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नेपाल में मानव संशाधन पर संकट

 

भाद्र १६ । मानावाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा १९४८ के अनुच्छेद २३ [१ ] के अनुसार ` प्रत्येक व्यक्ति को काम करने ,अपनी इच्छा से अपना रोजगार चुनने ,काम करने की उचित और अनुकूल परिस्थितियाँ पाने और बेरोजगारी के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार है । इस प्रकार स्पष्ट है कि १९४८ की उक्त घोषणा में काम के अधिकार को विस्तृत अर्थ में शामिल किया गया है । पिछले कई वर्षों से नेपाल के अधिकांश युवा ,युवतियाँ रोजगार के लिए खाडी मुल्क जाते हैं । लेकिन जानकारी की कमी ,उचित काम ,कम वेतन आदि के कारण नेपाली कामदार शोषण में पड जाते हैं। कुछ दिन पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध और मामलों की नेपाली व्यवस्थापिका संसद की उपसमिति की ताजा रिपोर्ट में मानव तस्करी रोकने के मामले में सरकार के उपायों को पूरी तरह विफल बताते हुए तस्वीर को अत्यन्त निराशाजनक बताया गया है । साउदी अरब ,कतर ,कुबेत और संयुक्त अरब अमीरात में किए गए जमीनी सर्वेक्षण के आधार पर प्रस्तुत यह रिपोर्ट बताती है कि सरकार अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने में किस तरह विफल सावित हुई है ।

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रिपोर्ट यह खुलासा भी करती है कि देशों में तैनात नेपाली मिशन की उन रिपोर्टों की लगातार अनदेखी की ,जिनमें दर्जनों कम्पनियाँ और लोगों द्वारा बडे पैमाने पर मानव तस्करी के महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए थे ।अनदेखी का आलम यह रहा कि इन रिपोर्टों को गृह मन्त्रालय तक को अग्रसारित नहीं किया गया कि इसमें शामिल तत्वों पर कुछ कार्रवाई शुरू हो पाती। इसमें देश की एक हजार महिलाओं से बातचीत के आधार पर खाडी देशों में फंसे लाखों नेपाली नागरिकों की दास्तान बताती है कि किस तरह इनसे विना अवकाश काम कराया जाता है और पूरा वेतन तक नहीं दिया जाता । ये शारीरिक ,मानसिक ही नहीं ,यौन शोषण के भी शिकार हैं ।इतना सब होने के बावजूद सरकार को ऐसे प्रताडित अपने नागरिकों की सही -सही स्थिति और संख्या तक अन्दाजा नहीं ।
समिति की रिपोर्ट देश की उस महत्वाकांक्षी विदेश नीति योजना के लोकार्पण अवसर पर जारी की गई ,जिसका मकसद विश्व में नेपाल के अन्तर्राष्ट्रीय कद को बढ़ा हुआ देखना है । प्रवासी नेपालियों के शोषण की बात पहली बार सामने आने पर तैयारी की गई इस योजना का एक मकसद विदेश में नेपालियों के हितों की रक्षा के बारे में मी कदम सुझाना भी था। सच यह है कि प्रवासी नेपालियों के खाडी में काम करने पर प्रतिबन्ध इस समस्या का समाधान नहीं है ,बल्कि उनकी सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए कई अन्य विकल्प मौजूद हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए । बेहतर होगा कि सरकार अपने स्तर पर यह देखे कि उनके हित विदेश में भी कैसे सुरक्षित रह सकते हैं ?
सीमा विश्वकर्मा

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सीमा विश्वकर्मा

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