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उस पार तुम हो इस पार हूं मैं

kumar sachitanand
 

kumar sachitanandकुमार सच्चिदानन्द:नेपाल और भारत का मैत्री सम्बन्ध पौराणिक और ऐतिहासिक है । अगर मोदीजी के शब्दों का प्रयोग करें तो ‘यह सम्बन्ध उतना ही पुराना है जितना हिमालय और गंगा ।’ दोनों देशों के बीच १८७२ किलोमीटर की खुली सीमा है और इस खुली सीमा पर लोक व्यवहार ऐसा है कि सब्जियाँ एक देश में उपजती हैं और स्वाद दूसरे देश की जनता लेती है, ब्याह एक देश में होता है और बैण्ड बाजे दूसरे देश के होते हैं और मौत एक देश में होती है तथा शवयात्रा में दूसरे देश के नागरिक शामिल होते हैं ।  यह परस्पर निर्भरता और गहराई दोनों देशों के बीच के मैत्री सम्बन्धों को सौन्दर्य और गति देती हैं ।
यह सच है कि नेपाल और भारत का सम्बन्ध ऐतिहासिक और पौराणिक होने के साथ–साथ सांस्कृतिक और धार्मिक भी है । सम्बन्धों के इस पक्ष की अगर हम दुहाई दें तो विशाल आर्यावत्र्त के अनेक देश इस परम्परा की कड़ी हो सकते हैं । लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि व्यावसायिक और सामाजिक दृष्टि से दोनों देश गहरे रूप से जुड़े हैं । यही कारण है कि राजनैतिक स्तर पर कभी–कभी नेताओं की जुबान की कैंची चलती है, आशंकाओं की काली छाया में नीतियों की आत्मा प्रवाहित होती है । लेकिन ऐसा वही लोग करते हैं जिनका सरोकार सीधे तौर पर सीमा से नहीं है । सीमा से जुड़े लोग इससे प्रभावित तो होते मगर सम्बन्धों की मिठास कायम रखने के लिए रास्ता अन्ततः ढूँढ ही लेते हैं ।
अगर नेपाल के पक्ष से विचार करें तो बेहतर सम्बन्धों की दुहाई तो दी जाती है लेकिन सरकार की ऐसी आर्थिक नीतियाँ हैं कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय मुद्रा का चरम अभाव है । महज ढ़ाई हजार रूपए के लिए लोग घण्टों धूप सेंकते हैं और जो इससे बचना चाहते हैं उनके लिए एक सौ नेपाली रूपए के की कीमत महज साठ भारतीय रूपया मात्र रह जाता है । भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में नेपाली रूपए का प्रचलन दिनानुदिन घटता जा रहा है । सवाल है कि आम लोगों की यह असुविधा और घटी हुई क्रयशक्ति का जिम्मेवार कौन है और क्या इससे यात्रा, चिकित्सा आदि प्रभावित नहीं होती ?
कभी नेपाल भारत की यही खुली सीमा थी जहाँ जटिलता नगण्य थी । लेकिन आज यही सीमा है जो खुली तो है लेकिन आज इस पर दोनों देशों के सुरक्षाबल तैनात हैं । हवाला तस्करी, अपराध और आतंकवाद का दिया जा रहा है । आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि यह अवस्था क्यों आई ? खुली सीमा पर उपभोक्ता वस्तुओं का क्रय–विक्रय और लेन–देन सब दिन होता रहा है । सम्बन्धों की इस आड़ में तस्कर क्रियाशील हैं और इसका लाभ उठाकर अपराधी भी अपनी रोटियाँ सेंक लेते हैं । इसलिए आज सुरक्षाबलों की तैनाती पर सवाल उठाने की अवस्था नहीं है लेकिन इन सुरक्षाबलों से सम्बन्धों की इस विशेषता को देखते हुए आम लोगों के साथ प्रस्तुत होने की अपेक्षा तो की ही जा सकती है । एक दूसरे देश के नागरिकों को नीचा दिखलाने या अपमानित करने की प्रवृत्ति के जो समाचार यदा–कदा संचार माध्यमों में आते रहते हैं उससे तो बचना ही होगा ।
भले ही अपराधी किसी देश के नागरिक क्यों न हो लेकिन अपराध का कोई देश नहीं होता । इसलिए किसी एक देश के अपराधी को दूसरे देश में पकड़कर उस देश को ही कठघड़ा में खड़ा करने के मनोविज्ञान को किसी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता ।
नेपाल भारत की सीमा खुली है और सरोकार अनन्त हैं । इसलिए समस्याएँ भी अनेकमुखी हैं । लेकिन सीमा विवाद के एकाध बिन्दुओं को छोड़ दें तो समस्याएँ इतनी जटिल नहीं जिसे सुलझायी नहीं जा सकती । आवश्यकता है ईमानदारी से इस दिशा में बढ़ने की । पूर्वाग्रह से दूर हटकर और खुले मिजाज से नीतियाँ बनेंगी तो सम्बन्धों में गतिशीलता बरकरार रहेगी ।
