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दोस्ती की दुनिया ….पत्र मित्रता से फेसबुक तक का सफर : रजनीश प्रियदर्शी

 

रजनीश प्रियदर्शी । अतीत की सुखद स्मृतियां न केवल प्रेरणा का सबब बनती है बल्कि हमें आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे होठों पर बरबस मुस्कान बिखेर देती है। एक वक्त था जब हम पत्राचार के माध्यम से अपने परिजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों का कुशल क्षेम का आदान-प्रदान करते थे। हर दिन डाकिये का बेसब्री से इंतजार रहता था, हमारी खुशी दुगुनी तब हो जाती थी जब हमारे मनोनुकूल खबरें आती थी अथवा किसी अजीज की चिठ्ठी आती थी । बदलते वक्त के साथ आज के इस दौर में चिठ्ठी की मौत हो गयी है। हम चिठ्ठी लिखना भूल गये हैं। आज फेसबुक टिवटर, व्हाट्सअप्प, हाईक ,इंस्टाग्राम, लिंकडइन ,जूम जैसे तमाम अनगिनत सोशल मीडिया अकाउंट की पूरी दुनिया में धूम है। आज विश्व की बहुत बड़ी बड़ी आबादी यूं कहें शासन सत्ता में बैठे वाले लोग भी इन सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग कर रहे हैं।अगर ये कहें सोशल मीडिया ने दुनिया की दूरी छोटी कर दी है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों का सीधा -सीधा असर हमारी जिंदगी पर पड़ रहा है। एक वक्त था जब पत्र लेखन भी एक कला में शुमार था।आज से चालीस पैंतालीस वर्ष पूर्व जब सोशल मीडिया का नामोनिशान दूर -दूर तक नहीं था तो उस वक्त पत्र मित्रता(PEN FRIENDSHIP ) की धूम थी। पत्र मित्रता करने की ऐसी होड़ चली थी कि डाकिये को सुबह एवं शाम दोनों ही वक्तों में पत्रों की डिलीवरी करनी पड़ती थी। डाकघर चिठ्ठियों से पटी पडी़ रहती थी। आज बदलते वक्त ने इंसान को अपनी भावनाओं को अपनी जजबातों को शब्दोबद्ध करने से जुदा कर दिया है। आज भी कई महापुरुषों की चिठ्ठियाँ किताब की शक्ल लेकर सुधी पाठकों के बीच उपलब्ध है। अस्सी एवं नब्बे दशक के कालखंड में पत्र मित्रता की धूम मची थी उस समय जो स्कूली छात्र थे अथवा उनकी मित्रमंडली थी जो पढा़ई -लिखाई के अलावा रचनात्मक कार्यों में गहरी दिलचस्पी लेते थे तथा हमेशा कुछ नया करने की जुगत में लगे रहते थे। फलस्वरूप उन्होंने पत्र मित्रता करने के लिए कई पत्र -पत्रिकाओं का सहारा लिया।उस दौर में कई पत्र मित्र क्लब क्लब भी खुल गये थे जो चंद पैसे लेकर पत्र मित्रों की सूची उपलब्ध कराते थे। उस वक्त प्रकाशित तमाम छोटी -बड़ी पत्र-पत्रिकाओं में एक पृष्ठ पत्र मित्रता को इच्छुक व्यक्तियों के नाम पते एवं शौक का विस्तृत ब्यौरा अंकित रहता था। एक पत्र मित्र दूसरे पत्र मित्र का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराता था‌। यह दौर कई सोशल मीडिया के आने के पहले बदस्तूर वर्षों तक चला।‌ वहीं जो छात्र स्कूल से काॅलेज आ गये लेकिन यह सिलसिला बदस्तूर काॅलेज तक चला, लेकिन वक्त के साथ धीरे -धीरे कैरियर को लेकर व्यस्तताओं एवं अन्य कारणों से पत्र मित्रों के पत्रों के जवाब में विलंब होने लगा। एक वक्त ऐसा जब पत्र मित्रों की संख्या शून्य हो गयी। यह भी सच है कि पत्र मित्रता की वजह से विज्ञान के छात्र भी साहित्य प्रेमी हो गये। स्कूल एवं काॅलेज के दिनों में छात्रों को जो भी जेब खर्च मिलते थे उसका सदुपयोग अच्छे साहित्य खरीदने में एवं पत्र मित्रता करते थे। देश -विदेश के तमाम पत्र मित्रों ने न केवल एक- दूसरे का ज्ञानवर्धन किया बल्कि एक-दूसरे लेखनी को संवारने में भी मदद की। अपनी भावनाओं को शब्दों के माध्यम से कोरे कागज पर उकेरने के साथ -साथ जीवन में अच्छे इंसान बनने की भी प्रेरणा मिली। अगर इसे न गुम होने वाला खजाना माना जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक छात्र की मानें तो उसके अनुसार जब कभी मन में नकारात्मक भाव आतें तो पत्र मित्रों की चिठ्ठियाँ को पढ़ने पर एक नयी उर्जा का संचार होता है तथा अंदर की नकारात्मकता चंद पलों में तिरोहित हो जाती है ।फिर से कमर कस जिंदगी से दो-दो हाथ करने के लिए उठ खड़ा हो जाने का जज़्बा आ जाता है। भले ही लोगों ने चिठ्ठियां लिखना बंद कर दिया हो लेकिन उसकी अहमियत को कभी कमतर नहीं आंका जा सकता है। मैंने पढा़ भी है तथा सुना भी है एक चिठ्ठी ने किसी जिंदगी की बदल दी तो किसी को जिंदगी के मायने बता दी‌ आजके इस युग में हर बात में नेट से कनेक्ट करने की बात होती है तो मेरा स्पष्ट मानना है कि हर सवाल का जवाब GOOGLE के पास भी नहीं है। कुछ ऐसे सवाल होते हैं जिसका जवाब हमारे आपके पास ही होता है!
आज भारत युवा देश है क्योंकि आज बहुत बड़ी आबादी युवाओं की है। इसमें कोई शक नहीं है आज की हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में सोशल मीडिया क्रांतिकारी कदम के रुप में दाखिल हो चुका है इसके बगैर हम जमाने के साथ कदम ताल नहीं कर सकते हैं । सोशल मीडिया के आकर्षण में हम भले ही हम कार्य निपटायें लेकिन लिखने की प्रवृति हमें अंदर की रचनात्मकता को नया कलेवर प्रदान करती है। मेरा स्पष्ट मानना है कि जीवन छोटी -छोटी घटनाओं से निर्मित होता है जब हम कोरे कागज पर शब्दोबद्ध करते हैं तो जीवन का जो भी सर्वश्रेष्ठ है वो शब्दों के जरिये हमारे पत्र लेखन में आ जाता है।औरों को नहीं सही हम स्वयं को पत्र लिखे तो निश्चित रूप से अपनी खूबियां एवं खामियों का सचित्रण हो सकता है जिससे हम बेहतर इंसान बनने की राह में एक कदम आगे बढ़ सकते हैं।

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