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राष्ट्रपति सहमति सरकार नही बुला सकते ?

 

कांग्रेस और एमाले ने राष्ट्रपति पर प्रधानमन्त्री को र्वखास्त तथा राष्ट्रीय सहमति सरकार बनाने के लिए अपनी ओर से जेहाद छेर रखा है । इन लोगों की बात मानते हुये राष्ट्रपति ने अपने यहाँ से जारी विज्ञप्ति मे र्वत्तमान प्रधानमन्त्री को काम चलाउ करार दिया। अब राष्ट्रीय सहमति सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति को कोइ संवैधानिक आधार नही मिल रहा है । तथा राष्ट्रपति र्कायालय ने यह स्पस्ट कर दिया है कि यह काम विशुद्ध रुप से राजनैतिक है । राष्ट्रपति को राजनैतिक और संवैधानिक कोइ अधिकार नही है जिससे की प्रधानमन्त्री पर दवाब डाला जा सके । यह वात राष्ट्रपति के सल्लाहकार राजेन्द्र दहाल ने बतायी । दहाल ने कहा कि राष्ट्रपति न तो प्रधानमन्त्री को और ना ही राजनैतिक पार्टी को ही राष्ट्रीय सहमति सरकार के लिये बुला सकतें हैं । यह काम प्रधानमन्त्री का है कि वे कैसे सहमतिका सरकार बनाते हैं।

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रविवार की रात को जब प्रधानमन्त्री ने चुनाव का सिफारिस किया उस दिन से ही प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच तनाव एवं मनमुटाउ की स्थिति बनी हुइ थी जिसका अन्त राष्ट्रपति ने प्रधानमन्त्री को कामचलाउ घोषित करके कुछ दिन के लिए विबाद से हलग रहने की कोशिस किया है । इस काम चलाउ सरकार का दो अर्थ लगाये जाते है । एक समुह व्दारा इसे वाबुराम भट्टराइ सरकार की निरन्तरता माना जा रहा है तो वहीँ दुसरी समुह व्दारा इसे बाबुराम भट्टराइ केअधिकार मै कटौती कहा जा रहा है । लेकिन रष्ट्रपति अभी भी कानुनी विशेसज्ञ से राय सल्लाह लेने मे तल्लिन हैं । वह दिन दुर नही है जब  की किसी भी समय अपनी मातृपर्टी को खुश करने के लिये राष्ट्रपति कुछ भी निर्णय की घोषणा कर सकतें हैं ।

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