सत्ता, प्रभाव और रहस्यों का जाल : श्वेता दीप्ति
डॉ श्वेता दीप्ति, हिमालिनी आवरण आज फरवरी ०२६। एपस्टीन फाइल आधुनिक इतिहास के सबसे विवादित और रहस्यमय दस्तावेज में से एक मानी जाती है । दरअसल यह फाइलें अमेरिकी वित्तीय कारोबारी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े यौन शोषण, मानव तस्करी और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को उजागर करती हैं । इन फाइलों ने केवल एक व्यक्ति के अपराधों को ही नहीं, बल्कि राजनीति, व्यापार और वैश्विक अभिजात वर्ग के अंधेरे पक्ष को भी सामने लाने का दावा किया है । “एपस्टीन फाइल” कोई एक दस्तावेजÞ नहीं, बल्कि अदालती रिकॉर्ड, गवाहियों, ईमेल, उड़ान सूचियों (फ्लाइट लॉग्स) और पीडि़तों के बयानों का संग्रह है । अमेरिका के न्याय विभाग (म्यव्) द्वारा यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजÞों को लगातार सार्वजनिक किया जा रहा है । हाल ही में जारी हुए दस्तावेजÞों ने एक बार फिर दुनिया भर का ध्यान इस कुख्यात मामले की ओर खींच लिया है । इन फाइलों में अरबपति उद्योगपतियों, टेक कंपनियों से जुड़े प्रभावशाली लोगों, अमेरिका समेत कई देशों के नेताओं, वैज्ञानिकों, चर्चित हस्तियों और मनोरंजन जगत के नामी चेहरों के संपर्कों का जिक्र है । हालाँकि इन दस्तावेजÞों में किसी भी व्यक्ति को सीधे तौर पर अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है, लेकिन जिन नामों का खुलासा हुआ है, उन्होंने वैश्विक स्तर पर उत्सुकता, बहस और संदेह को जन्म दिया है । एपस्टीन फÞाइल्स से सामने आ रहे तथ्यों ने दुनिया भर की सुर्खिÞयाँ बटोरी हैं । इनमें ऐसे कई नाम सामने आए, जिनका संबंध एपस्टीन से सामाजिक या व्यावसायिक रूप से बताया गया है । हालांकि, नाम सामने आना अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं होता । इसके लिए कई आधार तय करने होते हैं । यह तथ्य बार–बार रेखांकित किया गया है ।

आधुनिक लोकतांत्रिक समाजों में यह धारणा प्रबल है कि कानून सभी के लिए समान है । किंतु एपस्टीन फाइल से संबंधित खुलासों ने इस धारणा को गम्भीर चुनौती दी है । यह मामला केवल व्यक्तिगत आपराधिक कृत्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संरचनात्मक असमानता को भी उजागर करता है जिसमें आर्थिक और राजनीतिक शक्ति न्यायिक जवाबदेही को प्रभावित कर सकती है ।
कौन था एपस्टीन
विश्व के आपराधिक इतिहास में जेफरी एपस्टीन एक ऐसा नाम है जो वित्तीय सफलता और घिनौनी हरकतों का पर्याय बन गया । जेफरी एपस्टीन का जन्म एक यहूदी परिवार में हुआ था । उसने ब्रुकलिन में पढ़ाई की थी । कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उसने कूपर यूनियन और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई की थी । जेफरी एपस्टीन ने फाइनेंस की दुनिया में खूब नाम कमाया । उसने एक स्कूल में गणित के शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था । बाद में उसने बैंकिंग में काम करना शुरू कर दिया । सन १९८१ में उसने अपनी कंपनी खोली जिसका काम लोगों को धोखाधड़ी से बचाना था । सन १९८८ में उसने जे एपस्टीन एंड कंपनी नाम से एक वित्तीय फर्म शुरू की थी । इस फर्म में सिर्फ वही लोग आ सकते थे जिनके पास १ बिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति होती थी । ऐसा कहा जाता है कि एपस्टीन मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरी गलत गतिविधियों में भी शामिल था ।
