास होता है, तब आमदनी बढ़ती है और ऋण चुकाया जा सकता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि
“हमारा ऋण हमारी राष्ट्रीय वार्षिक आय का केवल २४-२५ प्रतिशत है, जो डरा देने वाली स्थिति नहीं है, यदि सावधानी से उसका उपयोग किया जाए।”

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *