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मधेसी जनता राष्ट्रविरोधी या मधेस विरोधी ? मुक्तिनाथ साह

 

मुक्तिनाथ साह , जनकपुर , १२ अक्टूबर | नेपाल के शीर्षस्थ नेतागण द्वारा मधेसी जनता पर बार बार राष्ट्रविरोधी का टैग लगता आ रहा है ! इस से मधेसी जनता का मन बहुत आहत होता है क्योंकि मधेसी जनता न कभी राष्ट्रविरोधी था न कभी होगा बल्कि उन पहाडी नेता या जनता जो यह नारा लगातें हैं उनसे बढ़कर राष्ट्रभक्ति समय समय पर दिखाया है मधेशियों ने ! आज जो बिभिन्न दलों के बरिष्ठ नेता मंच से चिल्ला चिल्ला कर मधेसी जनता के विरुद्ध बिष वमन करतें हैं, मधेसी की उपेक्षा करते हैं उन सबों को मधेश और मधेसी जनता संकट की घडी मे साथ् दे कर संकट से उबारा है !

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आज के दिन मे शीर्षस्थ और बरिष्ठ कहलाने वाले नेतागण को भुत काल से वर्तमान तक यही मधेशियों ने सत्ता मे पहुचाने और प्रधान मन्त्री तक बनने मे सहयोग किया है ! फिर मधेशी कैसे राष्ट्रविरोधी हो सकता है ? वाराणसी, भारत मे जन्मे और भारत मे ही शिक्षित,प्रशिक्षित,सन्त पुर्व प्र.मन्त्री स्व ,के .पी. भट्टराई को काठमान्डू के राष्ट्रवादी जनता दो दो बार चुनाव मे हराकर शिकस्त दिया पर पर्सा जिल्ला के मधेशी ही उनको बहुमत से जीताया ! यह यदि राष्ट्र विरोधी कार्य है तो हाँ मधेशी राष्ट्र विरोधी है ! भारत के सहरसा मे जन्मे और भारत के ही पटना और वाराणसी को कर्मभूमि बनाकर राजनीति कि शुरुवात करने वाले नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता एवम पुर्व प्र.मन्त्री स्व.गिरिजा प्र.कोईराला को मोरंग और सुनसरी की मधेसी जनता द्वारा बार बार जिताना यदि राष्ट्रविरोधी कार्य था तो हाँ मधेसी राष्ट्रविरोधी है ! दुम्जा, सिन्धुली के नेपाली कांग्रेस के वर्तमान सभापति एवम निवर्तमान प्र. मन्त्रि सुशील कोईराला को बाकें के मधेसी जनता ने बार बार अपनी भोट दे कर जिताया ! यदि यह राष्ट्र विरोधी कार्य है,तो हाँ मधेसी राष्ट्रविरोधी है ! भारत के भुमि मे शरण लेकर १२ बर्ष जनयुद्ध लडे एमावोबादी के अध्यक्ष तथा पूर्ब प्र.मन्त्री प्रचण्ड को काठमान्डू के राष्ट्रवादी जनता ने शिकस्त दिया पर यही सिरहा के मधेसी जनता है जो उनको अपनी मत से शानदार तरीके से जिताया ! यह यदि राष्ट्रविरोधी कार्य है तो हाँ मधेसी राष्ट्रविरोधी है ! एमाले का बरिष्ठ नेता एवं पूर्ब प्र.मन्त्रि माधव कुमार नेपाल को रौतहट के मधेसी जनता बार बार विजयी करवाया ! यदि यह राष्ट्र विरोधी कदम था तो हा मधेशी राष्ट्रविरोधी है ! ताप्लेजुङ्ग से मधेश के झापा मे अवतरण किए एमाले अध्यक्ष एवं वर्तमान प्र.मन्त्री के .पी .ओली को झापा के मधेशियो ने यदि अपनी मत से जिताकर राष्ट्र विरोधी कार्य किया है तो हाँ मधेसी राष्ट्रविरोधी है ! इसी तरह बहुत सारे नेतागण हैं जो मधेसी जनता के भोट से विजयी हुए हैं और सत्ता मे हैं ,तो मधेसी कैसे राष्ट्रविरोधी हो गए ? इतना ही नही प्रतिबन्धित काल में यही मधेशी जनता बहुत वरिष्ठ और शीर्षस्थ नेतागण को अपने घरों मे पनाह दे कर सुरक्षा दिया था, क्या यह राष्ट्रविरोधी कदम था ? यदि हाँ,तो हाँ मधेसी राष्ट्रविरोधी है ? अभी हाल मे ही हुए संबिधान सभा के चुनाव मे मधेशी जनता ने मधेसी दल को भोट न देकर नेपाली कांग्रेस ,एमाले और एमाओवादि को भोट दे कर भारी संख्या मे जिताया ! क्या यह राष्ट्रविरोधी निर्णय था ? यदि हाँ ? तो मधेशी सच में राष्ट्रविरोधी है ! उपरोक्त यथार्थ से यह निष्कर्ष निकलता है कि मधेसी राष्ट्रविरोधी नही बल्कि मधेश विरोधी है जिसका खामियाजा बर्षों से आज के दिन तक भुगत रहा है क्योंकि मधेश ने हमेशा उनका साथ दिया जो कभी उनके थे ही नहीं । जिसपर मधेश और मधेशी जनता ने विश्वास किया उसने ही बार बार मधेश की मानसिकता पर शक किया और उसे गैरनेपाली माना । आज का माहोल इस बात का जीता जागता उदाहरण है । अगर मधेश की जनता को और उनके अधिकार की माँग को पहाड़ी वर्ग ने समझा होता तो आज मधेश जिस कठिनाई से गुजर रहा है वह नहीं होता । मधेश को राष्ट्रविरोधी कहने वाले एक बार अवश्य आत्मविश्लेषण करें कि मधेश ने कब, कहाँ और कितनी बार राष्ट्र से विरोध किया है ।

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