नेपालगंज में गुलज़ार-ए-अदब की मासिक ग़ज़ल गोष्ठी सम्पन्न, नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा

नेपालगंज, बाँके / संवाददाता: पवन जायसवाल । नेपालगंज की प्रतिष्ठित उर्दू साहित्यिक संस्था ‘गुलज़ार-ए-अदब’ द्वारा मासिक ग़ज़ल गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह गोष्ठी २०७८ असार २८ गते शनिवार, स्थानीय महेन्द्र पुस्तकालय के सभाहल में सृजनशील साहित्यिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुई।
गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के वरिष्ठ शायर और अध्यक्ष अब्दुल लतीफ ‘शौक’ ने की। इस अवसर पर ‘किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता’ शीर्षक के अंतर्गत भावपूर्ण और विविध रचनात्मक अभिव्यक्तियों से सजी ग़ज़लें प्रस्तुत की गईं।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अब्दुल लतीफ ‘शौक’, सैय्यद अशफाक रसूल हाशमी ‘शैय्यद नेपाली’, मुस्तफा अहसन कुरैशी ‘अहसन’, अन्सर नेपाली, सैय्यद आदिल सरवर ‘सरवर नेपाली’, वशीम आलम मजहरी, इशमाइल अन्सारी, मोहम्मद आरीफ अन्सारी, मेराज अहमद ‘हिमालय’, सहबाज ‘साहीन’ और जहिरुल हक ‘जिनु’ सहित अन्य शायरों ने अपनी ग़ज़लों की प्रस्तुति दी।
गोष्ठी में उमेर अहमद सादिक, राशिद कमाल, बब्बू फारुकी और आसिम सरवर जैसे साहित्य प्रेमियों की सक्रिय सहभागिता रही। संचालन नुरुल हसन राई ने किया।
इस अवसर पर आगामी गोष्ठी की घोषणा भी की गई, जो श्रावण ३१ गते ‘जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली, कभी तो उनका हिसाब होगा’ शीर्षक के तहत आयोजित की जाएगी। इसकी जानकारी मुस्तफा अहसन कुरैशी ने दी।
नेतृत्व में हुआ परिवर्तन
कार्यक्रम के दौरान ‘गुलज़ार-ए-अदब’ के नेतृत्व में परिवर्तन की भी घोषणा की गई। स्वास्थ्य कारणों के चलते संस्था के अध्यक्ष और संस्थापक वरिष्ठ शायर अब्दुल लतीफ ‘शौक’ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने संस्था की कमान अब तक के सचिव मो. मुस्तफा कुरैशी ‘अहसन’ को सौंपी।
नए कार्यसमिति में मुस्तफा अहसन कुरैशी ‘अहसन’ अध्यक्ष, नुरुल हसन राई ‘नूरी’ उपाध्यक्ष, और मोहम्मद आरीफ अन्सारी ‘अमन’ को महासचिव नियुक्त किया गया है।
उल्लेखनीय है कि ‘गुलज़ार-ए-अदब’ पिछले ५० वर्षों से नेपाली साहित्यिक परिवेश में उर्दू ग़ज़ल, कविता और बहुभाषिक साहित्य के संवाहन में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