सन १९९३ में उस पर एक धोखाधड़ी वाली निवेश योजना में शामिल होने का आरोप लगा । हालांकि उसे इस मामले में सजा नहीं मिली । यह आज भी एक रहस्य है कि एपस्टीन ने इतनी जल्दी सफलता कैसे हासिल की । लेकिन यह सर्वविदित है कि उसने दुनिया के कई अमीर लोगों और वित्तीय संस्थानों के साथ बड़े–बड़े सौदे किए । एपस्टीन को जेपी मॉर्गन चेस जैसे बड़े बैंकों से भी पैसे मिले । इन बैंकों ने उसे बड़ी रकम निकालने की इजाजत दी । ड्यूश बैंक के साथ भी उसके वित्तीय संबंध थे । ड्यूश बैंक ने एक मुकदमा निपटाने के लिए ७५ मिलियन डॉलर का पेमेंट किया था । इस मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि ड्यूश बैंक ने एपस्टीन के गलत कामों से फायदा उठाया था । ड्युश बैंक ने एपस्टीन के व्यवहार को भयानक बताया और उसके कामों को बुरा बताते हुए कहा कि, २०१३ में उससे गलती हुई थी जब उसने एपस्टीन के साथ काम करना शुरू किया था ।
गिरफ्तारी के एक महीने बाद ही जेल में रहस्यमय मौत
एपस्टीन की मुश्किलें सन २००५ में शुरू हुईं जब एक १४ साल की लड़की के माता–पिता ने उस पर यौन शोषण का आरोप लगाया । सन २००८ में उसने अभियोजकों के साथ एक समझौता किया और सिर्फ १३ महीने जेल में बिताए । इसके बाद कई और महिलाओं ने उसके खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए । सन २०१९ में एपस्टीन को यौन तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया । लेकिन एक महीने बाद ही वह अपनी जेल की कोठरी में मृत पाया गया । उसकी मौत के बाद उसकी संपत्ति और उसके जीवन के बारे में कई सवाल उठने लगे । एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप था । उसकी मौत के बाद उसके कानूनी दस्तावेजों ने लोगों का ध्यान खींचा । जब उसकी मौत हुई तब वह करीब ५६० मिलियन डॉलर, यानी ४८,३७,३३,१७,६०८ रुपये की संपत्ति का मालिक था ।
एपस्टीन की मौत के बाद कई तरह की बातें सामने आईं । राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद यह मामला और भी चर्चा में आ गया । कई दस्तावेजÞों और तस्वीरों से संकेत मिलता है कि १९९० के दशक में ट्रंप और एपस्टीन का सामाजिक दायरा एक–दूसरे से जुड़ा हुआ था । ट्रंप का नाम एपस्टीन की “ब्लैक बुक” में था और दोनों को कई हाई–प्रोफाइल पार्टियों में साथ देखा गया था । सीएनएन की तस्वीरों में एपस्टीन ट्रंप की शादी (मारला मैपल्स से) में भी थे । ट्रंप से रिश्ता इतना गहरा था कि २००२ में ट्रंप ने एपस्टीन को ‘शानदार आदमी’ कहा था । खुद एपस्टीन ने बाद में कहा कि वह १० साल तक डोनाल्ड का सबसे कÞरीबी दोस्त था ।
लेकिन इन बातों को एक सिरे से खारिज करते हुए ट्रंप कहते हैं कि एपस्टीन की पहली गिरफÞ्तारी से दो साल पहले ही उनका उससे झगड़ा हो गया था और २००८ तक ट्रंप कहने लगे कि वे एपस्टीन के फÞैन नहीं रहे । व्हाइट हाउस कहता है कि झगड़ा एपस्टीन के व्यवहार की वजह से हुआ और ट्रंप ने उसे अपने क्लब से निकाल दिया क्योंकि वह ‘घिनौना आदमी’ था । यानि एक शानदार आदमी अब घिनौना आदमी में बदल चुका था । इन दोनों के बिगड़ते रिश्ते के सम्बन्ध में वॉशिंगटन पोस्ट का कहना है कि झगड़ा फÞ्लोरिडा में किसी जÞमीन को लेकर हुआ था ।
