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हेटौंडा बाज़ार: आखिर विवाद था क्या ?

 

बागमती प्रदेश की राजधानी हेटौंडा में मुख्य सड़क विस्तार को लेकर लगभग 50 वर्षों से चलता आ रहा विवाद अब हट गया है। सड़क डिभिजन ने 20 मंसिर को मुख्य बाज़ार क्षेत्र में बने 531 घर और संरचनाओं को हटाना शुरू किया, जिसके बाद पुराना विवाद लगभग समाप्त माना जा रहा है।

मुख्य विवाद क्या था?

  • वर्ष 2031 में सार्वजनिक सड़क ऐन जारी हुआ।
  • 2033 में राजपत्र में सूचना प्रकाशित हुई कि सड़क के दायें–बाएं 25–25 गज क्षेत्र राज्य का होगा।
  • लेकिन समय–समय पर:
    • लोगों ने वहाँ मकान बनाए
    • अवैध संरचनाएं खड़ी हुईं
    • इन्हें रोकने के लिए बार-बार आंदोलन और अदालत तक विवाद गया
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घर बनाने वालों ने खुद कबूल किया था

पुराने समय में जब नगरपालिकाओं ने नक्शा पास किया, तब घर मालिकों ने यह लिखित सहमति (कबुलियत) दी थी कि:

✔ सड़क विस्तार होने पर
✔ राज्य चाहे जिस समय
✔ हम खुद अपनी बिल्डिंग हटाएँगे

इसमें पूर्व मुख्यमंत्री डोरमणि पौडेल के परिवार की संपत्ति भी शामिल थी।

मुआवज़ा क्यों नहीं?

अधिकतर घर सड़क अधिकार क्षेत्र के अंदर बने हुए थे।
सर्वोच्च अदालत के फैसलों में स्पष्ट कहा गया है—

  • सड़क की जमीन पहले से सरकारी थी
  • इसलिए मुआवज़े का अधिकार नहीं बनता
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इसी वजह से सरकार अब बिना मुआवज़ा दिये सड़क खाली करा रही है।

कई बार काम रुका

  • स्थानीय विरोध
  • अदालत के स्थगन आदेश
  • बार-बार रिट याचिकाएँ

इसी वजह से सड़क चौड़ीकरण कई बार रुक गया।

सुकुम्बासी को भी जमीन दी गई थी

अतीत में सड़क सीमा के भीतर ही कुछ जगहें भूमिहीन सुकुम्बासी को लालपूर्जा सहित बाँट दी गईं, जिससे विवाद और उलझा।

अब क्या हो रहा है?

  • सड़क केंद्र से दोनों ओर 25–25 मीटर खाली किया जा रहा है
  • भारी सुरक्षा व्यवस्था
  • बड़ी मशीनों से तोड़फोड़
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इसके साथ ही हेटौंडा बाजार और राजमार्ग विस्तार की प्रक्रिया तेज हो गई है।

निष्कर्ष

  • विवाद 50 वर्ष पुराना था
  • कानून पहले से मौजूद था
  • कई नेताओं ने खुद कबूलनामा किया था
  • अदालत ने मुआवज़ा न देने को वैध माना
  • अब कार्रवाई तेज होकर अंतिम चरण में है

हेटौंडा का पुराना संकरा बाज़ार अब विस्तृत सड़क में बदलने जा रहा है ।

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