पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा घोटाला: 8 अरब 37 करोड़ के भ्रष्टाचार का मामला अदालत पहुंचा
पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निर्माण में बड़े दलों और बड़े अधिकारियों की संलग्नता का आरोप

काठमांडू, ८ दिसम्बर, 2025, मंसिर 22, सोमवार ।
मामले का सारांश
नेपाल की सत्ताधारी पार्टियों और वरिष्ठ अधिकारियों पर पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा निर्माण में 8 अरब 37 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विशेष अदालत में मुकदमा दायर किया गया है। नेपाल की भ्रष्टाचार निरोधक संस्था “अख्तियार” द्वारा दायर इस मुकदमे में 5 पूर्व मंत्रियों, 10 पूर्व सचिवों समेत कुल 55 व्यक्तियों और चीनी ठेकेदार कंपनी CMC इंजीनियरिंग के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।

मुकदमे का केंद्र लागत को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर भ्रष्टाचार करने का आरोप है। हवाईअड्डे का निर्माण 21 करोड 59 लाख 65 हजार डॉलर के ऋण से किया गया, जिसका बोझ सीधे नेपाल के नागरिकों पर है।

मुख्य आरोपी
· पूर्व पर्यटन मंत्री: पोष्टबहादुर बोगटी (मृत, उनकी पत्नी पर केस), रामकुमार श्रेष्ठ, भीम आचार्य, दीपकचंद्र अमात्य
· पूर्व वित्त मंत्री: डॉ. रामशरण महत
· पूर्व सचिव (पर्यटन): सुशील घिमिरे, सुरेशमान श्रेष्ठ
· पूर्व सचिव (वित्त): सुमनप्रसाद शर्मा, भेषराज शर्मा
· नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के पूर्व महानिदेशक: त्रिरत्न मानन्धर, रतिशचंद्रलाल सुमन, प्रदीप अधिकारी
· सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व रजिस्ट्रार: डॉ. रामकृष्ण तिमिल्सिना
· चीनी ठेकेदार कंपनी: चाइना CMC इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड
भ्रष्टाचार की कार्यप्रणाली
अख्तियार के अनुसार, एक जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से लागत को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया:
1. प्रारंभिक अनुमान (२०६७): जापानी सहयोग एजेंसी (JICA) और सलाहकारों द्वारा तय लागत 14.50 करोड़ डॉलर।
2. बोली प्रक्रिया में वृद्धि: CMC कंपनी ने बिना कारण 28.65 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव रखा। एक उप-समिति ने इसे अस्वीकार कर 16.64 करोड़ डॉलर का नया अनुमान दिया।
3. कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी: बोली मूल्यांकन समिति ने सभी बोलियों को अयोग्य घोषित किया, लेकिन संचालन समिति ने इस सलाह को नजरअंदाज कर CMC के साथ वार्ता का फैसला किया, जो खरीद कानून के खिलाफ था।
4. मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या: मंत्रिपरिषद ने मूल अनुमान के भीतर काम पूरा करने का आदेश दिया था, लेकिन अधिकारियों ने CMC से मिलकर लागत बढ़ाकर 26.49 करोड़ डॉलर कर दिया।
5. परामर्शदाता समिति का गठन: पर्यटन मंत्री रामकुमार श्रेष्ठ के कार्यकाल में एक परामर्शदाता समिति बनाई गई, जिसने CMC के हित में लागत 21.59 करोड़ डॉलर तय की।
6. अंतिम अनुबंध (२०७१): अंततः 24.40 करोड़ डॉलर (भुगतान राशि और VAT सहित) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। यह राशि मूल स्वीकृत लागत 16.96 करोड़ डॉलर से लगभग 7.43 करोड़ डॉलर (43% से अधिक) अधिक थी।
अख्तियार का दावा: यह अतिरिक्त 7.43 करोड़ डॉलर (नेपाली रुपये में 8 अरब 37 करोड़ रुपये) ही भ्रष्टाचार की राशि है, जिसे अवैध तरीके से लागत में जोड़ा गया।
अतिरिक्त आरोप
· अवैध कर छूट: ठेकेदार कंपनी CMC को अनुबंध के विपरीत 2 अरब 22 करोड़ रुपये से अधिक की कर छूट दी गई। यह निर्णय तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और शेरबहादुर देउवा के कार्यकाल में लिए गए।
· अन्य अनुसंधान: अख्तियार 32 करोड़ रुपये की अतिरिक्त भुगतान और परामर्शदाता नियुक्ति में 28 लाख डॉलर के भुगतान के अलग से अनुसंधान कर रहा है।

निष्कर्ष
यह मामला नेपाल में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और शासन तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। आरोप है कि राजनीतिक नेतृत्व, नौकरशाही और ठेकेदार कंपनी के बीच मिलीभगत से सार्वजनिक धन की लूट हुई। अदालत का निर्णय नेपाल में जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। हवाईअड्डे का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन उस पर लदा भारी ऋण और भ्रष्टाचार का आरोप नेपाल की जनता के सिर पर मंडरा रहा है।