वीरगंज में नेपाल भारत बोर्डर समिट
नेपाल के प्रमुख प्रवेश द्वार वीरगंज में नेपाल–भारत की खुली सीमा की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ाने के उद्देश्य से ‘भारत का महावाणिज्य दूतावास’, वीरगंज की आयोजना में द्विदिवसीय ‘नेपाल–भारत समिट, २०१५’ स्थानीय भीस्वा होटल के सभाकक्ष में सम्पन्न हुआ । भारत और नेपाल की सीमाएँ खुली हुई हैं और इसका स्वरूप कैसा होना चाहिए, इसे सीमावर्ती लोग ही जानते हैं जबकि नीतियाँ राजधानी केन्द्रित बनती रहीं हैं । इसलिए पहली बार इस तरह का आयोजन सीमावर्ती शहर वीरगंज में किया गया जिसमें दोनों ही देशों के उच्च पदस्थ वर्तमान तथा निवत्र्तमान पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों  की सहभागिता थी ।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत की गृहसचिव, सीमा प्रबन्धन श्रीमती स्नेहलता कुमार, नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे, नेपाल कस्टम के डीजी दामोदर रेग्मी, कस्टम आयुक्त किशोरीलाल, नेपाल के पूर्व गृहराज्यमंत्री रिजवान अंसारी एवं महावाणिज्यदूत श्रीमती अंजू रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस वृहत् कार्यक्रम के परिचयात्मक पहलुओं को उद्घाटित करते हुए श्रीमती रंजन ने कहा कि भारत और नेपाल सरकारों के बीच उच्चस्तरीय वार्ताएँ होती रहती हैं । दोनों देशों की सरकार जो कानून बनाती हैं, आम जनता उसे स्वीकार करती है । कभी जनस्तर की बात नहीं होती । यह कार्यक्रम वीरगंज में इसलिए आयोजित किया गया क्योंकि दो तिहाई लोगों का नेपाल आना इसी रास्ते से होता है, सीमा पर रहनेवाले लोग ही जानते हैं कि सीमा कैसी होनी चाहिए । इसलिए इस समिट का आयोजन किया गया कि इसके माध्यम से सीमावर्ती लोगों की आवाज दोनों देशों की सरकारों तक पहुँच सके ।
इस आयोजन में अपना विचार प्रकट करते हुए पूर्व गृहराज्यमंत्री रिजवान अंसारी ने कहा कि भारत तरक्की करे यह हम चाहते हैें लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि नेपाल की जमीन का प्रयोग भारत के विरुद्ध न हो । खुली सीमा दोनों देशों के सम्बन्ध की विशेषता है, इसका प्रयोग देश हित में होना चाहिए । खुली सीमा के साथ समस्याएँ भी हैं लेकिन समस्याओं का समाधान देशहित में होना चाहिए । उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘खुली खिड़की विद नेट’ का फार्मूला दिया और सीमाओं पर होनेवाली अवांछित गतिविधियों पर नियंत्रण की बात कही । उन्होंने सीमा व्यवस्थापन इस ढंग की होने की बात कही कि दोनों देशों के नागरिकों को सीमा पार करने पर अतिथियों जैसा भाव महसूस हो । समिट को सम्बोधित करते हुए कस्टम आयुक्त किशोरीलाल ने कहा कि सीमा पर अकेले काम नहीं किया जा सकता । जो भी एजेंसी सीमा पर काम कर रही है, सबके बीच आपसी तालमेल का होना जरूरी । आपसी समन्वय बढ़ाने के साथ–साथ व्यापार वृद्धि के लिए भी एक सोच का होना आवश्यक है ।
इस कार्यक्रम में अपना विचार रखते हुए नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने कहा कि नेपाल–भारत का सम्बन्ध प्रगाढ़ है और इसका आधार सांस्कृतिक और जनसम्बन्ध है । इन दोनों सम्बन्धों का आधार हमारी खुली सीमा है । यह महत्वपूर्ण है कि इसे कितना प्रभावी बनाया जाना चाहिए । इस समिट का महत्व इस बात से आँका जा सकता है कि इसमें सचिव, सीमा प्रबन्धन भारत सरकार श्रीमती स्नेहलता कुमार हमारे साथ है । उन्होंने कहा कि खुली सीमा के कारण विकास हुआ है । भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता है कि पड़ोसियों के साथ बेहतर सम्बन्ध हो । इसके लिए हाइड्रो पावर, ऑयल पाइप लाईन आदि कई परियोजनाओं पर काम हो रहा है । उन्होंने यह भी बताया कि सीमाओं के सम्बन्ध में कभी–कभी जटिलताओं का कारण केन्द्र राज्य सम्बन्ध भी होता है । इसके समाधान के लिए विदेश मंत्रालय में एक विभाग बनाया गया है जिससे सीमा की जो समस्या राज्य स्तर पर समाप्त हो सकती है उसे राज्य सरकार के सहयोग से कराया जाए । इसके लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं । उन्होंने सीमा को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की बैठक और जन–संवाद पर बल दिया ।
