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नेपाली युवाओं का जोखिमपूर्ण सपना अधूरा रह गया,अमेरिका से निष्कासित ३७ नेपाली नागरिक काठमांडू पहुँचे

 

२५ जेष्ठ, काठमांडू — अमेरिका द्वारा निष्कासित ३७ नेपाली नागरिक आइतवार साँझ चार्टर्ड विमानमार्फत त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल, काठमांडू पहुँचे। निष्कासित नागरिकों में ३२ पुरुष और ५ महिलाएं हैं। इन्हें ओम्नी एयर इन्टरनेसनलको चार्टर्ड विमान (कल-साइन N486AX) से भारत और बांग्लादेश होते हुए नेपाल भेजा गया।

इन नागरिकों को अमेरिकी अध्यागमन कानून का उल्लंघन करने के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद निष्कासित किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत (२० जनवरी २०२५) के साथ ही अमेरिका में अवैध आप्रवासी विरोधी नीति और सख्त निष्कासन प्रक्रिया लागू की गई है। तब से अब तक कुल १४० नेपाली अमेरिका से डिपोर्ट हो चुके हैं।

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नेपाल पहुँचने के साथ ही मानव बेचबिखन अनुसन्धान ब्यूरो ने इन नागरिकों से प्रारंभिक पूछताछ की तैयारी की, ताकि उन्हें अमेरिका तक पहुँचाने वाले गिरोहों की जानकारी ली जा सके। ब्यूरो के एसएसपी कृष्ण पंगेनी के अनुसार, “मानव तस्करी में संलग्न गिरोह के बारे में अनुसन्धान आगे बढ़ाने मे सहयोगी होगा इसी उद्देश्य से पूछताछ किया गया ।

हालांकि, पूर्व घटनाओं की तरह इस बार भी डिपोर्ट होकर लौटे लोगों ने गिरोह या एजेंटों के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार किया। ब्यूरो से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, “उन्हें भेजने वाले अधिकतर लोग गाँव-घर के परिचित होते हैं और भविष्य में दोबारा विदेश भेजने का वादा भी करते हैं, इसलिए वे खुलकर नाम नहीं बताते।”

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पुलिस के मुताबिक, इन लोगों ने अमेरिका या नेपाल सरकार से कोई शिकायत नहीं की है। उल्टे कुछ लोगों ने ट्रम्प का कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर अमेरिका जाने की इच्छा जताई।

ब्यूरो का आकलन है कि अधिकांश डिपोर्टी महँगे और जोखिमपूर्ण रूट — जैसे मध्यपूर्व, यूरोप, दक्षिण अमेरिका होते हुए जंगल, नदी और समुद्र पार कर अमेरिका पहुँचे थे। इस दौरान वे एजेंटों को ५० से ९० लाख नेपाली रुपये तक की रकम चुका चुके थे।

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हालांकि अधिकारी मानते हैं कि यदि कोई ठोस सूचना मिल जाए, तो इस अवैध रैकेट को कानूनी दायरामा लाने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अब तक का अनुभव यही बताता है कि अधिकांश डिपोर्टी जांच में सहयोग नहीं करते, न ही वे बाद में संपर्क में रहना चाहते हैं।

संक्षेप में: अमेरिका की सख्त आप्रवासन नीति के कारण नेपाली युवाओं का महंगा और जोखिमपूर्ण सपना बार-बार अधूरा रह जाता है — और गिरोह अब भी परदे के पीछे सक्रिय हैं।

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