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इस विद्यार्थी को मिले थे गणित में 100 में से 110 अंक

 

एजेन्सी

नई दिल्ली। भला क्या किसी विद्यार्थी को गणित जैसे विषय में 100 में 110 नंबर मिल सकते हैं, लेकिन यह सच है। महान भारतीय वैज्ञानिक व गणितज्ञ सत्येंद्र नाथ बोस एक ऎसे ही इंसान है जिन्हें गणित विषय में मास्टर ने इतने नंबर दिए थी। बोसका जन्म 1 जनवरी, 1894 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता रेलवे में कर्मचारी थे। बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी बोस की आरंभिक शिक्षा घर के पास ही स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने हिंदू स्कूल में दाखिला लिया। हिंदू स्कूल में गणित के सुप्रसिद्ध अध्यापक उपेन्द्र बक्शी परीक्षा की कॉपियां जांचकर छात्रों को दे रहे थे। जब उन्होंने सत्येन्द्र को कॉपी दी तब कहा कि इस छात्र को सौ में से एक सौ दस अंक मिले हैं। यह आश्चर्यजनक घटना थी और परीक्षा के नियमों के विरूद्ध भी।
satendra
जब प्रश्न ही गलत है तो उसे हल कैसे किया जाए

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सत्येन्द्र ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। वहां उस समय श्री जगदीश चंद्र बोस और आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय जैसे महान शिक्षक पढ़ाया करते थे। मेघनाथ साहा और प्रशांत चंद्र महालनोविस सत्येंद्र के सहपाठी थे। मेघनाथ साहा और सत्येंद्र नाथ बोस ने बीएससी तथा एमएससी की पढ़ाई साथ-साथ की। बोस सदैव कक्षा में प्रथम और साहा द्वितीय स्थान पर रहते थे। जब वे एमएससी में पढ़ रहे थे तब गणित के प्रश्नपत्र में एक सवाल को किसी विद्यार्थी ने हल नहीं किया। यह देखकर कॉलेज के कुलपति व गणित के महाविद्वान प्रो. आशुतोष ने नाराजगी जाहिर करते हुए शिक्षकों व छात्रों से कहा कि “आप लोग क्या पढ़ाते हैं और ये छात्र क्या पढ़ते हैं, मेरी समझ में नहीं आता। इस बार गणित के पेपर में मैंने एक सवाल दिया जिसे कोई हल नहीं कर पाया। बड़ी शर्म की बात है।” आशुतोष की बात काटने का साहस किसी में नहीं था। सिर झुकाए सभी ने चुपचाप उनकी बात सुनी लेकिन जवाब सिर्फ बोस ने दिया- “सर! जब प्रश्न ही गलत हो तो उसे हल कैसे किया जाए।”

गलत सिद्ध कर दिखाया प्रश्न
बोस के यह कहते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। प्रो. आशुतोष ने पूछा- तुम कैसे कह सकते हो कि वह प्रश्न गलत था? सत्येंद्र ने उनके सामने ही प्रश्न को गलत सिद्ध कर दिखाया। इसके बाद प्रो. आशुतोष ने बोस की पीठ थपथपाई और तारीफ की। बोस 1915 में गणित में एमएससी परीक्षा के टॉपर रहे। उनकी प्रतिभा से खुश होकर आशुतोष ने उन्हें कोलकाता यूनिवर्सिटी का प्राध्यापक नियुक्त कर दिया।

 

स्रोत:patrika.com,punjabkeshari

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