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Madhesh Update 3 आज क्या हुआ ? by Brikhesh chandra lal

 

कल्ह से ही कांँग्रेस, एमाले और माओवादी एकजूट होकर मधेशी मोर्चापर कथित ११ प्रदेश के प्रस्ताव पर सहमति करने के लिए दबाब डाल रहे हैं । आज के बैठक में मधेशी मोर्चा के तरफ से महन्थ ठाकुर, बिजय गछदार और महेन्द्र यादव; कांग्रेस से सुशील कोईराला, शेरबहादुर, प्रकाशमान, कृष्ण सिटौला, मिनेन्द्र रिजाल और बिमलेन्द्र निधि; एमाले से झलनाथ, माधव नेपाल और बामदेव गौतम तथा माओवादी से प्रचण्ड, बाबुराम, नारायणकाजी थे ।
कांँग्रेस, एमाले और माओवादी ने कथित ११ प्रदेशका प्रस्ताव रखा । उनका संयुक्त रुपसे कहना था —

१. झापा, मोरंग और सुनसरी पहाडी प्रदेश में होगा ।
२. सप्तरी से पर्सा तक एक प्रदेश होगा ।
३. चितवन पहाडी प्रदेश में रहेगा ।
४. नवलपरासी से बर्दिया तक का एक प्रदेश होगा ।
५. कैलाली और कंचनपुर पहाडी प्रदेश में ही रहेगा ।
प्रदेशसभा अपना नाम स्वयं तय करेगी ।

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मधेशी मोर्चाका कहना था — मधेश का कोई भी हिस्सा पहाडी प्रदेश में नहीं रहेगा । और पहाड के आदिवासी जनजातिओं का पहचान का भी ख्याल किया जाय । अभी निर्णय न करके बाद में High level commission से निर्णय के भीतर के प्रस्ताव में भी षडयन्त्र है । हम इसे कतई मानने को तैयार नहीं हैं ।
मधेशीओं ने अपना stance रखा, असहमति व्यक्त किया और वार्ता से बाहर हो गये ।

आज तमलोपा के संसदीय दल के कक्ष में माओवादी के असंतुष्ट समूह (सभासद् संख्या लगभग ६० के आसपास) के नेता किरण वैद्य, रामबहादुर बादल, पम्फा भुसाल सहित सभासदों के एक समूह ने मोर्चा के नेताओं से वार्ता की और मधेशी मोर्चा के stance का सराहना किया तथा सहयोग और समर्थन का वादा किया ।

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आदिवासी जनजाति के तथा अन्य समूह के नेता पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, अशोक राई, रामचन्द्र झा, राजेन्द्र राई सहित के प्रतिनिधिमण्डल ने भी मोर्चा के नेताओं से बातचीत की । आगे का रणनीति तय किया और साथ चलने का संकल्प लिया ।

सम्भवतः कल्ह सभी पार्टीयों से आदिवासी जनजाति और मधेशी, दलित, मुस्लिम सभासदों का Inter Party Alliance का निर्माण किया जाएगा और Inter Party Alliance तथा मधेशी मोर्चा के बीच सहकार्य का घोषणा होगा ।

आज विविाद समाधान उपसमिति में भी चार दलों के नेतागण तथा मोर्चा के प्रतिनिधि लक्ष्मण लाल कर्ण के बीच नोंकझोंक हुई । उपसमिति ने एक कार्यदल बनाई है जिसमे मोर्चा सहभागी नहीं है ।

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कांँग्रेस, एमाले और माओवादी जर्बदस्ती करने पर तुली हुई है । सम्भवतः इसका परिणाम खराब होगा ।

जानकार लोगों का कहना है, कांँग्रेस, एमाले और माओवादी का सहमति संविधान निर्माण हेतु नहीं विवाद बढाकर संविधानसभा का अवधि बढाना भर है और इसी रणनीत के तहत एकपक्षीय प्रस्ताव लाया गया है ।

संयुक्त लोकतान्त्रिक मोर्चाद्वारा जारी आजका विज्ञप्ति —

मितिः–२०६९÷२÷२

प्रेस–विज्ञप्ति
राज्यको पुनःसंरचनाको सन्दर्भमा पहिचानको सवाललाई बिल्कुलै नकारेर तीन दलबाट ल्याइएको कथित ११ प्रदेशको प्रस्तावसंग संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा पूर्णतः असहमत रहेको स्पष्ट गर्दै पहिचानको आधारमा राज्य पुनःसंरचनाको लागि सम्पूर्ण मधेशी, थारु, आदिवासी जनजाति, दलित, मुस्लिम समुदाय लगायत संघीयता पक्षधर सम्पूर्ण पक्षहरुलाई एकजूट हुन आह्वान गर्दछ ।

धन्यवाद ।

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