हालाँकि ट्रंप का दावा है कि एपस्टीन की पहली गिरफÞ्तारी से पहले ही उनके संबंध टूट चुके थे और उन्होंने उसे अपने क्लब से बाहर कर दिया था । अब एपस्टीन की ‘क्लाइंट लिस्ट’ को लेकर विवाद छिड़ गया है । कहा जाता है कि इस लिस्ट में राजनीति, उद्योग और व्यापार जैसे विभिन्न क्षेत्रों के बहुत ताकतवर और संपन्न लोगों के नाम हैं । हालांकि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट और फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (ँद्यक्ष्) ने कहा है कि एपस्टीन के पास कोई ऐसी सूची नहीं थी जिसमें बड़े लोगों के नाम शामिल हों । उसने यह भी कहा कि एपस्टीन ने आत्महत्या की थी, जबकि संदेह जाहिर किया जा रहा है कि एपस्टीन की हत्या की गई थी ।
ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) आंदोलन के कट्टर समर्थक लंबे समय से मानते हैं कि सरकारी अधिकारी एपस्टीन के जीवन और मृत्यु से जुड़े अहम सच छुपा रहे हैं ।
कुछ का मानना है कि अमेरिकी समाज के सबसे ऊपरी तबके पर बच्चों के यौन शोषण का एक गिरोह चल रहा है, जिसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है । यह बात ‘क्यू’ नाम के एक गुप्त व्यक्ति के रहस्यमय संदेशों से फैली । कुछ का तो यह भी दावा है कि एपस्टीन इसराइल सरकार का एजेंट था ।
मृत्यु के बाद भी क्यों डराता है एपस्टीन ?
जेफ्री एपस्टीन की मृत्यु २०१९ में हो चुकी है, लेकिन उसकी मौत के छह साल बाद भी उसकी फाइलें कई सरकारों, नेताओं, उद्योगपतियों और प्रभावशाली हस्तियों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही हैं । दिलचस्प बात यह है कि भले ही इन फÞाइलों के कारण ट्रंप विवादों में घिरे हों, लेकिन इन्हें सार्वजनिक करने का आदेश उन्हीं की सरकार ने दिया था । रिपब्लिकन पार्टी के भीतर और ट्रंप समर्थकों की ओर से लंबे समय से दबाव था कि एपस्टीन जांच से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए । कई हफ्तों तक टालमटोल के बाद ट्रंप ने रुखÞ बदला और रिपब्लिकन सांसदों से फÞाइलें सार्वजनिक करने के पक्ष में वोट देने को कहा । इसके बाद अमेरिकी संसद के दोनों सदनों–हाउस और सीनेट–ने एक कानून पारित किया, जिस पर ट्रंप ने नवंबर में हस्ताक्षर किए ।
कौन–सी फाइलें सार्वजनिक नहीं होंगी ?
इस कानून के तहत न्याय विभाग को ३० दिनों के भीतर फÞाइलें जारी करनी थीं । हालाँकि कुछ दस्तावेजÞ सार्वजनिक नहीं किए जाएँगे, जिनमें–
– चल रही आपराधिक जाँच से जुड़े कागÞजÞात
– पीडि़तों की पहचान उजागर करने वाली जानकारी
– निजी और गोपनीय विवरण
– बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं ।
एपस्टीन फाइल्स क्या हैं ?
एपस्टीन मामला पहली बार २००८ में तब सामने आया, जब १४ वर्षीय लड़की के माता–पिता ने पुलिस में शिकायत की कि पाम बीच स्थित एपस्टीन के घर में उनकी बेटी के साथ यौन हिंसा हुई । जाँच के दौरान घर से कई नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें मिलीं । एपस्टीन को नाबालिगों से यौन शोषण के लिए दोषी ठहराया गया और उसे सेक्स अपराधी के रूप में पंजीकृत किया गया । इसके बावजूद अभियोजकों से हुए एक समझौते के कारण उसे अपेक्षाकृत हल्की सजा मिली ।
२०१९ में उस पर फिर आरोप लगे कि वह नाबालिग लड़कियों का अंतरराष्ट्रीय यौन तस्करी नेटवर्क चला रहा था । मुकÞदमे के इंतजÞार के दौरान जेल में उसकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया ।
