प्रधानमन्त्री ने त्रिविसभा की बैठक बालुवाटार में बुलाकर परम्परा तोड़ी, विद्यार्थी प्रतिनिधि को बाहर रखा गया
काठमांडू, १० जुलाई २०२५ । प्रधानमन्त्री तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय (त्रिवि) के कुलपति केपी शर्मा ओली ने त्रिविसभा की वार्षिक बैठक इस बार विश्वविद्यालय परिसर में न रखकर अपने सरकारी निवास बालुवाटार में बुलाया है। यह निर्णय त्रिवि पदाधिकारियों को रास नहीं आया है। उनका कहना है कि परम्परा और शैक्षिक स्वायत्तता के अनुसार यह बैठक त्रिवि परिसर में ही होनी चाहिए थी।
त्रिवि के एक उच्च पदाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यह त्रिवि की वार्षिक सभा है, इसलिए इसे तय मिति पर विश्वविद्यालय परिसर में ही होना चाहिए था। लेकिन प्रधानमन्त्री की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए इसे बालुवाटार में स्थानान्तरण किया गया, जो कि सही परिपाटी नहीं है।”
यह बैठक सामान्यतः हर साल असार २० गते (शुक्ल नवमी) को होती है, परन्तु प्रधानमन्त्री ओली ने इस बार तिथि बदलकर असार २२ गते रखा, लेकिन निर्धारित समय (१२:४५ बजे) पर वे स्वयं उपस्थित नहीं हुए, जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी।
बैठक में त्रिवि के आगामी शैक्षिक बजट पारित करने के साथ-साथ शैक्षिक उपाधि प्राप्त ८९ हजार ७ सय विद्यार्थियों की सूची स्वीकृत होनी है।
विद्यार्थी प्रतिनिधियों को दरकिनार
इस वार्षिक सभा में परंपरानुसार विद्यार्थी प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं, लेकिन इस बार उन्हें आमन्त्रित नहीं किया गया है। त्रिवि कार्यकारी परिषद ने अब तक उनकी नियुक्ति नहीं की है। त्रिवि स्रोतों के अनुसार, प्रधानमन्त्री ओली ने स्वयं परिषद को निर्देश दिया कि विद्यार्थी प्रतिनिधि न रखें, जिससे बैठक में अधिक बहस न हो और प्रक्रिया लंबी न चले।
त्रिवि स्ववियु (स्वतन्त्र विद्यार्थी युनियन) के सभापति दीपकराज जोशी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है, “विद्यार्थी प्रतिनिधिविन बैठक बुलाना उनका अधिकार छीनने जैसा है। परिषद द्वारा समय पर नियुक्ति न कर पाना उनकी कमजोरी है। कुलपति का यह कदम स्वेच्छाचारी और अलोकतान्त्रिक है।”
पूर्व उपकुलपति डा. केदारभक्त माथेमा ने भी इसे अनुचित बताया। उन्होंने कहा, “विद्यार्थी प्रतिनिधियों की उपस्थिति से सिनेट अधिक जिम्मेवार और समावेशी दिखता है। यदि विद्यार्थी नहीं हैं, तो ऐसा लगता है मानो उनकी आवाज को दबाया गया हो।”
उपकुलपति में डा. दीपक अर्याल की नियुक्ति
इस बीच त्रिवि के नए उपकुलपति के रूप में डा. दीपक अर्याल को नियुक्त किया गया है। प्रधानमन्त्री ओली ने उन्हें बालुवाटार में पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलाई। शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्री रघुजी पन्त भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
डा. अर्याल त्रिवि के जल तथा मौसम विज्ञान केन्द्रीय विभाग के पूर्व प्रमुख और नास्ट (नेपाल विज्ञान तथा प्रविधि प्रज्ञा–प्रतिष्ठान) के प्राज्ञ भी रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि तालाबन्दी त्रिवि की सबसे बड़ी समस्या है, जिसे समाप्त करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। “तालाबन्दी की जड़ को समझकर इसे स्थायी रूप से अन्त्य करना ही मेरा पहला लक्ष्य है,” उन्होंने कहा।
उनकी प्राथमिकताओं में विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित करना, शैक्षिक सुधार, पाठ्यक्रम संशोधन, क्यालेन्डर समय पर लाना, और त्रिवि की पुनर्संरचना शामिल है


