चीन ने ‘वान बेल्ट वान रोड’अवधारणा के बारे में नेपाल सरकार की धारणा मांगी
चीन का ‘वान बेल्ट वान रोड’ अवधारणा के बारे में नेपाल सरकार की ठोस धारणा समझने के लिए चीन का एक सरकारी प्रतिनिधी मण्डल नेपाल भ्रमण में आया हुआ है ।
चीन ने चीन और एसिया, युरोप और अफ्रिका के बीच सडक पूर्वाधार, रेलमार्ग और समुद्री पूर्वाधार के विकास से आर्थिक प्रगति हासिल करने का मुख्य लक्ष्य सहित उक्त अवधारणा के बारे में नेपाल सरकार की धारणा मांग की है।
चिनियाँ राष्ट्रपति सि जिनपिङ् ने सन् २०१३ में इस अवधारणा के अन्तर्गत ‘सिल्क रोड इकोनोमिक बेल्ट’ और ‘२१वीं शताब्दी का सामुद्रिक सिल्क रोड’ कर के दो भाग किए हैं । सिल्क रोड इकोनोमिक बेल्ट में सहभागिता जनाने की सहमति नेपाल जाहिर कर चुका है । नेपाल ने चीन के सिल्क रोड अवधारणा में सहभागि होने के लिए दो बर्ष पहले इस संबन्ध में चीन के साथ एक सझदारी पत्र में हस्ताक्षर किया था ।
पूर्व प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में चीन की इस अवधारणा में सक्रिय सहभागि होने की प्रतिबद्दता नेपाल सरकार ने जाहिर किया था । किन्तु वर्तमान सरकार इस अवधारणा के प्रति सकारात्मक नहीं हैं ऐसी बात कूटनीतिज्ञ समझ रहे हैं । इस अवधारणा के प्रति नेपाल ने स्पष्ट जवाब नहीं देने के कारण चिनियाँ राष्ट्रपति सि जिन पिङ् का गत असोज अन्तिम हप्ता में होने वाला नेपाल भ्रमण रद्द होने की जानकारी स्रोत के अनुसार है ।
नेपाल भ्रमण में आए चिनियाँ प्रतिनिधीमण्डल ने वाणिज्यमन्त्री रोमी गौचन थकाली के साथ भेटवार्ता कर चिनियाँ राष्ट्रपति सि जिन पिङ् की अग्रसरता में शुरु हुए उक्त अवधारणा से नेपाल लगायत इस क्षेत्र के सभी देश लाभ ले सकने, प्रतिनिधीमण्डल ने वान रोड वान बेल्ट अवधारणा से समग्र क्षेत्र की कनेक्टिभिटी बढाने तथा चीन और नेपाल लगायत सार्क मुलुकों के बीच आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान पहुँचने की बात कही थी । भेंट में वाणिज्यमन्त्री थकाली ने नेपाल और चीन सदियौँ से घनिष्ट मित्र के रुप में रहने की और एक दूसरे की भलाई और हित होने वाले कार्य में सहयोग देने की बात कही । वाणिज्य मंत्रालय की पे्रसविज्ञप्ति में कहा गया है ।
भेट में मन्त्री थकाली ने वान रोड वान बेल्ट अवधारणा की उच्च सराहना की थी । उन्होंने कहा कि ‘इस अवधारणा से इस क्षेत्र के सभी पडोसीदेशों के साथ सुदृढ और सबल कनेक्टिभिटी कायम होने से नेपाल के आर्थिक विकास मे यह महत्वपूर्ण योगदान देगा यह विश्वास है ।


