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सावधान ! मधेश हिंसक हुआ तो गोलिया कम पड़ जाएंगी, मधेशियों का सीना कम नहीं पड़ेगा : मुरलीमनोहर तिवारी

 

मुरलीमनोहर तिवारी (सिपु), बीरगंज, २२ सेप्टेम्बर |

sipu-2 आंदोलन का छत्तीसवा दिन। छत्तीसो शहीद हुए। छत्तीस जाल झेल कर संविधान जारी हुआ। पहाड़ी पार्टी और भारत में छत्तीस का आकड़ा पुरजोर दिखा। मधेशी जनता टकटकी लगाए आकाश देख रही है। अब क्या होगा ? कितना दिन बंद- हड़ताल करें। अंधी और बहरी सरकार को

शहीद चन्दन पटेल की उम्र दो साल थी। क्या ये दो वर्षीय बालक आतंकवादी था ? दो रास्ट्रीय पत्रिका में लिखा था की पचास लाख पाने के लोभ में चन्दन पटेल को मरवाया गया, फिर लिखा की टीकापुर में प्रहरी के बच्चे की हत्या का बदला लिया गया है। इतनी संवेदनहीनता ?
जगाने को कई धमाके हुए, पर अंतर कुछ नहीं आया। ये चक्र कैसे टुटेगा ? कौन बनेगा मधेश का तारणहार ?

शहीद चन्दन पटेल की उम्र दो साल थी। क्या ये दो वर्षीय बालक आतंकवादी था ? दो रास्ट्रीय पत्रिका में लिखा था की पचास लाख पाने के लोभ में चन्दन पटेल को मरवाया गया, फिर लिखा की टीकापुर में प्रहरी के बच्चे की हत्या का बदला लिया गया है। इतनी संवेदनहीनता ? २ गते इनकी श्रद्धाजंलि सभा में जनसागर उमड़ पड़ा। किसी के आशु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। जनसागर-जनसैलाब में बदल रहा है। ३ गते गांव-गांव से मोटरसाइकिल और साइकिल जुलुस निकला। बिना किसी योजना के लोग स्वस्फूर्त सदरमुकाम पहुचे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कर्फ्यू और दमन में गोली चली शत्रुधन पटेल शहीद हुए।

४गते को संबिधान तो जला ही, साथ ही सभासद राजकुमार गुप्ता, राधेचंद्र यादव, लालबाबू सिंह, फरमुल्लाह मंसूर के घर तोड़फोड़ और आगजनी हुई। कांग्रेस और एमाले कार्यालय में आगजनी हुई। तेज बहादुर अमात्य की प्रतिमा तोड़ी गई।
मधेशी मोर्चा के साथ जेपी गुप्ता के तराई मधेश राष्ट्रीय अभियान और मातृका यादव के माओवादी के साथ सहकार्य की सहमति हुई, जो मधेशी जनता की बहुप्रतिक्षित आकांक्षा थी। इससे आंदोलन में और ऊर्जा का संचार हुआ। ५ गते के मोर्चा के बैठक से राम कुमार शर्मा और प्रभु साह के साथ सभी मधेशी दल के एक साथ आने की खबर है। अगर ऐसा हो गया तो मधेश आंदोलन आकाश को छू लेगा।

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३ गते को एक शहादत और दर्जनों घायल होने के बावजूद हौसला कमजोर नहीं हुआ। शाम को सभी जगह अँधेरा दिखा। इसके पहले कई देशो में उजाला करते तो देखा-सुना था पर इतने बड़े और मर्यादित तरीके से नहीं देखा। ऐसा लगा गोली चलने और शहादत के कारण अब

मधेश अभी तक असीम धैर्य का परिचय दे रहा है। अभी तक मधेश में पहाड़ी समुदाय पर कोई हमला नहीं हुआ है। अगर इसी प्रकार का आंदोलन पहाड़ियों के द्वारा होता तो किसी मधेशी को बख्शा नहीं जाता। ह्रितिक रोशन कांड में ये सब दिख चूका है।
लोग सड़को पर कम दिखगेे, लेकिन अगले ही दिन और ज्यादा लोग सड़को पर उतरे। ४गते को संबिधान तो जला ही, साथ ही सभासद राजकुमार गुप्ता, राधेचंद्र यादव, लालबाबू सिंह, फरमुल्लाह मंसूर के घर तोड़फोड़ और आगजनी हुई। कांग्रेस और एमाले कार्यालय में आगजनी हुई। तेज बहादुर अमात्य की प्रतिमा तोड़ी गई।

