यह है मेरा देश ‘बाल कविता’ प्रतियोगिता
हिमालिनी ज्ञानकुंज
‘बाल कविता’ प्रतियोगिता
यह है मेरा देश
शुभ कुमार धानुका कक्षा : ११ (विज्ञान शाखा) डीएवी विद्यालय, जावलाखेल, ललितपुर
क्या ही कहने
देश के बारे में अपने
इसके अनेक हैं भेष
कभी माँ बनकर खिलाती है मेरी मातृभूमि
कभी पिता बनकर समझाता है मैरा देश
हमारी जिंदगी में जो कुछ भी है
सब उसी का तो है दिया हुआ
हर साँस से लेकर
हर अन्न के दाने से लेकर
हर बूँद पानी तक भी
उसका ही तो है दिया हुआ
यह है मेरा देश !यह है मेरा देश !!
ऐसे हैं यहॉं के जवान
चाहे चली जाए उनकी जान
किसी बात की परवाह किए बिना
खड़े रहते हैं दिन–रात सीमा पर
लड़ते रहते देश के दुश्मनों से
अपनी जान की बाजी लगाकर
ताकि हम खुश रह सकें सब एक साथ
यह है मेरा देश ! यह है मेरा देश !!
जहाँ धरती को कहते माँ हैं
जहाँ हर नारी को कहते देवी हैं
जहाँ नदी, पत्थर, पेड़–पौधों को हैं पूजते
मेहमान भी माना जाता है भगवान
यह है मेरा देश! यह है मेरा देश!!
चाहे कहीं भी जाऊँ दुनिया में
असली सुकून यहीं मिलता है
यहॉं की हवा के बिना तो
बदन जिंदा लाश बन जाता है
कुछ तो बात है यहॉं की हवा में
हर तन–मन को कर दैती शीतल
यह है मेरा देश ! यह है मेरा देश !!
मुझे अभिमान है अपने देश पर
मुझे गर्व है अपनी मिट्टी पर
इसी में मिल जाऊँ मैं
जब शरीर यह जाऊँ छोड़कर
यह मिट्टी ही मेरी जान है
यह मिट्टी ही मेरी शान है
कुछ करूँ तो इस देश के लिए
और मरूँ तो इस देश के लिए
क्योंकि…
यह है मेरा देश ! यह है मेरा देश !!


