महापर्व छठ बिहार, मधेश के आलावा अब झारखण्ड,उत्तर प्रदेश तथा पहाड़ी जिलो में भी
माला मिश्रा, बिराटनगर, ५ नवम्बर | कल तक बिहार तथा नेपाल के तराई इलाको में मनाए जानेवाला सूर्य उपासना का महापर्व छठ अब बिहार की परिधि से सटे झारखण्ड ,पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल के पहाड़ी जिलो में भी श्रद्धा भक्ति उत्साह धूम से मानाने लगा है । इतना ही नही बिहार और नेपाल के तराई वासी बिदेश के जिन जिन कोने तक ब्यापार ,रोजगार, नौकरी के लिए पहुचे है उहा उहा अपनी संस्कृति बिरासत जैसे इंग्लॅण्ड,ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका वहां छठ का दृश्य दीखता है ।
अब तो इस पर्व में आस्था जताते हुए छठी मैया का पूजा में पहाड़ी व कुछेक मुस्लिम महिला को भी देखा जा रहा है। यह पर्व पीढ़ी दर पीढ़ी अपना पहचान बनाने में सफल हो रहा है । युवा,महिला, बच्चे, बृद्ध सभी में पर्व को ले गजब उत्साह दिखते बनता है । महानगर दिल्ली ,मुम्बई,कलकता,काठमांडू, के तलाब ,पोखर,नदी में छठी मैया का अर्ध्य दिया जा रहा है ।हालाकि कुछ जगहों लोग अपने सुबिधा अनुसार अपार्टमेंट ,छत, आँगन में गड्ढा बनाकर छठी मैया को अर्ध्य दे रहे है । प्रकाश पर्व दीपावली के छट्ठे दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल पक्छ षष्टि को मनाये जाने वाले यह पर्व ही है जो जातीय बंधन को कुछ ही दिनों के लिए सही ढीला करता है । ऊच नीच छोटा बड़ा भेदभाव भुलाकर एक दूसरे को सहयोग करते है । यह इलाका जातियों में बांटा है जिसमे आपसी संबाद कायम करता है। गीतों में भी छोटे जाति डोमिन ,मलिन जैसे जातियों का महत्ता को रेखांकित करता है ।
प्रकृति से निरंतर दूर होते जा रहे हमारे युवाओ को बांस की बहँगी, केला का घोर, बांस का सूप, हल्दी के पौधे , चना मुंग के ओकरी ,आर्तक का पत्ता, बध्धी, चावल,गेहू,कद्दू, अदरख, नारियल, निम्बू,ईख, मिटटी का बना हाथी, गुड का बना ठेकुआ, भूषवा, पान ,मखान, दिप का बिशेषता से अवगत कराता है । समाज और प्रकृति के प्रति भाव का बोध का परिचय करता है। इस पर्व का बिशेषता सामूहिकता भी है । जिंदगी के भाग दौड़ के बीच यह त्यौहार है जिसमे सबलोग अपना पैतृक गाउ पहुचते है। मिलते जुलते है। सब एगनुत हो छठि मैया का आराधना करते है। छठ के सम्बन्ध में इस तथ्य से सभी वाकिफ है कि यह जन्मन्य द्धारा अपने रिति रिवाजो से रची गयी उपासना पद्धत्ति है । इसके केंद्र में धर्मग्रंथ नहीं ,बल्कि किसान व ग्रामीण जीवन है । यह संभवतः एकलौता पर्व है,जिसमे पुरोहित का आवश्य्कता नहीं होता । ईश्वर और भक्त के बीच कोई दूसरा नहीं होता । सूर्य देवता के रूप में सामने होते है और लोग उनको अर्ध्य देते है ।

