Mon. Apr 6th, 2020

नहला पे दहला …
लीलानाथ गौतम

माओवादी दक्षिण एशिया में ही आर्थिक क्रान्ति के नेतृत्व ले सकता है।
– चन्द्रबहादुर थापा, वाइसीएल अध्यक्ष तथा सभासद -६ जनवरी, एबीसी टेलिभिजन)
– यह तो हम लोग देख ही रहे हैं। शान्ति प्रक्रिया के बाद पिछले पाँच वर्षों में माओवादी नेतागण ने जैसा भयंकर व्यक्तिगत आर्थिक विकास किया है, ऐसी आर्थिक क्रान्तिको रोकने वाला कौन मर्द होगा –

राजतनीतिक संयन्त्र विघटन से स्पष्ट होता है कि माओवादी लोकतन्त्र संस्थागत करने के पक्ष में नहीं है।
-धर्मेन्द्र झा, पत्रकार -७ जनवरी, अन्नपर्ूण्ा पोष्ट)
– जिस संयन्त्र के द्वारा राष्ट्रिय सम्पत्ति को लूट-लूट कर नेता लोग अपनी जेब भर रहे थे, उस संयन्त्र के विघटन पर आप इतना क्यू बैखला रहे है – दाल में कुछ काला है क्या –

कविता लिख-लिख कर जगह-बेजगह सुनानेवाले कवियों को जी भरके खाना खिलाकर देश निकाला करने का मन करता है, लेकिन दोस्तों का कहना है कि खिलाने की जरुरत नहीं है। मेरा मेरा भी र्समर्थन !!!
– अनमोलमणि पौडेल, पत्रकार -८ जनवरी, फेसबुक )
– लगता है आप के दिमाग का फ्युज उड गया है ! नेतागण का भ्रष्टाचार और बढÞती महङ्गी की मार से हर आदमी आज कवि बन गया है। कहीं वे सब मिल कर आप को ही देश निकाला न कर दे !

सरकार इतिहास में ही सबसे भ्रष्ट साबित हो गई है। इसका र्समर्थन करते रहना कोई जरुरी नहीं है, इसलिए आज से र्समर्थन वापस लेते है।
– उपेन्द्र यादव, अध्यक्ष मधेशी जनअधिकार फोरम
-८ जनवरी रिपोर्टस क्लब)
– सरकार में सामिल होकर लूटने का जो सुअबसर मिलता था, वह हाथ से निकल गया, शुभलाभ न हो तो र्समर्थन काहे का !

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राजतन्त्र होना या नहीं होना कोही खास बात नहीं है लेकिन माओवादी संसदीय व्यावस्था स्वीकार नहीं करेगी। करना होता तो दस वषर्ीय जनयुद्ध ही नहीं होता।
– सीपी गजुरेल, सचिव एनेकपा माआवादी -१० जनवरी काठमाडौं के एक कार्यक्रम)
– जनयुद्धकाल में राजतन्त्र से कार्यगत एकता करने की बात बताने वाले आप लोगों को राजतन्त्र ना होन कैसे कुछ फरक नहीं पडेगा – खैर, शान्ति प्रक्रिया के बाद से अभितक माओवादीका सत्तारोहण गैरसंसदीय व्यावस्था मुताबिक हो रहा है क्या – जनता को बेबकूफ नहीं समझना चाहिए।

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राजनीतिक भ्रष्टाचार जनता के तरफ से भी होती है।
– केपीशर्मा ओली, नेता नेकपा एमाले -१० जनवरी काठमाडौं में आयोजित कार्यक्रम)
– करवानेवालों को और करनेवालों को संरक्षण देनेवाले आप नेता लोग ही तो है न – !

सभासद् होने के नाते राष्ट्र की तरफ से हम जो कुछ प्राप्त करते है, वह पडोसी राष्ट्र के जनप्रतिनिधि की तुलना में कम ही है। इसलिए हम कम सुविधाभोगी हैं, इस में कुछ विचार करना चाहिए।
– अभिषेकप्रताप साह, सभासद् मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल -११ जनवरी, कान्तिपुर दैनिक)
– नेपाली जनता बाढ, ठंड, भू-स्खलन, भूकम्प, असुरक्षा, उपचार अभाव से मर रही है। ऐसी अवस्था में आप सुविधाभोगी सभासद् लोग और अधिक सुविधा माग रहे है, शरम आनी चाहिए।

बीपी और गिरिजा के बाद मैं एक आदमी हू“, जो भारत के साथ सिधे बात कर सकता हू“।
– डा. बाबुराम भट्टर्राई, प्रधानमन्त्री -१५ जनवरी, प्रधानमन्त्री निवास वालुवाटार)
– इसी लिए तो आप बिप्पा सम्झौता करके आय है, जो पर्ूववर्ती किसी प्रधानमन्त्री ने नहीं किया था।

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सपनों में सलमान खान से सब-कुछ करती हू“। अगर डेटिङ के लिए कोही मिले तों नायक सालमान को ही पसन्द करती हू“ ।
– नायिका नीता ढुंगाना -जनवरी, अनलाइनखबर डटकम)
– सलमान उधर ही व्यस्त है। आप भुवन केसी को टर््राई कीजिए। उन्हे भी पार्टनर बदलने का शौक है।

नेचुरल युवती देखकर तो बीबी को भी भूल जाता हू“।
– अनिल शाह, कार्यकारी अधिकृत मेगा बैंक -जनवरी, अनलाइनखबर डटकम)
– बहुत ही भोली-भाली बीबी मिली हैं ! धन्य है आप की बीबी ! दूसरी किसीकी बीबी होती तो ऐसा इन्टरभ्यू देने वाले पति को टक्लु बना देती।

विकास बजट कटाएंगे तब ही पेट्रोलियम पदार्थो का मूल्य वापस घट सकता है ।
– लेखराज भट्ट, वाणिज्य तथा आपर्ूर्ति मन्त्री -२६ जनवरी काठमांडूं)
– क्या आप आयल निगमका भ्रष्टाचार हटाकर जनता को राहत नहीं दे सकते –

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