कांग्रेस में सियासी घमासान तेज़ : देउवा का संकेत—“संभावित हालात के लिए तैयार रहें”
काठमांडू, 28 पुस 2082 । नेपाली कांग्रेस के भीतर जारी सत्ता–संघर्ष अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। भृकुटीमण्डप में चल रहे विशेष महाधिवेशन के बीच पार्टी सभापति शेरबहादुर देउवा ने सोमवार को महाराजगञ्ज स्थित अपने अस्थायी निवास पर निकटस्थ नेताओं की बैठक बुलाकर मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति पर गहन चर्चा की। बैठक के दौरान देउवा ने पार्टी विभाजन की आशंका जताते हुए नेताओं को “संयमित और एकजुट” रहने का संदेश दिया तथा आने वाले संभावित हालात का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा।
देउवा ने इस दौरान महामंत्री गगन थापा पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार देउवा ने कहा कि “क्रियाशील सदस्यता प्रबंधन की जिम्मेदारी लेने के बावजूद महामंत्री स्वयं काम पूरा नहीं कर पाए, उल्टे इससे पार्टी में समस्याएँ पैदा हुईं। यह पार्टी की परंपरा और पद्धति के खिलाफ है।”
हालाँकि, देउवा और कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्का फिलहाल किसी तात्कालिक अनुशासनात्मक कार्रवाई के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। पार्टी के भीतर ‘पर्ख और हेर’ (देखो और इंतजार करो) की नीति अपनाई जा रही है।
‘दूसरे विशेष महाधिवेशन’ के फैसलों पर टिकी निगाहें
संस्थापन पक्ष के नेता अब विशेष महाधिवेशन के बंदसत्र से निकलने वाले निर्णयों के आधार पर आगे की रणनीति तय करने के मूड में हैं। कार्यवाहक सभापति खड्का के निकट सूत्रों का कहना है कि जब तक बंदसत्र से कोई ठोस निर्णय नहीं आता, तब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुदूरपश्चिम प्रदेश कांग्रेस सभापति वीरबहादुर बलायर ने भी मीडिया से बातचीत में यही संकेत दिए कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता। उनके अनुसार, पार्टी एकता, आगामी चुनाव और संगठनात्मक अधिवेशन को समय पर पूरा करना देउवा की प्राथमिकता है।
शेखर कोइराला की पहल, ‘लचकता’ पर सहमति
बैठक का एक अहम पहलू यह रहा कि कांग्रेस के अलग विचार समूह के नेता डॉ. शेखर कोइराला भी अपने समर्थक पदाधिकारियों और केंद्रीय सदस्यों के साथ देउवा से मिलने महाराजगञ्ज पहुँचे। कोइराला ने पार्टी को विभाजन से बचाने के लिए तत्काल पहल करने का आग्रह किया।
सूत्रों के मुताबिक, देउवा और कोइराला के बीच अधिकतम लचकता अपनाकर विवाद सुलझाने पर बातचीत हुई। कोइराला पक्ष ने स्पष्ट कहा कि पार्टी टूट से बचाने के लिए जो भी जरूरी हो, उसे तुरंत अमल में लाया जाना चाहिए।
कानूनी सलाह और अंदरूनी रणनीति
देउवा ने शेखर कोइराला से मुलाकात से पहले कानूनी पृष्ठभूमि वाले नेताओं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी सलाह ली। इस बैठक में नेता रमेश लेखक और पूर्व महान्यायाधिवक्ता खम्मबहादुर खातिलगायत शामिल थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी संभावित संवैधानिक या संगठनात्मक चुनौती के लिए कानूनी तैयारी भी कर रहा है।
महाधिवेशन में न जाने का निर्णय
इधर, कुछ केंद्रीय सदस्यों ने कार्यवाहक सभापति खड्का से विशेष महाधिवेशन स्थल पर जाकर पार्टी विभाजन रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन खड्का ने इसे अस्वीकार कर दिया। उनका तर्क था कि वहाँ उपस्थिति दर्ज कराने से विशेष महाधिवेशन को वैधता मिल सकती है।
एकता को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों से बचने की अपील
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक सभापति खड्का ने एक सार्वजनिक अपील जारी कर पार्टी एकता को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी गतिविधि से बचने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि देश संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में कांग्रेस पर राष्ट्रीय जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
भोलि केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक
विशेष महाधिवेशन पक्ष द्वारा वर्तमान केंद्रीय कार्यसमिति भंग करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने के बीच, कार्यवाहक सभापति खड्का ने मंगलवार सुबह 11 बजे केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है। बैठक ललितपुर स्थित पार्टी कार्यालय में होगी, हालांकि एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर, नेपाली कांग्रेस इस समय गंभीर आंतरिक संकट के दौर से गुजर रही है। देउवा का संदेश साफ है—पार्टी को टूट से बचाना प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए हर संभावित परिस्थिति का सामना करने की मानसिक तैयारी भी जरूरी है। आने वाले दिन तय करेंगे कि कांग्रेस इस संकट से एकजुट होकर निकलती है या राजनीतिक विभाजन की ओर बढ़ती है।


