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जेनेभा ग्लोबल द्धारा कमैया बस्ती का भ्रमण

 

SAM_6606नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ जेष्ठ १५ गते ।
फ्रिडम फोरम के सहयोग में जेनेभा ग्लोबल ने पूर्वी नेपाल में आधुनिक दास का जीवन यापन कर रहे हरुवा ,चरुवा और उन लोगों का अधिकार प्राप्त करने के लियें कार्य कर रहे संघ संस्थाओं के प्रमुख तथा प्रतिनिधिओं को पश्चिम नेपाल के बर्दिया और कैलाली जिला के मुतकमैया बस्ती की अध्ययन भ्रमण कराया गया है ।
जेनेभा ग्लोबल कार्यक्रम प्रबन्धक हरिप्रसाद जोशी के नेतृत्व में सिराहा, सप्तरी, धनुषा जिला के हरुवा चरुवा और उन लोगों के मुक्ति के अभियान में लगे हयें संघ संस्था के प्रमुख तथा प्रतिनिधिओ को बर्दिया जिला के धधवार में रहा विजयनगर और कैलाली जिला के टिकापुर में रहे मुक्त कमैया बस्ती का भ्रमण कराया गया है ।
अध्ययन भ्रमण में जनचेतना दलित संगम सप्तरी, नेपाल दलित जागरण केन्द सिराह, दलित संरक्षण अधिकार मञ्च सिराह, नेपाल दलित जागरण केन्द्र सिराह, सामुदायिक विकास केन्द्र लहान, तपेश्वरी समाज कल्याण संघ धनुषा, ग्रामीण विकास अधार धनुषा, सामुदाियक सुधार केन्द्र धुनुषा और सौन्दर्य नेपाल रहे है ।
कमैयाओं को कैसे मुक्त पाए और उन लोगों को अभी की अवस्था कैसे है इस बिषय पर स्थलगत और प्रत्यक्ष जानकारी दिलाने के उदेश्यय से हरुवा चरुवा और उन लोगों को अधिकार के लियें कार्य करते आ रहे पश्चिम नेपाल के मुक्त कमैया बस्तीओं का भ्रमण कराया गया जेनेभा ग्लोबल के कार्यक्रम प्रबन्धक हरिप्रसाद जोशी ने बताया ।
बधुवा मजदुर के सवाल में सरकार ने दोहरा नीति दिखाया है बताते हुयें प्रबन्धक हरि प्रसाद जोशी ने पश्चिम के कमैयाओं को मुक्त जैसे कराया है उसी तरह पुूर्वी नेपाल में बर्षो से दासता की जीवन बिताते आ रहे हरुवा चरुवाअ‍ें को भी कार्ययोजना बना कर तत्काल मुक्त करना आवश्यक है प्रबन्धक हरि प्रसाद जोशी का धारणा रहा ।
अध्ययन भ्रमण में आए हुयें टोली को कमैया मुक्त आन्दोलन ने पाया सफलता और मुक्त केबाद कमैयाओं को सामाजिक ,आर्थिक ,राजनैतिक, शैक्षिक जीवन में आया प्रगति के बारे मुक्त कमैया समाज बर्दिया के अध्यक्ष पञ्चराम थारु ने जानकारी कराया था ।
स्मरण हो पूुर्वी नेपाल के सिराह, सप्तरी, धुनुषा, महोतरी और सर्लाही जिला में ५८ हजार ८ सौ ४६ घरपरिवार हरुवा चरुवाओं ने बषो से बंधुवा मजदुर के रुप में दासता की जीवन यापन करते आ रहे है । उन लोग राज्य से पाने वाला आर्थिक सामाजिक और राजनैतिक अधिकार से बञ्चित रहे है ।

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