Wed. Aug 19th, 2026
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दलाई लामा को लेकर भारत और चीन के बीच बयान्वाजी तीखी 

 
  हिमालिनी डेस्क,भारत  
तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के अरुणाचल दौरे को लेकर भारत और चीन के बीच बयानबाजी तीखी हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया ने गुरुवार को भारत को घुड़की दी कि चीन कश्मीर मसले पर दखल दे सकता है। ग्लोबल टाइम्‍स में छपे एक लेख में बडे़ ही अहम के साथ आश्चर्य जताया गया है कि आर्थिक, सैन्य और कुटनीति तौर पर मजबूत चीन के विरोध को क्या भारत झेल सकेगा।
  लेख में आगे लिखा गया है कि भारत से चीन की जीडीपी कई गुना अधिक है, हिंद महासागर तक पहुंचने की सैन्य क्षमता है, भारत के पड़ोसी देशों से हमारे अच्छे संबंध हैं, ऐसे में अगर चीन भारत के साथ भूराजनैतिक खेल में शामिल हो जाए तो क्या चीन भारत से मात खा जाएगा? इससे पहले चीन ने बुधवार को जहां नई दिल्ली पर दलाई लामा को अरुणाचल दौरे की अनुमति देकर भारत-चीन संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था, वहीं भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि दलाई लामा की यात्रा एक धार्मिक यात्रा है। इसे राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए।
  चीन ने बुधवार को बीजिंग में भारतीय राजदूत विक्रम गोखले को तलब कर दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ‘सीमा के पूर्वी हिस्से को लेकर चीन का रुख बिल्कुल स्पष्ट और स्थिर है। नई दिल्ली ने बीजिंग की चिंताओं को दरकिनार कर दलाई लामा को भारत-चीन सीमा के विवादित पूर्वी हिस्से का दौरा करने की इजाजत देकर न सिर्फ चीनी हितों, बल्कि भारत-चीन संबंधों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है।’
    प्रवक्ता हुवा ने  कहा कि दलाई लामा का अरुणाचल दौरा निश्चित तौर पर चीन के असंतोष को हवा देगा। इससे भारत को कोई भी फायदा नहीं होने वाला है। चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और कानूनी अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए मजबूती से सभी जरूरी कदम उठाएगा। दूसरी ओर, नई दिल्ली ने चीन के सभी आरोपों को खारिज करते हुए दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दी। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, ‘हम साफतौर पर कह चुके हैं कि दलाई लामा एक सम्मानित धर्म गुरु हैं। वह पूर्व में कई बार अरुणाचल का दौरा कर चुके हैं। हम यह अपील भी कर चुके हैं कि भारत में उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को राजनीतिक रंग न दिया जाए और न ही उसे लेकर कोई कृत्रिम विवाद पैदा किया जाए।’

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