छः सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम में आपसी बंधुत्व, पर्यटन, व्यापार, सुरक्षा आदि क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों की राय जानी गई । कार्यक्रम के दूसरे दिन नेपाल भारत के पर्यटन पर ए. एन. इन्सटीच्यूट पटना से आए विशेषज्ञ प्रो. अभिजीत घोष एवं डॉ. नीतू चौधरी के द्वारा प्रजेण्टेसन दिया गया । दोनों देशों के बीच पर्यटन की राह में आने वाली परेशानियों पर प्रकाश डालते हुए यह विचार दिया गया कि सीमाई इलाके में विकास की कमी होने के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ है । नेपाल की ओर से विचार रखते हुए वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रकिशोर ने कहा कि खुली सीमा के कारण सदियों से चली आ रही दोनों देशों के नागरिक सम्बन्धों को कुछ तत्व बिगाड़ने के लिए क्रियाशील हैं । काठमाण्डू और दिल्ली के बीच सम्बन्धों से कभी–कभी यह कटुता सतह पर भी आई है । यह भी विचार आया कि दोनों देशों की सीमा की सुरक्षा के लिए काम कर रही पुलिस को अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से व्यवहार करना चाहिए । पूर्व वित्त सचिव, नेपाल सरकार आर. पी. खनाल ने यह विचार दिया कि जो भी नीति दिल्ली और काठमाण्डू से बनती है, उसे लागू करने से पूर्व यह जानना जरूरी है कि ये नीतियाँ जनस्तर पर कितना प्रासंगिक है ।
कार्यक्रम के अंत में महावाणिज्यदूत अंजू रंजन ने पूरे समिट पर अपनी राय रखते हुए इसमें आई बातों पर प्रशासनिक राय बनाने की बात कही । इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव अभय ठाकुर, लैंडपोर्ट ऑथरिटी के चेयरमेन वाइ एस शेरावत, उद्योग निदेशक बिहार, आर लक्ष्मण, पर्सा जिला के पूर्व प्रमुख जिलाधिकारी कैलाश कुमार वजिमय, नेपाल सशस्त्र प्रहरी के डीआईजी राम शरण पौडेल, एसएसबी के डीआइजी डी. के. सिन्हा, एसएसपी रमेशप्रसाद खरेल, एसपी मनोज न्यौपाने, उद्योग वाणिज्य संघ के प्रदीप केडिया, भारत नेपाल मैत्री संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सरावगी, विदेश मामलों के विशेषज्ञ लोकराज बराल, सभासद सुरेन्द्र चौधरी, पूर्व सभासद अजय चौरसिया, अजय द्विवेदी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।
कुल मिलाकर यह एक वृहत् और सफल आयोजन था, जिसमें बहुकोणीय और बहुआयामिक रूप से सीमा से जुड़ी समस्याओं का समाधान ढूँढने का प्रयास किया गया । इस दृष्टि से यह एक ऐतिहासिक आयोजन रहा क्योंकि इस तरह के प्रयास नेपाल में पहले नहीं हुए थे । लेकिन इसे परंपरा की शुरुआत मानी जानी चाहिए । इसकी सफलता यह है कि दोनों देशों के रिश्तों की अहमियत को समझते हुए वृहत् पैमाने पर विचार मंथन हुआ । लेकिन सबसे बड़ी सफलता यह होगी कि इसमें प्राप्त निष्कर्षों को जमीन पर उतारा जाए ।
आयोजन में उठी
दस महत्वपूर्ण माँग
  रक्सौल को स्मार्ट सिटी बनाया जाना चाहिए ।
  रक्सौल को जाम और धूल की समस्या से मुक्ति मिलनी चाहिए ।
  बर्दीधारी को सिविल रवैया अपनाने की माँग ।
 रक्सौल से सुपरफास्ट ट्रेन की माँग ।
   वीरगंज ड्राईपोर्ट तक सवारी ट्रेन चलाने की माँग ।
   रक्सौल रेलवे कॉसिंग पर ओवरव्रिज की माँग ।
  ट्रेड एवं ट्रांजिट नीति को रिवाइज करने की माँग ।
   स्थानीय स्तर पर दोनों देशों के अधिकारियों की नियमित बैठक की माँग ।
   दोनों देशों के कस्टम के यूनीफार्म की माँग ।

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