शुभकामना
आँखों की ग्रन्थियों से बहते हैं आँसू
निकल कर साफ करते है आँसू
कभी सोचा है, क्यों बहते हैं आसू –
निकल कर आँखों से चुपचाप
बहती क्यों ये गंगा अनजान -र्
मर्म को छूती घटनाएँ
दिल को तोडÞती घटनाएँ
मानसिक क्लेश पहुँचाती घटनाएँ
प्रेम को बिखेरती घटनाएँ
खुशी से मन गद्गद् करती घटनाएँ
भक्त की अन्तर पुकार करती घटनाएँ
आँखों से ये सब बहाती है आँसू !
कभी सोचा हैं, बहकर क्या करते है आँसू –
दुःखों को क्षणों में भुलाते हैं आँसू
गल्तियों को पाश्चात्ताप से धुलते हैं आँसू
कृतज्ञता को ज्ञापित करते हैं, आँसू,
मन को कलुषित विचारों से मुक्त करते है आँसू
भगवान की भक्ति देते है आँसू
कभी सोचा है, क्या सबकी आँखों से झडÞते है आँसू –
पाषाणवत् दूसरों के दुःख से जो नहीं दुखी होते
दूसरों को शोषण में जो नहीं चुकते
जो भगवान की भक्ति नहीं करते
उनकी आँखों से कभी नहीं गिरते आँसू।
कभी सोचा है, किनके सहज भाव से गिरते हैं आँसू –
जिनका हृदय है निर्मल,
जो दुःख को करते हैं याद
जिनकी भगवान में है श्रद्धा
जो है सदा संवेदनशील
लाचारी का जिन्हें है ज्ञान
सहायक नहीं बनने पर तडÞपता है जिनका मन
इनकी आँखों से सहज रुप में बहते हैं आँसू।
शुभकामना
आओ झूमे गाएँ मनाएँ नयाँ साल
एक दूसरे को देके शुभकामना उपहार
आओ रे˜˜ झूम के गाएँ हम मिल के
कितने वर्षों बैठ के हम ने
एक साथ गुजारे हैं।
प्यार मोहब्बत के मंजिल को एक पे एक बढÞाए है
रखेंगे सम्हाले करेगें इसका ख्याल
आओ कर ले वादा हम लेके हाथ में हाथ
फूल अनेक बगीचों से डाली में भर के आए हैं
प्यार मोहबत के धागे से हम ने इसे पिरोया है
टूटे ना ये धागा, बिखरे ना ये फूल
कभी न करेगें हम, ऐसी कोई भूल
लिखेंगे इस फूल से ऐसा हम नेपाल
रहे कभी न किसी में कोई भेद भाव
कोई पहाडÞ के बासी है, कोई है हिमाली
एक आपस में मिल के रहते,
हम है मिथिलाबासी,
आओ रे झूम के गाएं हम मिल के
करते हैं स्वागत आप का
हम हमारे महफिल में
अवसर है, नव वर्षका देते हुए शुभकामना
शुभकामना नव वर्षका है आप को शुभकामना
है सौभाग्य हमारा जो आप पधारे महफिल में,
बढÞ गयी शोभा कितनी है,
आप जो आए महफिल में
शुभकामना नव वर्षका, है आप को शुभकामना
फूल नहीं कोई ऐसा जो
भेट चढÞाएँ आप को
कर रहे हैं, स्वागत हम सब
शब्द पुष्प से आप को
शुभ कामना नव वर्षका है आप को शुभकामना
लाई है खुशियाँ ढेÞर सारी
नयाँ साल सब के लिए !
हो मुबारक सारी खुशियाँ
नये साल में आप को !
राजविराज-९, सप्तरी


