प्रमुख की दावेदारी को लेकर उपेन्द्र और भट्टराई में मिलापत्र नही हुई
काठमांडू | नयाँशक्ति पार्टी और संघीय समाजवादी पार्टी के बीच बहुचर्चित एकिकरण सम्बन्धित मिलापत्र का मामला अब खटाई में पड़ गई है | दोनों पार्टी में प्रमुख पद की दावेदारी को लेकर यह मिलापत्र नही हो सका |
इस सम्बन्ध में नयाँशक्ति पार्टी और फोरम के नेता आइतबार को बाबुराम भट्टराई के निवास पार्टी एकता एकता के लिए बातचीत की थी | जानकारी अनुसार फोरम के नेता एकीकृत पार्टी के नाम में ‘संघीय समाजवादी फोरम’ ये तीनो नाम छोड़ने को तैयार नही दिखें | और इस नाम में नयाँशक्ति भी जोड़ने पर नाम बहुत लम्बा हो जाता है ।
इसीक्रम में बाबुराम पक्ष द्वारा शुरू में ‘नयाँ समाजवादी फोरम’ नाम रखकर एकता प्रस्ताव आगे बढाया था ।लेकिन उपेन्द्र पक्ष इसको मानने को तैयार नही हुये | नयाँ शक्ति के नेता के अनुसार पदाधिकारी कितना रखा जाय इसपर भी मतभेद हो गयी | उपेन्द्र पक्ष द्वारा फिलहाल सभी को समेटकर जम्बो पदाधिकारी बनाने का प्रस्ताव रखा गया | भट्टराईपक्ष ने इसपर आपत्ति जनाते हए कहा कि तबतो यह माओवादी केन्द्र जैसा भद्रगोल हो जायेगा |
एकता के बाद पार्टी का मुख्य नेता किसको बने जाय और अधिकार का बंटबारा दोनों पार्टी के वीच कैसे हो इस पर भी बात नही मिली |
यदपि नेतृत्व के सवाल पर बाबुराम भट्टराई लचकदार जरुर थे वे उपेन्द्र यादव को नेता मानने को तैयार दिखें लेकिन नयाँशक्ति के अन्य नेताओं ने उपेन्द्रजी के ‘हाइट’ को लेकर अपनी असहमति जनाई ।
नयाँशक्ति श्रोत अनुसार उपेन्द्र को अध्यक्ष और बाबुराम को संयोजक मानने को नयाँशक्ति पक्ष की स्वीकारोक्ति थी लेकिन उपेन्द्र यादव द्वारा कार्यकारी अधिकार अपने में सिमित पर जोड देने से सहमति सहमति नही हो पाई ।
स्रोत के अनुसार बाबुराम बहुत ही लचकदार होकर एकता का प्रयास किये थे । लेकिन उपेन्द्र यादव के कठोरपन के कारण डा. भट्टराई का प्रयास असफलहो गया । नयाँशक्ति श्रोत अनुसार नयाँशक्ति पार्टी अंदर भी अधिकांश नेता पार्टी एकता के विपक्ष में ही थे ।एकता वार्ता के बाद नयाँ शक्ति के नेता ने कहा कि उपेन्द्रजी में दो नम्बर प्रदेश से उपर उठकर पूरा देश के लिए सोचने का दृष्टिकोण नही मिला।
इधर फोरम का नेता ने आरोप लगाया है कि नयाँ शक्ति के संयोजक भट्टराई इससे पहले हुई सहमति से पीछे हट गये हैं । नयाँ शक्ति के नेता एकता के बाद कार्यकारी अधिकार सहित ‘फस्ट मेन’ को दाबी करने लगे ।
एक अटकलबाजी यह भी लगाई जा रही है कि आइतबार को ही माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ने पार्टी छोडकर गये मोहन वैद्य, नेत्रविक्रम चन्द, भट्टराई सहित सभी पुराने नेताओं को वापस आने का आह्वान भी किया है | हो सकता है कि हो सकता है कि भट्टराई इस कारण से भी फोरम के साथ एकता से पीछे हट गयें हों । ‘आइतबार से परिस्थिति कुछ बिगड़ गयी है । माओवादी केन्द्र का निर्णय बाहर आने के बाद ऐसा हुआ है यह फोरम नेपाल के एक शीर्ष नेता का कहना है ।
फोरम नेपाल के प्रमुख सचेतक शिवजी यादव के अनुसार एकीकृत पार्टी के अध्यक्ष में उपेन्द्र यादव और सर्वोच्च नेता या वरिष्ठ नेता में भट्टराई के नाम पर सहमति हो चुकी थी | लेकिन आइतबार को भटट्टराई इससे पीछे हट गये । ‘शनिबार तक एकीकृत पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव और सर्वोच्च नेता या वरिष्ठ नेता भट्टराई पर सहमती हुई थी। हम भी यही चाहते हैं ।


