नेपालगन्ज में आन्दोलन की सरगर्मी, सुशील कोइराला गृह मन्त्री और ओली के खिलाफ नारेबाजी
विनय दीक्षित, नेपालगंज , २० अगस्त ,
अनिश्चितकालीन बन्द के क्रम में बृहस्पतिवारको नेपालगन्ज का माहोल काफी गर्म नजर आया । गाँव गाँव से प्रदर्शनकारी नेपालगन्ज पहुँचे और सरकार पर दबाव बढाने के लिए जिले में स्थापित सरकारी कार्यालयको बन्द कराया ।
आन्दोलन में स्थानीय मधेशी मोर्चा सहित थारु नेताओं की उपस्थिति पाई गई । दिन भर जगह जगह तनाव जारी रहा, सडक पर टायर और पुत्ले जलाए गए । प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला और गृह मन्त्री केपी ओली के खिलाफ नाराबाजी भी हुआ ।
आन्दोलनकारियों ने बन्द के क्रमको बढाते हुए जिला प्रशासन कार्यालय, जिला शिक्षा कार्यालय, कृषि विकास बैंक, मालपोत कार्यालय, नापी, भूमि सुधार जैसे निकायको ठप्प किया ।,
लगातार १० दिन से हो रहे आन्दोलन पर भी पुर्नविचार नहोने के कारण आन्दोलनकारी नेताओं का भी अक्रोश फूटा । बृहस्पतिवार दोपहरको आन्दोलन के क्रम में गृहमन्त्री का पुत्ला दहन किया गया ।
स्थानीय त्रिभुवन चोक, वीपी चोक, विरेन्द्र चौक और पुष्पलाल चौकपर दुकानें बन्द रहीं, अत्यावश्यक प्रेस और अस्पताल की गाडियाँ चल रही थी । सहमति के हिसाब से विद्यालय को भी आन्दोलनकारियों ने ढील दी है । बुधवार से जिले के सभी विद्यालय संचालन में पाए गए हैं ।
विद्यालय की सवारी साधन पर भी रोक नहीं लगाया गया है । अनिश्चितकालीन बन्द के क्रममें जिले से चलने वाले सभी यातायातके साधन अवरुद्ध रहे । सामान्य रुपसे कुछ मोटरसाइकल में तोडफोड की खबर है ।
संयुक्त थरुहट मधेस संघर्ष समिति प्रवक्ता पशुपति दयाल मिश्र ने बृहस्पतिवारको कमान सम्हाला । आन्दोलन के संयोजक पूर्वमन्त्री इस्तियाक राई, आन्दोलन के सहसंयोजक सदभावना पार्टी अनुशासन समिति के अध्यक्ष राम कुमार दीक्षित जैसे नेतागण मौके पर मौजूद रहे ।
संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष कमरुद्दिन राई, तमलोपा के अध्यक्ष गिरिजाप्रसाद पाठक, सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण बर्मा र तमसपा के अध्यक्ष केशवराम बर्मा जैसे लोग आन्दोलनका समकर नेतृत्व किए ।
मुख्य चार दल के बीच संघीयता के प्रादेशिक विभाजन में ६ प्रदेश का प्रस्तावका खबर बाहर आने के बाद लोग उसी के विरोध में सडक पर हैं । नेपालगन्जको प्रादेशिक राजधानी बनाने की मागको लेकर आन्दोलन गर्म होता जारहा है ।
थरुहट संयुक्त संघर्ष समिति ने सुर्खेत सहित कैलाली कञ्चनपुर से चितवन तक थरुहट प्रदेश माग रखते हुए मोर्चा के साथ आन्दोलन सुरु किया है । मधेसवादी दलों ने अवध मधेस थरुहट प्रदेश के रुपमें मध्यपश्चिम क्षेत्रको भी साथ रखनेका प्रस्ताव बढाया है । यद्यपि आन्दोलन में किसी प्रकार की अप्रिय घटना की खबर नहीं है ।
नेपालगन्ज ही राजधानी क्यों ?
संघीय प्रादेशिक राजधानी दांग और सुर्खेत कायम करने की विषयको लेकर विवाद यथावत है । लेकिन नेपालगन्ज के राजनीतिकर्मी भी कम नहीं, हिमालिनी से बातचीत के दौरान इस प्रश्न पर कुछ नेताओं प्रस्तुत किया अपना राजधानी बनाने का अटल विचार । प्रस्तुत है कुछ अंश ।

पशुपति दयाल मिश्र
केन्द्रिय सदस्य तमलोपा
पश्चिम नेपालका एक मात्र शहर है, जो सभी प्रकार के सुविधाओं से लैस है । एयरपोर्ट से लेकर भारतीय रेलका सुविधा महज ५ किलोमिटर में है । अस्पताल, होटल, उब्जनी भूमि, जिलेका समतल भूभाग, सडक, पहाडी जिलोंका केन्द्र, भौतिक संरचना, जनसंख्या, संस्कृति और पहिचान के हिसाब से अन्य जगह राजधानी कदापि मान्य नहीं की जासकती । मुस्लिम, थारु, मधेशी, पहाडी आदि समुदायका जिस हिसाब से बसोबास है, मन्दिर, मस्जिद आदिका ब्यवस्था भी उसी अनुपात में है, भौगोलिक र विकास दर के हिसाब से भी अन्य जिला के मुताबिक बाँके अव्वल है, इसे राजधानी होना ही चहिए ।

राम कुमार दीक्षित
अध्यक्ष, केन्द्रिय अनुशासन समिति, सद्भावना पार्टी,
सबसे पहली बात तो समतल भूमि है । उसके बाद शुद्ध पानी, भौतिक संरचना एयरपोर्ट, बेतहनी, खजुरा, कोहलपुर कम्दी जैसे क्षेत्रतक समतल भूभाग है । सुरु से ही ब्यापारिक केन्द्र है, पहाडी जिलो में जाने के लिए नेपालगन्ज मुख्य नाका है ।, भारत से भी मुख्य नाका जुडा हुआ है । राप्ती नदी है जिले में । सुख्खा बन्दरगाह अन्तर्राष्ट्रिय एयरपोर्ट आदिको मध्यनजर करते हुए नेपालगन्ज प्रादेशिक राजधानी के काबिल है ।
इस्तियाक राई
पूर्व मन्त्री, तथा नेता संघीय समाजबादी फोरम
चितवन से कञ्चनपुर तक यह औद्योगिक नगरी है । नेपालका ही नहीं भारतीय क्षेत्र में जानेवाले प्रमुख नाकाओं में से नेपालगन्ज भी एक है । यहाँ सभी प्रकार की सुविधाएँ, अस्पताल, सरकारी निकाय, भौतिक संरचना, आदिका ब्यवस्थापन ही इसे राजधानी बन्ने योग्य दिखा रहा है । अब कोइ अलग थलग माग करता है तो यह असोभनीय है । सम्पूर्ण हिसाब से नेपालगन्ज राजधानी कायम होना चहिए ।

लक्ष्मी नारायण बर्मा
अध्यक्ष सद्भावना पार्टी बाँके
सबसे अच्छी बात है कि जमीन है हमारे पास, यहाँ अन्य प्रकारकी प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा जोखिम नहीं है । भारतीय ब्यापार नाका है, पहाड में खाद्यान्न इसी क्षेत्र से जाता है, जिले में उर्बरा भूमि है, सिंचाई सुविधा है, जनसंख्या, विकास दर, भौतिक पूर्वाधार आदि कारण से इस जिले में राजधानी होना ही चहिए ।

