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नेपाल-भारत सीमा पीलीभीत में धर्म परिवर्तन की मुहिम, नेपाल से भी है कनेक्सन

 

काठमान्डू

नेपाल-भारत पीलीभीत बॉर्डर पर बसे कई गांव पादरियों द्वारा तमाम प्रलोभन देकर सिखों का धर्मांतरण कराए जाने का मामला चर्चा में है। इस पूरे मामले में एक एफआईआर दर्ज होने के बाद अब तमाम जांच एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं। दरअसल भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद तमाम सिख समुदाय के लोग पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गए थे और उन्हें शारदा नदी के किनारे विस्थापित परिवारों का दर्जा देकर सरकार द्वारा बसा दिया गया था। इन परिवारों को राय सिखों को के नाम से भी जाना जाता है। नेपाल-भारत बॉर्डर के 12 गांव में करीब 25 हजार की आबादी राय सिखों की है।

धर्म परिवर्तन के मामले की शिकायत करने वाली गुरु द्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव परमजीत सिंह का कहना है कि धर्म परिवर्तन का खेल वर्ष 2002 से शुरू हुआ, जहां नेपाली पादरियों ने यूपी के पीलीभीत के तमाम इलाकों को निशाना बना लिया। यहां लालच देकर कुछ लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ा गया। इसके बाद सिंडिकेट के जरिए चैन सिस्टम लागू करते हुए करीब 3000 लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया। इन लोगों को पढ़ाई आर्थिक लाभ और मानसिक पीड़ा से दूर करने की बात कहकर प्रलोभन दिया गया।

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सिंह गुरुद्वारा सभा बैल्हा के सचिव परमजीत सिंह का कहना है कि 2001 से अब तक कुल 3000 लोगों का धर्म परिवर्तन ईसाई मिशनरी द्वारा कर दिया गया है। ग्रामीणों को धर्म परिवर्तन के लिए तमाम तरीके के प्रलोभन दिए गए जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन कर दिया। उन्होंने घर के बाहर ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह भी बना लिए। इसके साथ ही कुछ घरों में चर्च जैसी गतिविधियां भी संचालित होने लगी और चंगाई सभा का भी आयोजन बड़े पैमाने पर होने लगा। इसके बाद सिख धर्म को खतरे में देखते हुए उन्होंने इस सब के विरोध में आवाज उठाना शुरू किया। करीब 10 महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।

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गुरुद्वारा कमेटी के लोगों का कहना है कि उनके पड़ोसी गांव टाटरगंज की महिला ग्राम प्रधान का देवर अर्जुन सिंह खुद ही एक पादरी है जो लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है। उन्हें तमाम तरह के लालच भी देता है, इसका कनेक्शन नेपाल के पादरियों से भी है। कमेटी के सचिव का कहना है कि 13 में 2025 को धर्ममंतरण के मामले में पहली एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें आठ लोगों को नामजद किया गया, जिसमें ग्राम प्रधान के देवर का नाम भी शामिल है।

धर्म परिवर्तन की मुहिम चलाई जा रही
पूरे मामले की आवाज उठाने वाले परमजीत सिंह कहते हैं कि जब उन्होंने गांव में ईसाई धर्म से लोगों के जुड़ने के मामले की पड़ताल की तो उन्हें विशेष प्रकार के कैलेंडर गांव में मिले। यह दक्षिण कोरिया और नेपाली कैलेंडर है, जिससे यह साबित होता है कि धर्मांतरण की फंडिंग कहीं न कहीं कोरिया से भी हो रही है। उन्होंने इस मामले की शिकायत डीएम-एसपी से करते हुए उन्हें तमाम सबूत दिए है।

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इसके साथ ही डेढ़ सौ ऐसे परिवारों की लिस्ट भी प्रशासनिक अफसर को दी गई है, जिन्होंने धर्म परिवर्तन किया है और उनके घरों के बाहर प्रतीक चिन्ह भी मौजूद है। यह लिस्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक महक में ने अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया और उनके घर के बाहर लगे ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह भी हटवा दिए। इसके बावजूद गांव में कई ऐसे परिवार हैं जो अभी ईसाई धर्म में आस्था रखते हैं।

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