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sipu-1नेपाल पत्रकार महासंघ पर्सा कार्यालय और कुछ पत्रकारो के घर पर भी तोड़फोड़ हुआ। कुछ् पत्रकारो की पिटाई भी हुई। ये सारी घटनाएं क्या इशारा देती है। कहने वाले कहेंगे घुसपैठ है, आंदोलन अनियंत्रित है। जब महिनो शांतिपूर्ण आंदोलन में सरकार ना सुने। हत्याए करवाएं, पत्रकार सही खबरे ना दे, उसके ऊपर जले पर नमक छिड़कते हुए दीवाली मनाएं तो क्या मार्ग शेष बचता है ? मधेश अभी तक असीम धैर्य का परिचय दे रहा है। अभी तक मधेश में पहाड़ी समुदाय पर कोई हमला नहीं हुआ है। अगर इसी प्रकार का आंदोलन पहाड़ियों के द्वारा होता तो किसी मधेशी को बख्शा नहीं जाता। ह्रितिक रोशन कांड में ये सब दिख चूका है। अब मधेश के सब्र का बांध टूटने वाला है। अगर मधेश हिंसक हो गया तो पहाड़ी समाज को बचाना सरकार के लिए नामुमकिन होगा। इसका प्रतिक्रिया काठमांडू में भी होगा तब पुरे नेपाल को कैसे रोका जायेगा ?

भारत मधेश के लिए हरसंभव सहयोग कर रहा है। भारत के राजदूत रंजीत रे का अथक प्रयाश दिखा। भारत के बिशेष दूत एस जयंत का प्रयाश और खबरदारी भी दिखा। भारत सरकार के बिभिन्न बिज्ञप्ति में मधेश चिंता और नेपाल सरकार को चेतावनी भी दिखा। भारत के बॉर्डर को पूरी तरह सील करके नेपाल में ७ गते आपूर्ति ठप्प करने की तैयारी में है। सिमा से सटे सभी अस्पतालों में आकश्मिक अवस्था से निपटने की तैयारी हो चुकी है। मधेश की स्तिथि विस्फोटक है। भारत कूटनीतिक मर्यादा का चोला उतारकर मधेश के हित में खड़ा है।

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sipu-3सरकार ये दावा कर रही है की मधेश के जनप्रतिनिधि सभासद इस संविधान के साथ है, ये आंदोलन प्रायोजित है। इसके जबाब के लिए सभासदों को मधेश प्रवेश पर रोक लगाना होगा। नेपाल सरकार के थाना, न्यायालय और किसी भी निकाय में मधेशी ना जाएं। नेपाल सरकार का पूर्णतः वहिष्कार किया जाएं। जनता इन गद्दारो के साथ नहीं है सबित करने के लिए सड़को पर उतारना होगा। इसके पहले की जनता बेकाबू हो जाए, मधेशी दल जल्द से जल्द एकजुट होकर आंदोलन के नए स्वरुप और नए कार्यक्रम बनाने चाहिए। अगर जनता के दर्द के अनुसार दवा नहीं दी गई तो दर्द नासूर बनेगा।

मधेश अभी भी अहिंसा और हिंसा से दोराहे पर खड़ा है। सरकार मधेश को हिंसक कराकर आतंकवादी का ठप्पा लगाना चाहती है। सरकार की योजना है की मधेश में हिंसा कराकर भारत प्रायोजित आतंकवाद दिखाए, मधेश को काश्मीर और तिब्बत जैसा दिखाये और विश्व जगत से सहानुभूति पाएं। हमें इससे बचना होगा। अगर मधेश हिंसक हो गया तो गोलिया कम पड़ जाएंगी पर मधेशियों का सीना कम नहीं पड़ेगा। महीनों गोलिया चलेगीं और सालों भर धुँआ उड़ेगा। इतनी गोलियां चलेगीं की गोलियो के खोखा बेच कर कई करोड़पति हो जाएंगे। अब भी अंतिम समय बचा sipu-4है नेपाल सम्भल जा, वरना सँभालने को बैशाखी भी नहीं मिलेगी। जय मधेश।।

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