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किसान परिवार में जन्मे श्यामनाथ साह हर बच्चा से कहते हैं :वैमनस्य की भावना त्यागे सत्य की मार्ग पर चले और मुझसे आगे बढे

 
श्यामनाथ साह, जोगवनी

माला मिश्रा ,बिराटनगर (भारत नेपाल सीमा) ।सफलता किसी आवश्यकता कि मोहताज नही है अगर मन में दृढ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह बात सार्थक करके दिखाया है बिराटनगर नेपाल से सटे जोगबनी वासी  विजय शंकर साह के पुत्र एव स्वं सज्जन साह के प्रपोत्र श्याम नाथ साह ने किसान परिवार में जन्मे और प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में प्राप्त करने के बाद इन्होने अपना लक्ष्य ऊँचा ही रखा आज के नौजवान और बच्चों को इन्हे अपना आदर्श मानकर कठिन परिश्रम करना चाहिए। इनका चयन दो-दो उच्च पदों पर हुआ जिनमे पहला चयन 29 वि बिहार न्यायिक सेवा में सिविल जज के पद पर हुआ और दूसरा चयन भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्विद्यालय में से एक दिल्ली विश्विद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुआ। टेलीफोनिक बात में उन्होंने सफलता का रहस्य बताया कि हमेसा अपने उपर भरोसा और कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नही है । युवा और बच्चों से कहे कि अगर आपमें ये दोनों बाते है तो आप जो चाहे वो हासिल कर सकते है। अगर आप अपने परिवार और समाज को ख़ुशी देना चाहते है और उनके लिए कुछ करना चाहते है तो उनके अकांक्षाओ पर खरा उतरे। मैंने परिवार के लोगो के आखो में ख़ुशी का वो आंसू देखा है जो मेरे जीवन कि सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा सफलता एक मनुष्य के लिए नही बल्कि मेरी सफलता मेरे परिवार, मेरे शहर के युवा कि सफलता है मै अपने आप को पूर्ण सफल उस दिन मानूंगा जब हर एक बच्चा आगे बढे और अपने और अपने परिवार वालो के सपने साकार करे। हर एक बच्चे से यह आशा करता हूँ की वे वैमनस्य की भावना का त्यागकर सत्य कि मार्ग पर चले और मुझसे आगे बढे।

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