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“मिशन निर्भया ऑपरेशन” में अंतर-एजेंसी समन्वय की बड़ी सफलता

 

मुज़फ्फरनगर (उत्तर-प्रदेश) / तामूलपुर (असम), दिसंबर 2025।

भारत–भूटान सीमा के समीप स्थित असम के तामूलपुर जिले की रहने वाली 17 वर्षीय नाबालिग लड़की अंजली (बदला हुआ नाम) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले से सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया है। यह कार्रवाई एक संयुक्त और संवेदनशील मानवीय अभियान “मिशन निर्भया ऑपरेशन” के अंतर्गत सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नाबालिग छात्रा, जो कक्षा आठ में अध्ययनरत थी, लगभग छह माह पूर्व अचानक लापता हो गई थी। इस संबंध में तामूलपुर थाना, असम में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस एवं परिजनों द्वारा लगातार प्रयासों के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल सका, जिससे मानव तस्करी की आशंका प्रबल हो गई थी।

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अत्यंत गरीब और पीड़ित परिवार की सहायता हेतु असम सेंटर फॉर रुरल डेवलपमेंट (ACRD Assam) ने मामले को इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा के संज्ञान में लाया तथा सीमांत मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल (SSB) तेजपुर, को भी लिखित रूप से अवगत कराया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा द्वारा त्वरित जांच प्रारंभ की गई। परिवार, पड़ोसियों और स्कूल के सहपाठियों से पूछताछ के साथ-साथ तकनीकी विश्लेषण किया गया, जिसमें एक संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आया। जांच के दौरान उक्त नंबर की लोकेशन दिल्ली के समीप पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला मुज़फ्फरनगर, थाना मंसूरपुर क्षेत्र के एक गाँव बेगराजपुर में पाई गई।

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इस संवेदनशील मामले में डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह (मिशन मुक्ति फाउंडेशन, नई दिल्ली) द्वारा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया और अपराधी तक पहुँचने का मार्ग तैयार किया.

श्री प्रियांक कानूनगो, राष्ट्रीय मानवाधिकार(NHRC) आयोग के सदस्य के दिशा-निर्देश में एसएसबी की इंटेलिजेंस इकाई (क्षेत्रक मुख्यालय बेजपारा), मुज़फ्फरनगर पुलिस (उत्तर प्रदेश) मिशन मुक्ति फाउंडेशन, रेस्क्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन और मानव तस्करी रोधी इकाई क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी बेजपारा की संयुक्त टीम गठित कर विशेष अभियान चलाया गया।

ऑपरेशन दो स्तरों पर संचालित किया गया, जिसमें एक टीम जमीनी स्तर पर सक्रिय रही, जबकि दूसरी टीम फ़ोन कॉल/व्हाट्सएप कॉल से तकनीकी एवं समन्वय कार्यों में लगी रही। संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और नाबालिग को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

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रेस्क्यू के पश्चात नाबालिग को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता एवं काउंसलिंग के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया है। मामले से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाएगी।

यह सफल अभियान मानव तस्करी के विरुद्ध चल रहे प्रयासों में अंतर-एजेंसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई का सशक्त उदाहरण है।

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