बलरा नगर प्रमुख ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला पत्र
काठमांडू, सावन ११ – पिछले कुछ दिनों से तराई–मधेश के जिलों में लगातार दिख रही भीषण सूखा और बारिश की कमी ने जनजीवन को संकट में डाल दिया है । हलांकी सरकार ने कुछ राहत देने की बात की है । प्रधानमंत्री स्वयं ने भी सूखे क्षेत्रों का दौरा किया है । मधेश प्रदेश को संकटग्रस्त क्षेत्र धोषित किया गया है ।
राहत की बात तो हुई है लेकिन राहत पहुँच नहीं पा रही है ऐसे में सर्लाही जिले की बलरा नगरपालिक के नगर प्रमुख रामाशंकर प्रसाद कुशवाहा ने आज प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा है । पत्र में उन्होंने मांग की है कि तराई–मधेश में फैलते सूखा संकट को ‘प्राकृतिक आपदा’ घोषित करें ।
नगर प्रमुख कुशवाहा ने अपने पत्र में लिखा है कि – “तराई–मधेश आज एक जटिल प्राकृतिक संकट से गुजर रहा है । सावन महीने के मध्य तक भी बारिश नहीं होने के कारण ट्यूबवेल, कुएँ, इनार दिन–ब–दिन सूखते जा रहे हैं, खेत–खलिहान बंजर हो चुके हैं और जनता प्यास से तड़पने लगी है ।”
उन्होंने कहा कि मधेश सरकार ने पहले ही सूखा प्रभावित क्षेत्र की घोषणा कर दी है और संघीय सरकार ने भी इसे आपदाग्रस्त क्षेत्र माना है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
“घोषणा केवल पहला कदम है, अब जÞरूरत है व्यवहारिक और राहतमुखी कदमों की,” खुला पत्र में यह बात स्पष्ट की गई है।
नगर प्रमुख कुशवाहा ने संघीय और प्रदेश सरकार के समक्ष निम्नलिखित पाँच बूँदें मांगें रखी हैं –
तत्काल राहत की घोषणा
निःशुल्क जल वितरण केंद्रों की स्थापना
सूखा राहत कोष के माध्यम से गरीब परिवारों को सहायता
सिंचाई और वैकल्पिक जल स्रोत की आपूर्ति
मोबाइल स्वास्थ्य टीमों की तैनाती
“मधेश में सर्दी आती है तो लोग ठिठुरकर मरते हैं, बाढ़ आती है तो बह जाते हैं, और अब वर्षा नहीं हो रही है तो सूख रहे हैं,” कहते हुए उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह शीघ्र ही व्यवहारिक कदम उठाए।
नगर प्रमुख कुशवाहा ने यह भी लिखा है कि इस पत्र को ‘शिकायत’ नहीं, बल्कि ‘जनता की आवाज’ माने और प्रधानमंत्री के संवेदनशील नेतृत्व में समाधान की आशा जताई है ।
इससे पहले भी बलरा नगरपालिका सहित मधेश की कई स्थानीय निकायों ने सूखे के कारण कृषि, पेयजल और जनस्वास्थ्य में उत्पन्न संकट को लेकर चिंता व्यक्त की थी।


