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बाँके में छवि बैरागी घिमिरे के “विविशारा” उपन्यास पर समीक्षा गोष्ठी

 


नेपालगंज/(बाँके) पवन जायसवाल । विश्व नेपाली साहित्य महासंघ, नेपाल शाखा के आयोजन में साहित्यकार द्वारा लिखित उपन्यास “विविशारा” पर समीक्षा गोष्ठी तथा विभिन्न प्रांतीय एवं जिला शाखाओं का पुनर्गठन फाल्गुन 7 गते को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम नेपालगंज उद्योग वाणिज्य संघ के सभाहल में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महासंघ, नेपाल शाखा के उपाध्यक्ष ऋषिराम सापकोटा ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में विश्व नेपाली साहित्य महासंघ, नेपाल शाखा के सलाहकार तथा लुम्बिनी प्राविधिक विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य प्रा. डा. कृष्णप्रसाद घिमिरे उपस्थित रहे। उन्होंने पानस में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का संचालन महासंघ के सचिव लेक प्रसाद प्याकुरेल ने किया।

सम्मान एवं कृति समीक्षा

कार्यक्रम के प्रथम चरण में लुम्बिनी प्रदेश में रहकर साहित्य सेवा में समर्पित नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सभा सदस्य प्राज्ञ महानन्द ढकाल को सम्मानित किया गया। साथ ही, विश्व नेपाली साहित्य महासंघ नेपाल, लुम्बिनी प्रदेश को ऊँचाई प्रदान करने में योगदान के लिए प्रदेश अध्यक्ष लेक प्रसाद प्याकुरेल को कदर–पत्र प्रदान किया गया।

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इसके पश्चात “विविशारा” उपन्यास की समीक्षा की गई। समीक्षक के रूप में चरित्रा शाह ने फ्रायड, एडलर और युंग की मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं के आधार पर कृति का विश्लेषण प्रस्तुत किया। दूसरे समीक्षक पुष्करनाथ रिजाल ने उपन्यास के विसंगति पक्ष और संरचनात्मक दृष्टिकोण से अपनी समीक्षा रखी।
उपन्यासकार छवि बैरागी घिमिरे ने कृति को यथार्थपरक बनाने के लिए किए गए अध्ययन, लेखन–प्रक्रिया तथा समीक्षकों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए।

शाखाओं का पुनर्गठन

कार्यक्रम के दूसरे चरण में विश्व नेपाली साहित्य महासंघ के अंतर्गत लुम्बिनी प्रदेश, बाँके तथा बर्दिया जिला शाखाओं का गठन एवं पुनर्गठन किया गया।

लुम्बिनी प्रदेश शाखा का गठन चरित्रा शाह की अध्यक्षता में किया गया। उपाध्यक्ष के रूप में भरतबहादुर रानाभाट और गणेशा कार्की, महासचिव बोधराज प्याकुरेल, सचिव इन्दिरा गौतम तथा कोषाध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ कलाकार सुन्दर गुरुङ चयनित हुए। सदस्य पद पर पाल्पा से केशव गाह, बर्दिया से लक्ष्मी बस्याल एवं खगेन्द्र नेपाल, दाङ से दर्पण दंगाली और यमा रेग्मी, प्युठान से नवीन बस्याल, कपिलवस्तु से शशिधर सापकोटा, बाँके से दिला शाह, तारा रोकाया और शतक रक्तदाता पवन जायसवाल, रूपन्देही से प्रतिमा पन्थी चयनित हुए।

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बाँके जिला शाखा का पुनर्गठन साहित्यकार चन्द्रावती अधिकारी की अध्यक्षता में किया गया। उपाध्यक्ष पद पर पदमा रिजाल, सचिव महेन्द्र सेडाई, सह–सचिव दीप पन्थी तथा कोषाध्यक्ष के रूप में अर्चना पाठक चयनित हुईं। सदस्य पद पर सुनगाभा पोखरेल, सन्तोषी पुन मगर, लक्ष्मण सुर्खेती, मुस्तफा अहसन कुरैसी और अन्तरिक्ष देवकोटा शामिल रहे।

इसी प्रकार, फागुन 5 गते को बर्दिया में सम्पन्न अधिवेशन से साहित्यकार प्रभात सुवेदी की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय बर्दिया शाखा का गठन किया गया।

कार्यक्रम में महासंघ की केन्द्रीय सचिव एवं संगठन विभाग प्रमुख कल्पना पौडेल जिज्ञासु ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए महासंघ द्वारा संचालित अनुवाद और प्रकाशन संबंधी विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट उपस्थिति

कार्यक्रम में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के पूर्व सदस्य सचिव सनत कुमार रेग्मी, प्राज्ञ महानन्द ढकाल, प्रलेस केन्द्रीय सचिव डा. हरिप्रसाद तिमिल्सिना, लेखक नरेन्द्र जंग पिटर, साहित्यकार किरण आचार्य सहित अनेक साहित्यिक व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
प्रमुख अतिथि प्रा. डा. कृष्णप्रसाद घिमिरे ने महासंघ की विगत से वर्तमान तक की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए समीक्षित उपन्यास पर भी संक्षिप्त टिप्पणी की।

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समापन अवसर पर अध्यक्ष ऋषिराम सापकोटा ने कहा कि वे वि.सं. 2051 से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और इस दौरान अनेक साहित्यकारों से उनका साक्षात्कार हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्व नेपाली साहित्य महासंघ की विभिन्न देशों में 25 शाखाएँ कार्यरत हैं, जिनमें नेपाल शाखा उत्कृष्ट शाखा के रूप में सम्मानित हो चुकी है।

कार्यक्रम में अवधी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के संस्थापक विष्णुलाल कुमाल, खड्ग बहादुर बोहरा, डा. जगत बहादुर, नेपालगंज उद्योग वाणिज्य संघ के महासचिव भीम बहादुर रानाभाट, महेन्द्र पुस्तकालय नेपालगंज के अध्यक्ष बलराम यादव, कृष्ण प्रसाद श्रेष्ठ, रामदेव पाण्डे, बिमला कुमारी खत्री, जैद अहमद खान, सन्तोषी पुन मगर सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

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