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कोई गम नहीं है मुझको जो तू मुझे मिला नहीं : डा. श्वेता दीप्ति (विश्व हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गजल)

 
माना कि चाहतों का दिया तुमने सिला नहीं
कोई गम नहीं है मुझको जो तू मुझे मिला नहीं ।
सच है कि जिंदगी, तुम तक पहुँच ना पाई
है हसरतों को आज भी तुमसे गिला नहीं ।
जिस रोज तुमने दामन मुझसे छुडा लिया
उस रोज दिल ने जाना तू है मेरा नहीं ।
रौशन करेंगी तेरी राहों को मेरी आहें
जाओ जहाँ भी तुम, मैं तुमसे जुदा नहीं ।
है जिंदगी अधूरी तेरे बगैर मेरी
दिल में खलिश है लेकिन कोई बद्दुआ नहीं ।
अब आरजू नहीं है दिल में कोई मेरे
मेरी ख्वाहिशों का तुमसे कोई वास्ता नहीं ।

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