नेपाल सरकार द्वारा मित्र देशों से डीएनए परीक्षण और फोरेंसिक सहायता की मांग
काठमांडू।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि देश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों को तेज़ करने के लिए सरकार ने मित्र देशों से विभिन्न प्रकार की तकनीकी सहायता का अनुरोध किया है।
शनिवार को विदेश मंत्रालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों तक राहत पहुँचाने और मृतकों की पहचान करने के लिए आधुनिक तकनीक की तत्काल आवश्यकता है।
डीएनए परीक्षण और फोरेंसिक सहायता की मांग
विदेश मंत्री ने कहा कि रसुवा सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे शव मिले हैं जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। नेपाल की मौजूदा फोरेंसिक क्षमता इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इसलिए सरकार ने मित्र देशों से:
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डीएनए परीक्षण में सहयोग,
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फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता,
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और रिपोर्टिंग क्षमता बढ़ाने का अनुरोध किया है।
40 से अधिक पुल और कई सड़कें क्षतिग्रस्त
बाढ़ और भूस्खलन के कारण 40 से अधिक पुल तथा कई सड़क संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुँचाने में गंभीर कठिनाइयाँ आ रही हैं।
विदेश मंत्री के अनुसार प्रारंभिक आकलन में:
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लगभग 15,000 निजी घरों को नुकसान पहुँचा है।
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42 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं।
हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही अंतिम आँकड़े सामने आएंगे।
विदेशी राहत दल और हेलिकॉप्टर एकीकृत कमांड के तहत
विदेशी बचाव दलों और निजी हेलिकॉप्टरों के संचालन को लेकर उठे सवालों पर मंत्री खनाल ने कहा कि सभी उड़ानों का संचालन एकीकृत कमांड प्रणाली के तहत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से विदेशी नागरिकों तथा राहत एवं बचाव टीमों को अनुमति दी जा रही है, ताकि सुरक्षा और समन्वय बनाए रखा जा सके।
भारी भार उठाने वाले ड्रोन की भी मांग
दुर्गम इलाकों में दवाइयाँ, खाद्यान्न और राहत सामग्री पहुँचाने के लिए सरकार ने भारी वजन उठाने में सक्षम हेवी-लोड लिफ्ट ड्रोन उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
मंत्री खनाल ने कहा,
“स्थल पर काम कर रही टीमों और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के आधार पर हम विशेष प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए विभिन्न विदेशी मिशनों के साथ समन्वय कर रहे हैं।”
सरकार की प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता खोज और बचाव अभियान है। इसके बाद राहत वितरण और पुनर्निर्माण का चरण शुरू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी दोहराया कि 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद प्राप्त अनुभव और संस्थागत व्यवस्था का उपयोग करते हुए सरकार प्रभावित परिवारों को आवास और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

