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छठ पूजा शक्ति का देवता सूर्य साधना का श्रेष्ठतम पर्व है : श्वेता दीप्ति

 

suryopasna

श्वेता दीप्ति, काठमांडू ,६ नवम्बर |

कार्तिक मास शुक्ल षष्ठी को सूर्य साधना का महा पर्व छठ पूजा मनाने की परंपरा सादियों से चली आ रही है । छठ पूजा सूर्य साधना का श्रेष्ठतम पर्व है । ऋग्वेद के सूर्य सूक्त में कहा गया है _येना पावक चख्छसा भुरण्यंतम जनां अनु । त्वम वरुण पश्यशि । अर्थात जिस दृष्टि यानि प्रकाश से आप(सूर्य)प्राणियों को धारण पोषण करने वाले इस लोक को प्रकाशित करते है, हम उस प्रकाश की स्तुति करते है ।

त्रेता युग में रामराज्य की स्थापना के साथ छठ पूजा का प्रारंभ हुआ , इसका उल्लेख प्राचीन धर्म ग्रंथों में पाया जाता है । एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवन राम और सीता ने व्रत रखकर सूर्य की आराधना की थी और सप्तमी को इसका निस्तार किया था । इस व्रत की चर्चा विष्णुपुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, देवी पुराण आदि ग्रंथो में विस्तार से की गई है । मध्यकाल से छठ पूजा व्यवस्थित रूप से प्रचलन में आई । द्वापर युग के महाभारत काल में कर्ण ने सूर्य की पूजा की और महान योद्धा बने । तभी से अर्ध्यदान की परंपरा प्रारम्भ हुई । इसी काल में द्रोपदी ने यह पूजा की थी । एक अन्य कथा भी प्रचलित है । प्राचीन काल में एक राजा थे, प्रियंवद । वो निःसंतान थे । महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्ठि यज्ञ किया और यज्ञाहुति के लिए तैयार खीर राजा की पत्नी मालिनी को दिया ।जिसके सेवन के बाद पुत्र प्राप्ति हुई, किंतु वह मृत था । राजा उसे लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने की चेष्टा की । उसी समय भगवान् की मानस कन्या देवसेना प्रगट हुई और राजा को सूर्य उपासना के लिये प्रेरित किया । राजा ने षष्ठी का व्रत किया और उसे पुत्र प्राप्ति हई ।

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अस्त और उदय होते सूर्य की आराधना की परंपरा नेपाल और भारत के साथ ही हर उस जगह प्रचलित हो गई है जहाँ हिन्दू रहते है । सूर्य को शक्ति का देवता माना जाता है और इनकी आराधना महत्वपूर्ण है ।

आप सबोंको छठ पर्व के अवसर पर हार्दिक शुभकामना 

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