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‘सेक्‍युलरवाद’ को सत्ता की राजनीति का हथियार बना लेना, सुविधा की राजनीति के अलावा और कुछ नहीं है।

 

मोदी के पीएम बनने पर नीतीश को चिढ़ क्यों?

देश के प्रधानमंत्री की सेक्युलर पहचान होने संबंधी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान के बाद आरएसएस ने मोदी के पक्ष में बैटिंग करनी शुरू कर दी है। आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य में सेक्युलर प्रधानमंत्री के मुद्दे पर राजनीति करने वालों पर करारा हमला किया गया है। प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दावेदारी पर एक तरह से मुहर लगाते हुए आरएसएस ने कहा है कि अगर देश में बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों की चिंता करने वाला प्रधानमंत्री बनता है, तो इससे किसी को चिढ़ नहीं होनी चाहिए। पांचजन्य में छपे संपादकीय में नीतीश पर निशाना साधते हुए सवाल किया गया है कि जब संविधान निर्माताओं ने ही प्रधानमंत्री को विशिष्ट पहचान देने की नहीं सोची, तो इस प्रकार के भ्रम फैलाने का औचित्य क्या है?

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पांचजन्य में लिखा गया है कि हिंदुओं का उत्पीड़न कर सेक्युलर राज स्थापित किए जाने को तत्पर इन नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि भारत में देश के बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों की चिंता करने वाली सरकार और प्रधानमंत्री क्यों नहीं होना चाहिए? ऐसा शासन और ऐसा प्रधानमंत्री निश्चिय ही हिंदू जीवन मूल्यों, संस्कारों और आदर्शों से प्रेरित होकर सभी मत, पंथों के हित चिंतन एवं उत्कर्ष के लिए काम करेगा। गौरतलब है कि इससे पहले संघ सरसंघचालक मोहन भागवत भी मोदी के समर्थन में खुलकर आए थे और उन्होंने सेक्युलर प्रधानमंत्री की नीतीश की मांग पर चोट की थी।

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पांचजन्य में लिखा है कि सर्वपंथसमभाव तो भारत के हिन्दू चिंतन की विशेषता है। ऐसे हिन्दुत्व को साम्प्रदायिक मानना और ‘सेक्‍युलरवाद’ को सत्ता की राजनीति का हथियार बना लेना, सुविधा की राजनीति के अलावा और कुछ नहीं है।

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