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काठमांडू में  ‘बल्खु तराई समाज ’ ने किया महापर्व छठ का भव्य आयोजन

 

 

काठमांडू, कार्त्तिक ११ – सूर्य देव की भक्ति और आराधना के साथ मनाया जाने वाला छठ पर्व आज सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही संपन्न हो गया । चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय–खाय से होती है । महापर्व छठ का यह पहला दिन होता है । छठ के पहले दिन जो व्रती होते हैं वो सुबह स्नान ध्यान कर शाकाहारी भोजन करने के बाद ही व्रत शुरू करते हैं ।
महापर्व छठ के दूसरे दिन को खरना कहते हैं । इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं ।
शाम को गुड़ की खीर, गेहंू के आटा की रोटी और जहाँ जैसा रिवाज उस अनुसार सब्जी बनती है । व्रती प्रसाद रुप में इसी का भोग लगाते हैं । साथ ही इसी प्रसाद को स्वयं ग्रहण भी करते हैं ।
इसी तरह महापर्व छठ के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है ।
शाम के अघ्र्य व्रती बांस की सूप में फल, ठकुआ, चावल के लड्डू और अन्य प्रसाद सजाते हैं । नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अघ्र्य देते हैं ।


महापर्व छठ के चौथे दिन में उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है । यहाँ घाट पर ही बहुत से लोगों के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है । व्रती घर आकर प्रसाद ग्रहण कर पारण करते हैं । यह छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है ।
छठ को मुख्य रुप से मिथिलांचल का पर्व कहा गया है । लेकिन छठ अब मिथिलांचल से निकलकर विश्व का महापर्व बन गया है । यह पर्व अब विश्व के कोने–कोने में मनाया जा रहा है । वैसे तो काठमांडू में बहुत दिनों से छठ पूजा का आयोजन होता रहा है लेकिन इसबार कुछ विशेष रुप से मनाया गया है । खासकर काठमांडू के बल्खु कुमारी क्लब में इसबार इस महापर्व का भव्य आयोजन किया गया । इस बार महनगर ने भी इस पर्व को ध्यान में रखकर जगह जगह साफ सफाई करवाई । हलांकि पहले भी काठमांडू में छठ पर्व मनाया जाता रहा है । क्योंकि चाहे रोजगार को लेकर हो, बच्चों की शिक्षा को लेकर हो, तराई के लोग काठमांडू में बसने लगे तो छिटपुट रुप से छठ का आयोजन होने लगा । पहले एक दो जगह से शुरुआत हुई । मगर इसबार काठमांडू महानगरपालिका ने छठ के आयोजन को लेकर कुल मिलाकर आठ जगहों का चयन किया । जिसमें बल्खु कुमारी क्लब का भी चयन किया गया । इसके अलावे कमलपोखरी, गौरीघाट, बोक्सीदह, बागमती दोभन, टंकेश्वर, कुलेश्वर वॉलीबॉल ग्राउण्ड और रामघाट को भी छठ पर्व के लिए चुना गया ।

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इसबार छठ का विशेष आयोजन बल्खु कुमारी क्लब में ‘बल्खु तराई समाज’ की ओर से किया गया था । हलांकि इसकी शुरुआत कुछ साल पहले से ही हो गई थी । लेकिन साफ सफाई और गंदे पानी की वजह से सभी का मन भटक जाता था । कुछ लोग कहने लगे कि यहाँ मन ही नहीं मानता है । छठ के विषय को बल्खु तराई समाज ने गंभीरता से लिया और एक अभियान चलाया कि इसबार कुमारी क्लब में भी अच्छे तरीके से यह पर्व मनाया जाएगा । बल्खु तराई समाज को महानगर ने भी आश्वासन दिया कि आपके काम में हम साथ हैं और कुमारी क्लब में बागमति के किनारे साफ – सफाई अभियान शुरु किया गया । इसका वृहत रुप से प्रचार भी किया गया कि जो व्रती चाहे यहाँ आकर छठ पूजा कर सकते हैं । एक से दो, दो से तीन होते– होत नौ व्रतियों ने कुमारी क्लब में पूजा करने के लिए हाँ कहा और इतना वृहत आ सुंदर आयोजन किया गया कि कुमारी क्लब के लागों ने खुलकर इसकी सराहना की ।
संयोग भी कुछ इस तरह का बना कि इसबार सड़क की अवस्था अच्छी नहीं होने की वजह से बहुत से तराईवासी अपने घर नहीं जा सकें । सभी के मन में छठ को लेकर हाँ ना चल रहा था कि क्या करें क्या न करें । लेकिन बल्खु तराई समाज ने एक तरह का बीड़ा उठाया और सभी को एक राहत भी मिली कि यहाँ भी हम छठ मना सकते हैं ।

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बल्खु तराई समाज का कहना है कि – ‘हमने जिस तरह से अपनी सोच बनाई थी उतना नहीं कर सकें । इस बार जो कमी कमजोरी हुई है वो अगली बार नहीं होगी । हम और बेहतर करने के प्रयास में लगे हुए हैं । समाज ने यह भी जानकारी दी कि कुमारी क्लब के लोगों की सहायता तथा महानगर के सहयोग से अगली बार हम यहाँ छठ घाट भी बनाने जा रहे हैं । जिससे बहुत से व्रती यहाँ पूजा अर्चना करने के लिए आ सकेंगे ।’
छठ के इस अवसर पर बल्खु तराई समाज ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया था । जिसमें बाहर से किसी भी कलाकार को नहीं बुलाया गया वरन इस कार्यक्रम में कुमारी क्लब के लोगों ने भाग लिया और गीत संगीत की प्रस्तुति दी । छठ के इस भव्य आयोजन में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिसमें सभी धर्म, जात जाति के लोगों की सहभागिता थी ।

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