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प्रधानमंत्री बालेन शाह का सचिवों को सख्त निर्देश: “कानून दिखाकर काम मत टालिए, मंत्रियों को मत पढ़ाइए”

 

काठमांडू, 29 मार्च।
नेपाल के नए प्रधानमंत्री (बालेन शाह) ने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने के तुरंत बाद सिंहदरबार में सभी मंत्रालयों के सचिवों को बुलाकर स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सचिवों का काम सरकार के निर्णयों के अनुसार परिणाम (डिलीवरी) देना है, न कि नियम-कानून का हवाला देकर काम टालना या मंत्रियों को पढ़ाना।

शुक्रवार को हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र से तेज़ और प्रभावी कामकाज की अपेक्षा जताई। विभिन्न मंत्रालयों के तीन सचिवों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी कामकाज में “स्पीड” और “स्पिरिट” बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

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एक सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि कोई अधिकारी सरकार की गति और भावना के अनुसार काम नहीं कर सकता, तो वह पद छोड़ने का विकल्प भी चुन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में नागरिक सर्वोच्चता (Civilian Supremacy) कायम रहनी चाहिए और सरकारी तंत्र का मूल उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए।

दूसरे सचिव के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने अपने लोकप्रिय गीत का जिक्र करते हुए कहा कि वे “नेपाल को हँसता हुआ देखना चाहते हैं।” इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करने और परिणाम देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियम-कानून दिखाकर जिम्मेदारियों से बचने की प्रवृत्ति समाप्त होनी चाहिए।

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एक अन्य सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोकसेवा परीक्षा पास करके आने का अर्थ यह नहीं कि अधिकारी मंत्रियों को पढ़ाने लगें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि मंत्री कोई काम सौंपते हैं, तो यह तर्क देने के बजाय कि वह क्यों नहीं हो सकता, उसका समाधान खोजकर प्रस्तुत किया जाए।

सिंहदरबार में हुई यह बैठक काफी संक्षिप्त रही। सचिवों के अनुसार, बैठक में अधिकारियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला और प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर अपने निर्देश दिए।

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उधर, मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में सरकार ने प्रशासनिक और नीतिगत सुधार के लिए 100 बिंदुओं वाला कार्यसूची भी सार्वजनिक कर दिया है, जिसमें 7 दिन से लेकर 1000 दिन तक के विभिन्न लक्ष्य तय किए गए हैं।

यह निर्देश नई सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक ढांचे में तेज़ी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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