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शारदीय नवरात्रा आरम्भ, आज शैलपुत्री की पूजा

 
माँ शैलपुत्री

कंचना झा, काठमांडू, २२सितम्बर ०२५। माँ भवानी, जगदम्बा, माँ अम्बिका, माँ जग जननी, माँ महामाया , माँ भगवती का आगमन हो चुका है । शारदीय नवरात्रा का प्रारंभ हो चुका है । इस बार माता हाथी पर सवार होकर आई है । इसे बहुत ही शुभ माना गया है ।
शारदीय नवरात्र तिथि – नवरात्र की प्रतिपदा तिथि २२ सितंबर को करीब आधी रात ०१ः२३ पर शुरू हो गई है । प्रतिपदा तिथि का समापन २३ सितंबर को अर्धरात्रि ०२ः५५ पर होगा, इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, २२ सितंबर को ही शारदीय नवरात्र की घटस्थापना की जाएगी।
कलश स्थापना का मुहूर्त – शारदीय नवरात्र के दिन कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह ०६ः०९ से लेकर सुबह ०८ः०६ तक रहने वाली है, जिसकी अवधि १ घंटे ५७ मिनट की रहेगी, वहीं अगर सुबह के मुहूर्त में कोई कलश स्थापना न कर पाए तो वह अभिजीत मुहूर्त में भी कलशस्थापना कर सकता है, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह ११ः४९ से लेकर दोपहर १२ः३८ तक रहेगा।
अब जाने कि कैसे पता चलता है कि माता की सवारी किस पर है ? माता की सवारी नवरात्रि के पहले दिन के वार के अनुसार तय होती है । रविवार या सोमवार से शुरू होने पर हाथी पर, मंगलवार या शनिवार को घोड़ा, बुधवार या शुक्रवार को डोली पर और गुरुवार को नाव पर सवार होकर आती हैं । माता के हाथी पर आगमन को बहुत ही शुभ माना जाता है, जो अच्छी वर्षा, फसल और धन–धान्य से समृद्धि का संकेत देता है ।
इसके विपरीत यदि उनका आगमन घोड़े पर होता है तो कलह, डोली पर महामारी और चरणायुध पर अशुभता को दर्शाता है ।
पंडित गगन शर्मा बताते हैं कि, “मां दुर्गा का हाथी पर आगमन प्रकृति और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी होता है. यह एक सकारात्मक संकेत है कि आने वाला समय आर्थिक रूप से समृद्ध और पर्यावरण की दृष्टि से संतुलित रहेगा । ”

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अब माँ भवानी के नौ रूप कौन –कौन से हैं ?
माँ भवानी जिन्हें नवदुर्गा भी कहते हैं । ये रूप हैं – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री । ये नौ रूप शक्ति स्वरूपा देवी माँ दुर्गा के विभिन्न गुणों का बोध कराते हैं और नवरात्र के नौ दिनों में इनकी विशेष पूजा की जाती है ।
मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री । इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं ।
कहते हैं माँ शैलपुत्री को लाल फूल बहुत पसंद है । इसके साथ ही उन्हें सफेद कनेर या चमेली के फूल बहुनत प्रिय हैं । उन्हें सफेद रंग बहुत पसंद हैं । मां शैलपुत्री को ये फूल चढ़ाने से सुख, शांति और स्थिरता की प्राप्ति होती है ।  

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