लोसपा महासचिव मनिष मिश्र ने पार्टी अध्यक्ष को दिया महाधिवेशन तथा संगठन सुदृढ़ीकरण संबंधी सुझाव
काठमांडू, भादव ११ – लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के महासचिव मनिष कुमार मिश्र ने अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन दिया है जिसमें उन्होंने पार्टी के हित को लेकर अपने कुछ सुझाव भी दिए हैं । प्रतिवेदन में उन्होंने सबसे पहले, चौथे वर्षगांठ अर्थात लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी, नेपाल की स्थापना २०७८ भाद्र ९ का स्मरण किया है । प्रतिवेदन में उन्होंने लिखा है कि – आदरणीय अध्यक्ष जी, लोकतांत्रिक आंंदोलन, मधेश अधिकार, संघीयता, समानुपातिकता, समावेशिता की लड़ाई में आपके द्वारा निभाई गई भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी । आज हम लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी नेपाल की स्थापना करके चौथा वर्ष पूरा कर पाँचवें वर्ष में प्रवेश करते हुए, विगत के कठिन क्षणों, कालखण्डों, प्रतिकूल परिस्थितियों, हमारे साथियों द्वारा दिए गए बलिदानों तथा उतार–चढ़ाव को याद करना चाहते हैं ।
प्रतिवेदन में मिश्र ने उल्लेख किया है कि आपके साथ वरिष्ठ नेतृत्व तथा हम सबका केवल एक लक्ष्य रहा है—जिसके लिए आपने संघर्ष किया कि राज्य जनता का होना चाहिए। जनता को कमजोर बनाकर देश समृद्ध नहीं हो सकता। इसलिए राज्य द्वारा किए गए भेदभाव और अन्याय के खिलाफ बोलना और लड़ना जरूरी है । इसके संस्थागत आधार लोकतान्त्रिक व्यवस्था, संघीय प्रणाली तथा समानुपातिक समावेशी सिद्धान्त ही हैं, जिनके तहत राज्य को आगे बढ़ना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया है कि पार्टी को व्यवस्थित करने के लिए कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी नेता, जनता को आकर्षित करने की क्षमता, युवा नेतृत्व, स्पष्ट विचार, सिद्धान्त में अडिगता, कार्यालय प्रबंधन की दक्षता, राज्य के निचले स्तर तक संगठनात्मक संरचना की मजबूती—यदि हम इन सबको व्यवस्थित कर पाए, तो निकट भविष्य में नेपाल की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की प्रबल संभावना है।
उन्होंने महाधिवेशन से लेकर भी बात कही है । लिखा है हम महाधिवेशन की तैयारी में हैं। महाधिवेशन के क्रम में सदस्यता अभियान तो चलाया गया, लेकिन आज तक कितनी सदस्यता वितरण हुई, इसका कोई आधिकारिक रेकॉर्ड मौजूद नहीं है। इसी प्रकार, बार–बार जिला अधिवेशन की तिथि घोषित हुई, लेकिन वास्तव में कहाँ और कितनी जगह आयोजन हुआ—उसका भी कोई आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
इन अस्थायी और अव्यवस्थित परिस्थितियों को नियमित करना, संगठन को व्यवस्थित करना तथा समय पर महाधिवेशन सम्पन्न कराना अब हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। महाधिवेशन को लेकर उन्होंने सुझाव दिए :
अब हमारे पास एक ही वर्ष शेष है। इसलिए आवश्यक है कि हम छः महीने की समय–सीमा तय करें और उसी समय–सीमा के भीतर महाधिवेशन सम्पन्न करें।
बार–बार समय टालने से साथियों में निराशा, आलस्य और संगठनात्मक ढिलाई की स्थिति बनती है।
अब तक २३ जिलों में जिला समितियों का विस्तार हो चुका है, जिनमें शामिल हैं— मोरङ, सुनसरी, झापा, उदयपुर, सप्तरी, सिराहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा, चितवन, नवलपरासी, रूपन्देही, कपिलवस्तु, बाँके, बर्दिया, कैलाली, कंचनपुर, काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर । साथ ही विदेश शाखा – भारत, साउदी अरब।
यदि इन २३ जिलों में वार्ड से लेकर पालिका स्तर तक संगठन पर सही फोकस किया गया, तो इससे प्रदेश सभा तथा प्रतिनिधि सभा चुनाव में प्रत्यक्ष प्रभाव मिलेगा और समानुपातिक मत वृद्धि के साथ लोसपा नेपाल तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में आ सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि
प्रत्येक सप्ताह अनिवार्य बैठक आयोजित हो।
सप्ताहभर की गतिविधियों की समीक्षा की जाए।
राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी जनता तक पहुँचाई जाए।
समसामयिक मुद्दों पर चर्चा कर अध्यक्ष एवं नेतृत्व को जानकारी दी जाए ।
प्रतिदिन कम–से–कम एक पदाधिकारी पूरे दिन कार्यालय में उपस्थित रहे ।
सचिवालय के निर्णय अध्यक्ष द्वारा अनुमोदित कराए जाएँ और तत्परता से लागू हो ।

