Wed. Jul 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

हिंगलाज शक्तिपीठ है बलुचिस्तान में, जहाँ गिरा था सती का सर

 

काठमान्डू 16 मई

हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लासबेला जिले में स्थित एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र मंदिर है. यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसे हिंगलाज शक्तिपीठ भी कहा जाता है. मान्यता है कि जब भगवान शिव माता सती के शव को लेकर विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के टुकड़े किए और जहां-जहां ये गिरे वहां शक्तिपीठ बने. हिंगलाज वह स्थान है जहां माता सती का मस्तक गिरा था. यह मंदिर हिंगोल नदी के किनारे स्थित है और चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां की देवी को ‘हिंगलाज देवी’ या ‘नानी मां’ के नाम से भी पूजा जाता है, खासकर सिंधी और बलूच हिंदू समुदायों में इसका विशेष महत्व है.

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 30 जून 2026 मंगलवार शुभसंवत् 2083

मुस्लिम समुदाय की भी आस्‍था

इस स्थान की विशेषता यह भी है कि यहां मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग भी आस्था रखते हैं और देवी को ‘नानी पीर’ के रूप में मानते हैं. हिंगलाज यात्रा एक कठिन, लेकिन आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा मानी जाती है. इसे ‘हिंगलाज तीर्थयात्रा’ भी कहा जाता है. इसके साथ ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल में स्थित कटासराज शिव मंदिर भी काफी ऐतिहासिक और पुराना है. यहां भारत-पाकिस्तान तनातनी की वजह से हिंदुओं की पहुंच न के बराबर है, जो बलूचिस्तान के बनने से यहां तक हिंदुओं की पहुंच हो जाएगी. कटासराज शिव मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर एक मंदिर-समूह का हिस्सा है, जिसमें कई अन्य छोटे मंदिर भी शामिल हैं. कटासराज मंदिर की विशेषता यहां स्थित पवित्र सरोवर है, जिसे कटास कुंड कहा जाता है. मान्यता है कि यह सरोवर भगवान शिव के आंसुओं से बना है, जब उन्होंने अपनी पत्नी सती के वियोग में विलाप किया था.

यह भी पढें   सन्दर्भ–संविधान संशोधन नेपाल के वर्तमान संदर्भ में : विनोदकुमार विश्वकर्मा

आदि शंकराचार्य से नाता
कटासराज मंदिर प्राचीन काल में हिंदू धर्म के शिक्षा और दर्शन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता था. कहा जाता है कि पांडव अपने वनवास के दौरान यहां कुछ समय के लिए रुके थे. इसके अलावा यह भी माना जाता है कि महान दार्शनिक और विद्वान आदि शंकराचार्य ने यहां दर्शन का प्रचार-प्रसार किया था. कटासराज मंदिर परिसर का वास्तुशिल्प हिंदू-बौद्ध शैली का अद्भुत उदाहरण है. हालांकि, विभाजन के बाद इस मंदिर में पूजा कम हो गई. हालांकि, यह आज भी पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है.

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *