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Deep State (डीप स्टेट) की कार्यानीति और नेपाल के ZenZ विद्रोह का भविष्य ? : कैलाश महतो

कैलाश महतो, 12 जनवरी।‎”डीप स्टेट” (Deep State) एक ऐसी अवधारणा है जो एक गुप्त और अनौपचारिक नेटवर्क को संदर्भित करती है, जिसमें सरकार के भीतर के अधिकारी (जैसे खुफिया एजेंसियां, नौकरशाह, बड़े बड़े व्यापारियों, प्रहरी प्रशासक या सैन्य कर्मी) शामिल होते हैं, जो निर्वाचित नेताओं के साझेदारी या उसके इच्छा के विरुद्ध, पर्दे के पीछे से देश की नीतियों और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। यह शब्द तुर्की और मिस्र जैसे देशों से आया है, जहाँ सुरक्षा एजेंसियाँ पर्दे के पीछे से सत्ता चलाती थीं, और अब इसका इस्तेमाल अमेरिका में स्थायी नौकरशाही या शक्तिशाली समूहों के लिए किया जाता है जो गुप्त रूप से सरकार को नियंत्रित करते हैं।

‎यह एक छाया सरकार या गुप्त सत्ता होता है, जो दुनिया में आवश्यकता के अनुसार अपने देश के मूल सत्ता और सरकार के आदेश से बाहर भी कार्य करता है।

मुख्य बिंदु :-

‎छिपी हुई शक्ति : यह एक ऐसी शक्ति है जो औपचारिक रूप से चुनी हुई नहीं होती, लेकिन सरकार पर गहरा प्रभाव डालती है।

‎स्वतंत्र एजेंडा : डीप स्टेट के सदस्य अपने एजेंडे और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए काम करते हैं, जो निर्वाचित सरकार के लक्ष्यों से अलग हो सकते हैं।

‎Conspiracy theory (षड्यंत्र सिद्धांत) : कई लोगों के लिए यह एक षड्यंत्र सिद्धांत है जो बताता है कि कैसे नौकरशाह या अन्य शक्तिशाली लोग राष्ट्रपति या चुनी हुई सरकार के फैसलों को पलट देते हैं या उन्हें प्रभावित करते हैं।

‎उदाहरण: इसमें खुफिया अधिकारी, उच्च-स्तरीय नौकरशाह, या बड़े कॉर्पोरेट हित शामिल होते हैं, जो कानून बनाने और नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं।

‎संक्षेप में यह एक अदृश्य शक्तिशाली समूह है जो देश के वास्तविक नियंत्रण में होने का दावा करता है, भले ही उनके पास कोई आधिकारिक पद न हो।

अमेरिकी Deep State (डीप स्टेट) क्या है ?

‎अमेरिकी “Deep State” (डीप स्टेट) एक विवादास्पद शब्द है। आसान भाषा में समझें तो यह अमेरिकी सरकार के उन गैर-निर्वाचित हिस्सें हैं जो असल में अपना स्वतन्त्र नीतियाँ चलाते हैं, फिर चाहे राष्ट्रपति कोई भी हो। राष्ट्रपति के मर्जी के भी खिलाफ जाकर भी यह अपने देश, राष्ट्र और जन-भलाई के लिए कार्य करता रहता है।

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‎इसमें खुफिया एजेंसियाँ (CIA, FBI), नौकरशाह, सैन्य अधिकारी और बड़े बड़े कारोबारी समूह तथा हथियार लॉबी का गठजोड़ शामिल होता है। इन्हें फर्क नहीं पड़ता कि व्हाइट हाउस (White House) में कौन बैठा है। ज्यादातर अमेरिकी नीतियाँ इस गठजोड़ से ही प्रभावित होती हैं।

‎कुछ लोग इसे एक गुप्त साजिश मानते हैं जो लोकतंत्र के बाहर काम करती है-जबकि विशेषज्ञ इसे सिर्फ स्थायी सरकारी तंत्र कहते हैं जो राष्ट्रपति के फैसलों पर पैनी नजर रखता है। इतिहास में अमेरिका ने कई देशों में सत्ता परिवर्तन, यानी रिजीम चेंज कराए हैं। यह कार्य ज्यादातर CIA के जरिए कराया जाता है ता कि अपने हितों को सुरक्षित रखा जा सके। इनमें खास रुप से किसी देश के तेल को हथियाना, कम्युनिष्ट व्यवस्था को रोकना या लोकतंत्र फैलाना आदि कदम शामिल हैं। ये हस्तक्षेप अक्सर गुप्त होते हैं, लेकिन उनके नतीजे लंबे समय तक अस्थिरता, गृहयुद्ध या तानाशाही लाते हैं। भेनेज्वेएला इसका ताजा घटना है।

‎अमेरिका के नापसन्द के शासकों को वह दुनिया के हर संभव देश में सत्ता से हटाने और अपने पसन्द के अमेरिका भक्त किसी कठपुतली व्यक्ति को उस देश के सत्ता पर बैठाता है। जबतक वह अमेरिकी चाहत को पूरा करता जाता है, उसे सत्ता में बैठाये रखता है और ज्योंही वह अपने देश और जनता के हित में लगकर अमेरिका के बातों को अनसुना करता है, उसे या तो सत्ता से बाहर कर दिया जाता है या फिर सद्दाम हुसेन, गद्दाफी, ओसामा बिन लादेन या फिर निकोलस मादुरो लगायत के वैश्विक सत्ताधारी नेताओं का हाल होना है।