इन दोनों मामलों की जाँच के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेजÞ इकट्ठा हुए–पीडि़तों और गवाहों के बयान, छापों में मिली सामग्री, ईमेल, फाटो और वीडियो थे । २०२५ के न्याय विभाग के एक मेमो के अनुसार, एफबीआई के पास इस मामले से जुड़ा ३०० गीगाबाइट से अधिक डेटा है । पीडि़तों की पहचान की सुरक्षा के कारण इन संवेदनशील सामग्रियों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है । यही सामग्री “एपस्टीन फÞाइल्स” के नाम से जानी जाती है ।
गिस्लेन मैक्सवेल और नए खुलासे
गिस्लेन मैक्सवेल का जन्म २५ दिसंबर १९६१ को फ्रांस में हुआ है । यह ब्रिटिश मीडिया टाइकून रॉबर्ट मैक्सवेल की बेटी है और एपस्टीन की प्रेमिका । गिस्लेन मैक्सवेल एक ब्रिटिश–अमेरिकी सोशलाइट और जेफ्री एपस्टीन से जुड़े यौन तस्करी कांड की प्रमुख आरोपी के रूप में जानी जाती हैं । अभियोजन पक्ष के अनुसार, मैक्सवेल ने जेफ्री एपस्टीन के लिए नाबालिग लड़कियों की भर्ती, उन्हें फुसलाने और यौन शोषण के लिए तैयार करने में मदद की ।
२०२१ में अमेरिका में उन पर नाबालिगों की यौन तस्करी से जुड़े कई आरोपों में मुकदमा चला । २०२२ में उसे दोषी ठहराया गया और लंबी कारावास की सजा सुनाई गई (संघीय जेल में सजÞा काट रही हैं) । हाल ही में एपस्टीन फ़ाल्स से जुड़े लगभग ३० लाख नए दस्तावेजÞ जारी किए गए हैं, जिनमें से कुछ पहले ही सार्वजनिक हो चुके थे ।
फरवरी २०२५ में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ ही हफ्तों बाद न्याय विभाग और एफबीआई ने फÞाइल्स का पहला चरण जारी किया, जिसमें उड़ान रिकॉर्ड और संपर्क सूची शामिल थीं । हालाँकि इनमें भी कई नाम छिपाए गए थे ।
बड़े नाम और विवाद
सार्वजनिक दस्तावेजÞों में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य एंड्रयू माउंटबेटन–विंडसर, माइकल जैक्सन, एलन मस्क सहित कई बड़े नाम सामने आए हैं । इन सभी ने किसी भी गÞलत गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया है । विशेषज्ञों का कहना है कि फÞाइल्स में नाम होना अपराध का प्रमाण नहीं है, लेकिन सवाल और संदेह जÞरूर पैदा करता है ।
रहस्य जो अब भी बने हुए हैं
एपस्टीन की मौत को लेकर आज भी कई सवाल अनुत्तरित हैं– उसे इतनी हल्की सजÞा क्यों मिली, क्या उसके पीछे और भी शक्तिशाली लोग थे, और इतनी सुरक्षित जेल में उसकी मौत कैसे हो गई ? आधिकारिक तौर पर मौत को आत्महत्या बताया गया, लेकिन “गंभीर अनियमितताओं” की पुष्टि के बाद दो जेल गार्डों को निलंबित किया गया और जेल प्रशासन पर सवाल उठते रहे हैं ।
इन फाइलों का सबसे अहम पक्ष पीडि़तों की गवाही है । वर्षों तक दबाई गई उनकी आवाजÞें सामने आईं और यह सवाल उठाया गया कि क्या अमीर और ताकतवर लोग कानून से ऊपर हैं । कई पीडि़तों को मुआवजÞा मिला, लेकिन नैतिक और सामाजिक न्याय की मांग आज भी कायम है ।
एपस्टीन फाइल केवल एक अपराध कथा नहीं है, बल्कि यह सत्ता, नैतिकता और न्याय व्यवस्था की परीक्षा है । यह हमें याद दिलाती है कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद हैं । साथ ही, यह भी कि पीडि़तों की बात सुनी जानी चाहिए–चाहे आरोपी कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो ।
एपस्टीन फÞाइल्स सिर्फÞ एक व्यक्ति के अपराधों की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे सत्ता, प्रभाव और गोपनीयता के उस तंत्र को उजागर करती हैं, जहाँ सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है । आने वाले समय में इन फÞाइलों से और क्या सामने आएगा, यह देखना बाकी है–लेकिन इतना तय है कि जेफ्री एपस्टीन की परछाईं अभी दुनिया से पूरी तरह नहीं छँटी है ।


