अब विदेश से पढ़ाई करने वालों की समकक्षता त्रिभुवन विश्वविद्यालय नहीं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) देगा
काठमांडू, श्रावण २२, २०८२ — विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले नेपाली विद्यार्थियों को अब डिग्री की समकक्षता प्रमाणपत्र त्रिभुवन विश्वविद्यालय (त्रिवि) से नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से प्राप्त होगा।
नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ऐन २०५० में संशोधन कर यह अधिकार आयोग को दिया गया है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल द्वारा संशोधित ऐन को प्रमाणिक कर राजपत्रमा प्रकाशित भी किया जा चुका है।
अब आयोग न केवल समकक्षता देगा, बल्कि क्रेडिट ट्रान्सफर (Credit Transfer), गुणस्तर सुनिश्चितता, और प्रत्यायन (QAA) को भी कानूनी रूप से संचालित करेगा।
प्रमुख बिंदु:
- अब समकक्षता त्रिवि के पाठ्यक्रम विकास केन्द्र से न होकर आयोग से प्राप्त होगी।
- संशोधन के अनुसार, यह व्यवस्था २०८३ सालको साउन १ गतेबाट लागू होगी।
- इससे पहले त्रिवि से समकक्षता प्राप्त कर चुके छात्रों को पुनः समकक्षता लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
- आयोग क्रेडिट ट्रान्सफर के लिए राष्ट्रीय मानक बनाएगा, और इसके लिए एक क्रेडिट बैंक की स्थापना भी होगी।
- QAA (गुणस्तर सुनिश्चितता तथा प्रत्यायन) के लिए अब स्पष्ट कानूनी अधिकार आयोग को प्राप्त हुआ है।
पृष्ठभूमि:
भारत के ओडिशा स्थित KIIT विश्वविद्यालय में नेपाली छात्रा की मृत्यु और नेपाली छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के बाद नेपाल में क्रेडिट ट्रान्सफर की आवश्यकता और इसकी वैधानिक व्यवस्था की मांग उठी थी। इसी के आलोक में यह कानूनी संशोधन किया गया है।
गुणवत्ता पर ज़ोर:
- नेपाल भर में कुल १,४०० कॉलेजों में से केवल १३७ ने ही QAA प्राप्त किया है।
- आयोग अब शिक्षण संस्थानों के शैक्षिक व भौतिक पूर्वाधार, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शिक्षक संख्या आदि के आधार पर मूल्यांकन करेगा।
- त्रिवि ने यह नीति बनाई है कि अब केवल QAA प्राप्त कॉलेजों को ही संस्थागत मान्यता दी जाएगी।
विदेशी कलेजों पर सख्ती:
शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि नेपाल में संचालित ५९ विदेशी संबद्ध कलेजों में से केवल १० ने ही QAA प्राप्त किया है। अब नियम यह होगा कि केवल वही विदेशी कॉलेज नेपाल में पढ़ाई करा सकेंगे जो विश्व वरीयता में शीर्ष १००० में आते हैं और QAA प्राप्त कर चुके हैं।य
ह नई व्यवस्था नेपाल की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, मापदंड आधारित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


