आलम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में सरकारी वकील

काठमांडू, २९ मई । हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नेपाली कांग्रेस के नेता एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद अफताब आलम को उच्च अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सरकारी वकील सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं ।
उच्च अदालत जनकपुर के वीरगंज इजलास ने आलम को यह कहते हुए बरी किया कि उनके खिलाफ कोई ठोस भौतिक प्रमाण मौजूद नहीं है और बम विस्फोट की घटना के होने की पुष्टि नहीं हो सकी है । हालांकि, सरकारी वकील का कहना है कि आलम समेत सभी अभियुक्तों को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं ।
उच्च सरकारी वकील कार्यालय वीरगंज के प्रमुख एवं सह न्यायाधिवक्ता कोषहरि निरौला ने दावा किया है कि घटना स्थल से एकत्रित प्रमाण मौजूद हैं, उच्च अदालत ने किस आधार पर बरी किया, उसे देख कर फिर सुप्रीम कोर्ट का रास्ता तय होगा । उन्होंने यह भी बताया कि अदालत के पूर्ण फैसले की प्रतीक्षा हो रही हे ।
स्मरणीय है, उच्च अदालत जनकपुर के वीरगंज इजलास द्वारा बरी किए जाने के बाद आलम को ललितपुर के नख्खु कारागार से रिहा भी किया जा चुका है । उच्च अदालत के न्यायाधीश खुसीप्रसाद थारू और अर्जुन महर्जन की संयुक्त इजलास ने रौतहट जिला अदालत के फैसले को पलटते हुए आलम को कल बुधबार को बरी कर दिया था ।
यहां एक बात स्मरणीय है कि संविधान सभा चुनाव के दौरान २०६४ चैत २७ (९ अप्रैल २००८) को रौतहट के तत्कालीन राजपुर फरहदवा–४ में कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अफताब आलम के घर में बम विस्फोट हुआ था । आलम ने चुनाव जीतने के लिए भारत से बम बनाने वाले लोगों को बुलाया था । उसी दौरान उनके घर में बम बनाते समय विस्फोट हुआ, जिसमें त्रिलोकप्रताप सिंह उर्फ पिन्टू और ओसी अख्तर मियाँ घायल हो गए थे । आरोप है कि घायल होने के बाद, अपनी योजना उजागर होने के डर से आलम ने उन्हें अपने ईंट–भट्टे की चिमनी में जला कर मार डाला है ।

