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त्रिभुवन विश्वविद्यालय का 28.12 अरब रुपये का बजट पारित, बेरुजु में फिर हुआ इजाफा

 

 काठमांडू, 11 जुलाई 2025 । नेपाल का सबसे बड़ा शैक्षिक संस्थान त्रिभुवन विश्वविद्यालय (त्रिवि) ने आगामी आर्थिक वर्ष 2082/83 के लिए 28 अरब 12 करोड़ 57 लाख रुपये का बजट पारित किया है। गुरुवार को यह निर्णय प्रधानमंत्री निवास बालुवाटार में आयोजित त्रिवि सभा की बैठक में लिया गया, जहां त्रिवि के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. केदारप्रसाद रिजाल ने बजट प्रस्तुत किया।

हालांकि, यह बैठक विवादों में घिर गई, क्योंकि विश्वविद्यालय की परंपरागत सभा त्रिवि सभाहल में न होकर प्रधानमंत्री निवास में आयोजित की गई। साथ ही, बैठक में छात्र प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर विभिन्न छात्र संगठन जैसे नेविसंघ और अखिल क्रान्तिकारी ने तीखी आपत्ति जताई है। स्वतंत्र विद्यार्थी युनियन ने भी प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इसे “विद्यार्थी अधिकारों का हनन” बताया।

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बेरुजु में फिर इजाफा

त्रिवि के वित्तीय पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। नेपाल के महालेखा परीक्षक कार्यालय की हालिया 62वीं वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार त्रिवि में 30 अरब 55 करोड़ 62 लाख रुपये का बेरुजु देखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2 अरब 23 करोड़ से अधिक है। इससे पहले 61वीं रिपोर्ट में बेरुजु की राशि 28 अरब 32 करोड़ रुपये थी।

त्रिवि ने स्वीकार किया है कि पिछले तीन आर्थिक वर्षों से बेरुजु समाधान नहीं हो सका है, और वित्तीय अनियमितता की यह स्थिति अब “डरावनी” बनती जा रही है।

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बजट में क्या है खास?

इस बार के बजट में त्रिवि ने निम्नलिखित योजनाओं को प्राथमिकता दी है:

  • श्रमबाजार-उन्मुख पाठ्यक्रम निर्माण
  • अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने की रणनीति
  • शैक्षणिक अनुसन्धान, कार्यशाला, गोष्ठी एवं सेमिनार कार्यक्रम

इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने इस वर्ष 89,191 छात्रों की ग्रेसलिस्ट भी पारित की है।

पीएम ओली और शिक्षा मंत्री की टिप्पणी

त्रिवि के कुलपति भी रहे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने विश्वविद्यालय को “21वीं सदी के अनुरूप प्रतिस्पर्धी और सक्षम संस्थान” बनाने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री रघुजी पंत ने कहा कि ‘समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली’ के लक्ष्य को पाने में विश्वविद्यालयों की केंद्रीय भूमिका होगी।

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नवनियुक्त उपकुलपति प्रो. डॉ. दीपक अर्याल ने कहा कि विश्वविद्यालय में कुल छात्रसंख्या का कम से कम एक प्रतिशत विदेशी छात्र होने चाहिए, और इस लक्ष्य के लिए त्रिवि को प्रयास करना चाहिए ।

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