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‎बताते चलें कि अमेरिका ने सन् 1900 से हालतक करीब 81 देशों के राष्ट्र/सरकार प्रमुखों को जबरजस्ती सत्ता से हटाया है, या मारा/मरबाया है।

‎अमेरिका के लिए नेपाल एक स्ट्रेटजिक (strategic) देश है। यहाँ से वह भारत और चीन दोनों पर अपना रणनीतिक दवाब बना सकता है तो दूसरी तरफ नेपाल के भूमि के अन्दर मौजूद खनिज और मिनरल्स भी अमेरिका के नजर से बाहर नहीं हैं। यही कारण है कि नेपाल जैसे अल्पविकसित छोटे देश के राजनीति में गंभीर दिलचस्पी लेकर वर्षों और महीनों के तैयारी बाद नव-युवा (ZenZ) विद्रोह का अंजाम दिया गया है। गरीबी, उपेक्षा और आय अवसर के तलाश में रहे कुछ युवाओं को अमेरिका ने बखूबी असफल और सुशासनरहित सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और सुशासन स्थापना के नाम पर नेपाल में 8-9 अक्टूबर के दिन अविश्वसनीय और अकल्पनीय विद्रोह के साथ खरबों की धन-जन की क्षति के साथ तत्कालीन ओली सरकार की नींब उखाड़ दी।

‎ZenZ (जेन-जी) विद्रोह पश्चात् देश में अनेक तोड़मोड़, सौदेवाजी, सट्टेवाजी, राजनीतिवाजी, युवावाजी, स्टंटवाजी, पार्टीवाजी का धंधा चलाये जा रहे हैं। इन अनेक वाजियों में बालेन्द्र साह, कुलमान घिसिंग, सूदन गुरूँग और रबि लामीछाने जैसे कृतिम राजनीतिक पात्रों को निर्माण और पुनरनिर्माण किया जाता है। इनके बीच गठबंधन और एकता करबाया जाता है। ZenZ युवाओं से काम ले लिए जाने के बाद उन्हें अनेक टुकड़ों में बिखेड दिया जाता है और ZenZ (जेन जेड) के शहादत का सारा श्रेय बालेन, सूदन, रबि और कुलमान को दे दिया जाता है।

‎बालेन्द्र साह को प्रधानमंत्री के रुप में घोषित करबाया जाता है। सर्वोच्च अदालत के फैसला विपरीत निचले अदालत से भ्रष्टाचार में लिप्त रबि लामीछाने को जेल से रिहाई करबाया जाता है। उतना ही नहीं, संविधान और कानून के खिलाफ बनाये गये सुशिला सरकार से अनेक गैर कानूनी काम करबाते हुए बिना कोई बदलाव केवल निर्वाचन करबाने का फरमान डलबाया जा रहा है।

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‎राजनीतिक अस्थिरता कायम रखने के लिए एक तरफ संसद पुर्नस्थापना हेतु सर्वोच्च में रिट करबाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं पार्टियों को चूनाव में भाग लेने को मजबूर किया जा रहा है। उधर नेपाली कांग्रेस में अपने लबिंग के पार्टी महासचिवद्वय गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा को बलपेल विशेष महाधिवेशन करबाने में शक्ति प्रदान किये जा रहे हैं ता कि अपने हिसाब से गगन जी को भी सरकार प्रमुख बनाया जा सके अगर बालेन साह और उनके समूह से वह लाभ न मिलने की संकेत रही तो जो अमेरिका को चाहिए।

‎कथम कदाचित संसद पुनर्स्थापना हो गयी तो राजनीतिक विश्लेषकों मानना है कि पुनर्नस्थापित संसद से कहीं गगन थापा को ही न प्रधानमंत्री अमेरिका बना दे!

‎राजनीतिक घटनाक्रम चाहे जो भी हो, होने बाले सारे राजनीतिक दुर्दशा का जिम्मेवारी नेकपा एमाले और ओली, नेपाली कांग्रेस और देउवा दम्पति तथा तत्कालीन माओवादी और प्रचण्ड तथा रा. स्व. पा. और रबि लामीछाने को लेना होगा।

बालेन या गगन के प्रधानमंत्रित्व काल देश के लिए वीभत्स होने का संभावना प्रवल है। कारण जिस उद्देश्य से अमेरिकी लगानी से सत्ता और नेता परिवर्तन होंगे, उसके अनुसार अमेरिका नेपाल में स्थान और आय खोजेगा। अगर सरकार अमेरिकी चाहतों को मान लीं तो नेपाल को तीन दुर्घटनाओं का सामना करना निश्चित है।

पहला, अमेरिका भारत और चीन पर आँखे प्रत्यक्षत: डालेगा, जिससे दोनों पडोसी देशों से नेपाल प्रताड़ित बनेगा।

दूसरा, नेपाल का खनिज पदार्थों का अमेरिका दोहन करेगा, जिससे नेपाल का भविष्य नष्ट हो जायेगा, और

तीसरा, अगर नेपाल अमेरिकी सुबिधा को नकारने का हिमाकत की तो अमेरिकी झंझट बढ़ेंगी और शासकों को गद्दाफी, सद्दाम हुसेन और निकोलस मादुरो बनना तय है।

कैलाश महतो

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