Mon. Apr 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

‘हिन्दी साहित्य उत्सव’ में भारतीय साहित्यकारों पर चर्चा

 

काठमांडू, २४ अगस्त । भारतीय राजदूतावास काठमांडू द्वारा प्रत्येक माह आयोजित किए जा रहे ‘हिन्दी साहित्य उत्सव’ के अंतर्गत अगस्त महीने की श्रृंखला में 6 भारतीय साहित्यकारों के साहित्यिक योगदान पर चर्चा की गई । नेपाल–भारत पुस्तकालय में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में शिवपूजन सहाय, मैथिलीशरण गुप्त, अटल बिहारी वाजपेयी, सुभद्राकुमारी चौहान, हरिशंकर परसाई और हजारी प्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक योगदान और जीवन पर चर्चा हुई । इन सभी साहित्यकारों का जन्म अगस्त महीने में हुआ था । प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को उसी महीने जन्मे साहित्यकार के विषय को लेकर यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है ।
अगस्त २३ को सम्पन्न कार्यक्रम के लिए डॉ. अवधेश कुमार मिश्र मुख्य अतिथि थे । वे नवोदित कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार हैं । कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि कोई भी व्यक्ति साहित्य से अलग रह नहीं सकता, समाज के हर व्यक्ति के भीतर साहित्यिक कला छिपी रहती है । आज के प्रस्तुत साहित्यकारों के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा– “कहा जाता है कि साहित्य समाज का दर्पण है । दर्पण इतिहास को दिखाने का काम करता है । लेकिन मैं कहता हूँ– साहित्य दर्पण से भी आगे है, यह केवल इतिहास ही नहीं बल्कि भविष्य भी बताएगा ।” डॉ. मिश्र के अनुसार आम जन और समाज को जगाने का कार्य साहित्य करता है । वे आगे कहते हैं– “जब तक व्यक्ति और समाज जागृत नहीं होता, साहित्य और साहित्यकार को निरन्तर प्रयासरत रहना चाहिए ।”
कार्यक्रम में साहित्यकार शिवपूजन सहाय के बारे में रजनी सिंह मंडल ने अपनी प्रस्तुति दी । शिवपूजन के साहित्यिक योगदान पर चर्चा करते हुए रजनी सिंह ने कहा– “शिवपूजन को हिन्दी तथा बिहारी साहित्य के क्षेत्र में प्रमुख लेखक के रूप में जाना जाता है । उनके साहित्य में ग्रामीण जनजीवन, अंधविश्वास, जादू–टोना से जुड़े अंधविश्वास जैसी विकृतियों को समाहित किया गया है । साथ ही मानवीय संवेदना के विषय को गंभीर रूप में प्रस्तुत किया गया है । आपसी सहयोग और ग्रामीण एकता उनके साहित्य का मुख्य संदेश है ।”
मंडल के अनुसार गद्य साहित्य के लिए विशेष लेखक के रूप में प्रसिद्ध शिवपूजन के साहित्य में आंचलिक भाषा–संस्कृति का पक्ष सबल रूप में मिलता है । साथ ही अलंकार और अनुप्रास का अधिक प्रयोग उनकी विशेषता है ।
इसी तरह साहित्यकार मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक जीवन पर साहित्यकार अंशु झा की विशेष प्रस्तुति रही । अंशु झा के अनुसार मैथिलीशरण गुप्त अपने युग के प्रसिद्ध प्रतिनिधि कवि थे, जिनका योगदान केवल साहित्य साधना तक सीमित नहीं था बल्कि राष्ट्रीय आन्दोलन में भी उतना ही रहा । राजनीतिक आन्दोलन में सहभागिता के कारण मैथिलीशरण गुप्त को जेल जीवन भी बिताना पड़ा, इस विषय में चर्चा करते हुए झा ने उनके साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला ।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साहित्यिक जीवन पर साहित्यकार इन्दु ठाकुर की विशेष प्रस्तुति रही । ठाकुर के अनुसार वाजपेयी का राजनीतिक जीवन जितना प्रभावशाली और शक्तिशाली रहा, साहित्यिक जीवन भी उतना ही सशक्त था । प्रखर पत्रकार, कवि और वक्ता के रूप में विख्यात वाजपेयी ने पत्रकारिता से ही राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी । ठाकुर के अनुसार वाजपेयी के साहित्य में भावुकता, देशप्रेम और जीवन दर्शन की गहरी झलक मिलती है ।
इसी तरह साहित्यकार सुभद्राकुमारी चौहान के सम्बन्ध में कंचना झा ने प्रस्तुति दी । हिमालिनी डॉट कॉम की कार्यकारी सम्पादक भी रहीं झा के अनुसार सुभद्राकुमारी चौहान के साहित्य में महिला वीरता और साहस दृष्टिगोचर होता है । साथ ही उनके साहित्य में पारिवारिक जीवन के सुन्दर पक्ष को सशक्त और भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है । साहित्य साधक सुशील द्विवेदी ने साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी के साहित्यिक जीवन पर प्रस्तुति देते हुए कहा– “साहित्य के माध्यम से नेपाल और भारत की साझा संस्कृति को आगे बढ़ाने में हजारी प्रसाद द्विवेदी का विशेष योगदान रहा है ।”
व्यंग्य साहित्यकार हरिशंकर परसाई के सम्बन्ध में प्रस्तुति देते हुए साहित्यकार शरदचन्द्र वस्ती ने कहा– “हिन्दी साहित्य में व्यंग्य साहित्य को विधा के रूप में स्थापित करने का कार्य हरिशंकर परसाई ने ही किया ।” वस्ती के अनुसार हरिशंकर परसाई के साहित्य में प्रवेश करना चक्रव्यूह में प्रवेश करने के समान है । वे आगे कहते हैं– “हम हरिशंकर के व्यंग्य और विचारों से असहमत हो सकते हैं, परन्तु उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते ।” उनके अनुसार नेपाल के बहुत से व्यंग्य साहित्यकारों पर हरिशंकर परसाई का प्रभाव देखा जा सकता है ।
कार्यक्रम में केन्द्रीय विद्यालय के पंजी साह, रोहन मित्तल, रुपीजÞ इंटरनेशनल स्कूल की अनन्या डालमिया, प्रगति अग्रवाल, डीएवी स्कूल के अक्षत मिश्र, वैभव आदि छात्र–छात्राओं ने प्रस्तुत साहित्यकारों की रचनाओं से कविताओं का वाचन किया । कार्यक्रम का सफल संचालन भारतीय राजदूतावास के अताशे श्री धनेश द्विवेदी ने किया ।

यह भी पढें   नेपाली कांग्रेस ११ वैशाख को ‘संसदीय दल का नेता’ का चुनाव करेगी

इसी तरह डॉ. कृष्णचन्द्र मिश्र पब्लिकेशन प्रा. लि. द्वारा आयोजित ‘हिमालिनी ज्ञानकुंज बालकविता प्रतियोगिता २०२५’ के विजेताओं को भी इसी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम में भारतीय राजदूतावास के प्रथम सचिव (पीआईसी विंग) वशिष्ठ नंदन, गीताजली, नारायण सिंह, साहित्यकार सहित अनेक व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *