रास्वपा का संदेश—सत्ता नहीं, परिणाम है प्राथमिकता

सौजन्य: ई. दीपक कुमार साह, ललितपुर (नेपाल) — द्वारा नवनिर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय अभिमुखीकरण एवं परिचयात्मक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। “परिवर्तन का नेतृत्व, परिणाम की राजनीति” मूल नारे के साथ यह कार्यक्रम चैत्र 3 और 4 को ललितपुर में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पार्टी नेतृत्व और द्वारा संयुक्त रूप से घंटी बजाकर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनता से प्राप्त विश्वास को ठोस और परिणाममुखी उपलब्धियों में बदलना सांसदों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। डॉ. वाग्ले ने प्रभावी संसदीय अभ्यास, नीतिगत स्पष्टता और जवाबदेह नेतृत्व के जरिए जन अपेक्षाओं को पूरा करने पर जोर दिया, जबकि अर्याल ने चुनावी अनुभव साझा करते हुए जनसंपर्क को मजबूत रखने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम का संचालन सह-महामंत्री विपिन कुमार आर्चाय ने किया। दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में सांसदों को नेपाल की संवैधानिक व्यवस्था, संघीय संसद की संरचना, विधायी प्रक्रिया, संसदीय समितियों की भूमिका, बजट निर्माण, नीति विश्लेषण, सुशासन और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। पूर्व सचिवों और विषय विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्रों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान और दृष्टिकोण प्रदान किया।
विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एल्गोरिदम के लोकतंत्र, शक्ति संतुलन और सुशासन पर प्रभाव को लेकर भी प्रस्तुति दी गई। पुनः निर्वाचित सांसदों ने अपने अनुभव साझा करते हुए चुनौतियों, सीख और कार्यशैली पर प्रकाश डाला। समूह चर्चा और ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्रों के माध्यम से भविष्य की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया। साथ ही योग, ध्यान और माइंडफुलनेस अभ्यास भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।
समापन सत्र में पार्टी सभापति ने पार्टी की रणनीति, दृष्टिकोण और नीतिगत प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए सांसदों को अनुशासित, जवाबदेह और परिणाममुखी राजनीति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास को कार्य प्रदर्शन के माध्यम से साबित करना होगा और संसद के भीतर व बाहर दोनों स्तरों पर प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
लामिछाने ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जीत केवल पार्टी की नहीं बल्कि जनता की जीत है, इसलिए जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने सामाजिक न्याय को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए #मधेश और #कर्णाली के विकास को प्राथमिकता में रखने पर जोर दिया। साथ ही विपक्ष पर अनावश्यक कटाक्ष से बचने, विश्वविद्यालयों में सुधार, उद्योग-धंधों के संचालन और रोजगार सृजन को प्राथमिक एजेंडा बताया।
उन्होंने पार्टी के विधान में “राइट टू रिकॉल” लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए स्पष्ट किया कि मंत्री पद के लिए किसी प्रकार की सिफारिश या दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। योग्यता और क्षमता के आधार पर नेतृत्व चयन की बात करते हुए उन्होंने पुरानी राजनीतिक सोच को त्यागने का आह्वान किया।
इस अभिमुखीकरण कार्यक्रम से नवनिर्वाचित सांसदों को अपने दायित्वों के प्रभावी निर्वहन हेतु आवश्यक ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलने की अपेक्षा जताई गई।

